E20 से आगे बढ़ेगी सरकार? फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों पर जोर, ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग की तैयारी
भारत E20 से आगे इथेनॉल ब्लेंडिंग बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। सरकार फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों और शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर देगी
➤ E20 से आगे बढ़ने की तैयारी, फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देगी सरकार
➤ पीएम मोदी के सलाहकार तरुण कपूर बोले- ज्यादा इथेनॉल ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर फोकस
➤ फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों में 20 से 85% या 100% तक इथेनॉल इस्तेमाल की क्षमता
भारत में पेट्रोल के साथ इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकार अब E20 के मौजूदा स्तर से आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। इसके लिए फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने और उनमें ज्यादा प्रतिशत तक इथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल की अनुमति देने पर काम किया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सलाहकार तरुण कपूर ने बुधवार को इसकी जानकारी दी।
तरुण कपूर ने कहा कि देश में इथेनॉल का उत्पादन अब मौजूदा जरूरतों से ज्यादा होने लगा है। ऐसे में सरकार के सामने अगला कदम यह है कि अतिरिक्त इथेनॉल का इस्तेमाल कैसे बढ़ाया जाए। इसी दिशा में फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को सड़क पर उतारने और E20 से अधिक प्रतिशत तक इथेनॉल ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर ध्यान दिया जा रहा है।
उन्होंने यह बात ‘द इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस 2026’ के चौथे एडिशन को वर्चुअली संबोधित करते हुए कही।
तरुण कपूर बोले- E20 प्रोग्राम अब तक रहा सफल
तरुण कपूर ने कहा कि देश में E20 प्रोग्राम अब तक बहुत सफल रहा है। उन्होंने बताया कि कई ऑटोमोबाइल कंपनियां जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को लॉन्च करने की अपनी योजनाओं के बारे में बता चुकी हैं।
उन्होंने कहा, “अब हमारा फोकस फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को लाने और E20 से ज्यादा परसेंट तक ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर है।”
तरुण कपूर ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को बाजार में लाना ही पर्याप्त नहीं होगा। इन वाहनों के इस्तेमाल के लिए फ्यूल आउटलेट्स पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता भी बढ़ानी होगी। यानी सरकार को वाहन और ईंधन, दोनों स्तरों पर ऐसी व्यवस्था तैयार करनी होगी, जिससे ज्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण का इस्तेमाल संभव हो सके।
पश्चिम एशिया संकट के बीच बायोफ्यूल पर जोर
पीएम मोदी के सलाहकार ने पश्चिम एशिया संकट का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में बायोफ्यूल को बढ़ावा देना और भी जरूरी हो गया है। इस संकट से सप्लाई प्रभावित हुई है और कच्चे तेल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। आने वाले समय में कीमतों के और बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।
भारत अपनी जरूरत का करीब 80% से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के आयात खर्च पर पड़ता है। इससे ज्यादा डॉलर खर्च होते हैं और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है।
इसी वजह से सरकार घरेलू स्तर पर उपलब्ध वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दे रही है। इथेनॉल के उत्पादन में बढ़ोतरी को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चीनी और मक्के से बढ़ा इथेनॉल उत्पादन
देश में चीनी और मक्के से बनने वाले इथेनॉल की उत्पादन क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। इसके चलते अब उपलब्ध अतिरिक्त इथेनॉल को इस्तेमाल करने के लिए नए रास्तों की जरूरत महसूस की जा रही है।
सरकार के सामने एक प्रमुख विकल्प फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देना है। ऐसे वाहनों में ज्यादा मात्रा में इथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे देश में तैयार होने वाले अतिरिक्त इथेनॉल की खपत बढ़ाने का रास्ता भी खुल सकता है।
सामान्य कार और फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन में क्या अंतर?
मौजूदा समय में सड़कों पर चल रही सामान्य गाड़ियां अधिकतम E20 यानी 20% इथेनॉल मिश्रण तक के ईंधन के लिए तैयार हैं। E20 से ज्यादा इथेनॉल वाले ईंधन के इस्तेमाल से इन वाहनों के इंजन के कुछ पार्ट्स पर असर पड़ सकता है।
इसके विपरीत फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों में ऐसे इंजन लगाए जाते हैं, जो 20% से लेकर 85% या 100% यानी शुद्ध इथेनॉल तक के मिश्रण पर चल सकते हैं।
इन वाहनों में लगे सेंसर ईंधन में मौजूद इथेनॉल की मात्रा को पहचान लेते हैं। इसके बाद इंजन की परफॉर्मेंस को उसी हिसाब से एडजस्ट किया जाता है। यही तकनीक फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को अलग-अलग अनुपात वाले इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने में सक्षम बनाती है।
E20 पर उठे सवालों को तरुण कपूर ने बताया गलत जानकारी
E20 ब्लेंडिंग को लेकर हाल में हुई आलोचना पर भी तरुण कपूर ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि E20 की ज्यादातर आलोचनाएं गलत जानकारी पर आधारित थीं या फिर किसी खास मकसद से की गई होंगी।
उनके मुताबिक, विभिन्न स्टडीज में सामने आया है कि E20 अच्छा काम करता है। इथेनॉल मिश्रण के कारण फ्यूल एफिशिएंसी में थोड़ी-बहुत कमी आ सकती है, लेकिन इसकी भरपाई इथेनॉल के ज्यादा ऑक्टेन कंटेंट से हो जाती है।
सरकार अब E20 के बाद अगले चरण की ओर बढ़ने की तैयारी में है। इसमें फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ ज्यादा इथेनॉल मिश्रण की अनुमति और फ्यूल आउटलेट्स पर शुद्ध इथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाना प्रमुख फोकस रहेगा।
Akhil Mahajan