पेंशन के लिए भटक रहे 101 साल के स्वतंत्रता सेनानी,प्रशासन ने जिसे मृत घोषित किया,हिसार डीसी कार्यालय पहुंचे
101 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी नादर सिंह पेंशन के लिए हिसार डीसी कार्यालय पहुंचे। फतेहाबाद प्रशासन उन्हें मृत घोषित कर चुका था और दस्तावेज भी जल चुके हैं
101 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी नादर सिंह पेंशन बनवाने के लिए हिसार डीसी कार्यालय पहुंचे
➤ करीब तीन साल पहले फतेहाबाद प्रशासन ने नादर सिंह को मृत घोषित कर दिया था
➤ आजाद हिंद फौज में लड़े, दस्तावेज जलने के बाद स्वतंत्रता सेनानी साबित करने के लिए कर रहे संघर्ष
हरियाणा के फतेहाबाद से सटे गांव हिजरावां कलां के 101 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी नादर सिंह इन दिनों अपनी पेंशन बनवाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। गांव के इकलौते जिंदा स्वतंत्रता सेनानी नादर सिंह का दावा है कि उनकी आज तक पेंशन नहीं बनी है। इसी मांग को लेकर वह हिसार के डीसी कार्यालय पहुंचे और प्रशासन से पेंशन बनवाने की गुहार लगाई।
नादर सिंह का कहना है कि वह फतेहाबाद में कई सालों से पेंशन बनवाने के लिए प्रयास कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। अब उन्होंने हिसार प्रशासन से मदद की उम्मीद जताई है। पहले हिसार में ही फतेहाबाद जिला शामिल था, इसलिए नादर सिंह को उम्मीद है कि हिसार प्रशासन उनकी पेंशन बनवाने में मदद करेगा।
आजाद हिंद फौज में लड़े, पाकिस्तान से हिंदुस्तान आए थे
नादर सिंह के बेटे स्वरूप सिंह ने बताया कि उनके पिता ने आजाद हिंद फौज में लड़ाई लड़ी है। वह पाकिस्तान से हिंदुस्तान आए थे। इसके बाद उनके रिश्तेदार उन्हें अलवर ले गए।
स्वरूप सिंह के अनुसार, अलवर में टेंट में आग लगने से उनके पिता के सारे दस्तावेज जल गए। इसके बाद से ही नादर सिंह खुद को स्वतंत्रता सेनानी साबित करने और पेंशन बनवाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।
दस्तावेज जल जाने के कारण परिवार के सामने अपने दावे को साबित करने की चुनौती खड़ी हो गई। उम्र के इस पड़ाव पर भी नादर सिंह अपनी पहचान और पेंशन के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
करीब तीन साल पहले प्रशासन ने कर दिया था मृत घोषित
नादर सिंह की परेशानी सिर्फ पेंशन तक सीमित नहीं रही। करीब तीन साल पहले फतेहाबाद प्रशासन ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद उन्हें खुद को जिंदा साबित करने की जद्दोजहद करनी पड़ी।
हालांकि बाद में प्रशासन ने उन्हें जिंदा मान लिया, लेकिन प्रशासन की इस गलती से नादर सिंह और उनका परिवार काफी परेशान हो चुका है।
101 वर्ष से भी ज्यादा उम्र के नादर सिंह आज भी सही सलामत हैं। प्रशासन की ओर से मृत घोषित किए जाने के बाद उन्हें यह साबित करने के लिए भी संघर्ष करना पड़ा कि वह जीवित हैं।
स्मारक के पत्थर पर नाम के आगे लिख दिया था ‘स्वर्गीय’
स्वतंत्रता दिवस पर गांव में एक स्मारक स्थापित किया गया था। स्मारक के लिए लगाए गए पत्थर पर स्वतंत्रता सेनानी नादर सिंह के नाम के आगे ‘स्वर्गीय’ लिख दिया गया।
इसके बाद नादर सिंह खुद स्मारक के पास पहुंचे। अपने स्वतंत्रता सेनानी होने का सबूत लेकर वहां खड़े हुए और खुद चलकर यह दिखाया कि वह अभी जिंदा हैं।
परिवार के लिए यह घटना बेहद पीड़ादायक रही। नादर सिंह के बेटे स्वरूप सिंह ने बताया कि उनके पिता का अपमान किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि शोक जताने आने वाले लोगों को भी शर्मिंदगी महसूस होती है।
प्रशासनिक स्कीम के तहत लगाया गया था स्मारक
गांव के सरपंच प्रतिनिधि करण सिंह ने बताया कि गांव में यह स्मारक पंचायत की ओर से नहीं, बल्कि प्रशासनिक स्कीम के तहत लगवाया गया था।
करण सिंह के अनुसार, जब उनसे स्वतंत्रता सेनानी के बारे में पूछा गया था तो उन्होंने नादर सिंह का नाम बता दिया था। लेकिन जब बोर्ड बनकर आया तो उस पर नादर सिंह के नाम के आगे ‘स्वर्गीय’ लिखा हुआ था।
बाद में नादर सिंह के परिवार ने इस गलती की ओर ध्यान दिलाया। इसके बाद बोर्ड से ‘स्वर्गीय’ शब्द हटवा दिया गया।
अब 101 वर्षीय नादर सिंह एक बार फिर पेंशन की मांग को लेकर हिसार डीसी कार्यालय पहुंचे हैं। उनका कहना है कि वह लंबे समय से इसके लिए प्रयास कर रहे हैं और अब उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन उनकी समस्या का समाधान करेगा।
Akhil Mahajan