इकलौते भाई के संस्कार को किया मना, आश्रम संचालक से बोली बहन- टाइम नहीं, तुसी ही करा दो, मेहरबानी होवेगी, अस्थियां भी नहीं ली
: कुरुक्षेत्र में 71 वर्षीय जुगल किशोर की मौत के बाद बहन ने अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन से इनकार किया, आश्रम कमेटी ने पूरी रस्म निभाई
➤ इकलौते भाई के अंतिम संस्कार से बहन ने किया इनकार, आश्रम संचालक से हाथ जोड़कर बोली- आप ही कर दो संस्कार
➤ 71 वर्षीय जुगल किशोर की मौत के बाद बहन पुष्पा अस्पताल पहुंची, लेकिन शव छोड़कर रिश्तेदार के साथ चली गई
➤ अस्थियां भी नहीं लीं, आश्रम कमेटी ने अंतिम संस्कार कर सरस्वती नदी में किया अस्थि विसर्जन
कुरुक्षेत्र में इकलौते भाई के अंतिम संस्कार से बहन के इनकार का मामला सामने आया है। दिल्ली के उत्तम नगर निवासी जुगल किशोर (71) की इलाज के दौरान मौत हो गई। उनका शव कुरुक्षेत्र के LNJP अस्पताल में रखा था। भाई की मौत की सूचना मिलने पर उनकी छोटी बहन पुष्पा रानी अस्पताल पहुंची और आखिरी बार भाई का शव देखा, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए रुकने से मना कर दिया।
पिहोवा के नेशनल हाईवे 152D के पास बने बाबा फरीद अनाथ आश्रम के संचालक बाबा निशान सिंह ने पुष्पा से भाई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कहा। इस पर पुष्पा ने हाथ जोड़कर कहा कि उसके पास समय नहीं है और वह रुक नहीं सकती। उसने आश्रम संचालक से ही अंतिम संस्कार करने का आग्रह किया।
पुष्पा ने कहा, “संस्कार भी असी करिए, अस्थियां भी तुसी नी ले जा सकदे। हांजी, हांजी… तुसी ही कर दो संस्कार, तवाडी बौत मेहरबानी होवेगी। मेरे पास समा है नी। मैं रुक नहीं सकदी। जे मैं आप ठीक होंदी, ते रुक जांदी।”
हिंदी में इसका अर्थ है कि वह बाबा निशान सिंह से कह रही थी कि आप ही अंतिम संस्कार कर दें, आपकी बहुत मेहरबानी होगी। उसके पास समय नहीं है और वह रुक नहीं सकती। अगर उसकी तबीयत ठीक होती तो वह रुक जाती।
10 साल से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ में रह रहा था जुगल किशोर
बाबा निशान सिंह ने बताया कि दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला जुगल किशोर करीब 10 साल से पिहोवा के सरस्वती तीर्थ में रह रहा था। परिवार के बारे में केवल उसकी छोटी बहन पुष्पा की ही जानकारी थी। जुगल किशोर अपनी बहन से मिलने के लिए अक्सर जाता रहता था। उसकी शादी भी नहीं हुई थी। इसके अलावा परिवार के किसी अन्य सदस्य या रिश्तेदार के बारे में जानकारी नहीं थी।
जुगल किशोर पिछले करीब 10 साल से तीर्थ में रह रहा था और आश्रम से जुड़े लोगों के संपर्क में था। दो सप्ताह पहले उसकी तबीयत खराब हुई तो बाबा निशान सिंह उसे अपने साथ आश्रम ले आए और उसका इलाज कराया।
तबीयत बिगड़ी तो आश्रम लाए, पिहोवा अस्पताल में कराया इलाज
बाबा निशान सिंह के अनुसार, जुगल किशोर की तबीयत खराब होने के बाद उसे आश्रम लाया गया। वह कई दिन तक पिहोवा सरकारी अस्पताल में भर्ती रहा। इस दौरान उसकी बहन से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली।
बाद में जुगल किशोर की हालत को देखते हुए उसे कुरुक्षेत्र LNJP अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां उसे भर्ती कराया गया और इलाज शुरू हुआ।
बाबा निशान सिंह ने बताया कि काफी प्रयास के बाद जुगल की छोटी बहन पुष्पा रानी से संपर्क हुआ। उसे भाई की हालत ज्यादा खराब होने की जानकारी दी गई और आखिरी बार उसे देखने के लिए बुलाया गया। हालांकि, बहन लगातार आने की बात को टालती रही।
4 सितंबर को इलाज के दौरान मौत, आखिरी बार देखने अस्पताल पहुंची बहन
4 सितंबर को जुगल किशोर की इलाज के दौरान मौत हो गई। उसकी मौत की सूचना उसकी बहन पुष्पा को दी गई। इसके बाद वह बड़ी मुश्किल से कुरुक्षेत्र अस्पताल पहुंची।
अस्पताल में पुष्पा ने आखिरी बार अपने भाई का शव बिस्तर पर देखा। इसके बाद उससे भाई के अंतिम संस्कार के संबंध में बातचीत की गई। आश्रम संचालक और कमेटी की ओर से उसे अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए कहा गया।
बाबा निशान सिंह के मुताबिक, पुष्पा ने समय नहीं होने की बात कहते हुए अंतिम संस्कार में शामिल होने से साफ मना कर दिया। इसके बाद उसने भाई के शव को अस्पताल में ही छोड़ दिया और एक रिश्तेदार के साथ वहां से चली गई।
अस्थियां विसर्जित करने की बात कही तो हाथ जोड़कर किया इनकार
जब पुष्पा ने अंतिम संस्कार में शामिल होने से मना किया तो बाबा निशान सिंह ने उससे कहा कि कम से कम अस्थियां तो आपको ही विसर्जित करनी होंगी। इस पर पुष्पा ने हाथ जोड़ लिए।
बाबा निशान सिंह के अनुसार, पुष्पा ने कहा कि उसकी तबीयत ठीक नहीं है। इसलिए वह न तो भाई के अंतिम संस्कार में शामिल हो सकती है और न ही अस्थियां विसर्जित कर सकती है। उसने आश्रम संचालक से ही यह सब करने का आग्रह किया और कहा कि उनकी मेहरबानी होगी।
इसके बाद पुष्पा अपने एक रिश्तेदार के साथ वहां से चली गई। आश्रम संचालक के मुताबिक, उसने भाई के अंतिम दर्शन तक नहीं किए।
आश्रम कमेटी ने पिहोवा लाकर किया अंतिम संस्कार
पुष्पा के वहां से चले जाने के बाद बाबा निशान सिंह और आश्रम कमेटी ने जुगल किशोर के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने जुगल किशोर के शव को पिहोवा लाया और वहां स्वर्ग धाम में अंतिम संस्कार किया।
अंतिम संस्कार के दौरान बाबा निशान सिंह ने स्वयं जुगल किशोर की चिता को मुखाग्नि दी। आश्रम कमेटी के लोग भी इस दौरान मौजूद रहे।
इसके बाद मंगलवार को अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने पर अस्थियां सरस्वती नदी में प्रवाहित की गईं। इस पूरे मामले से जुड़े वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया।
बाबा निशान सिंह ने कहा कि बहन-भाई के ऐसे रिश्ते को देखकर उन्हें बेहद दुख हुआ। वीडियो सामने आने के बाद लोग भी इस घटना को लेकर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों से सामाजिक और पारिवारिक रिश्तों में आए बदलाव पर सवाल खड़े होते हैं।
आश्रम में 30 से ज्यादा बेघर लोग रह रहे
बाबा निशान सिंह पिहोवा के नेशनल हाईवे 152D के पास बने आश्रम की देखरेख कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके आश्रम में 30 से ज्यादा बेघर लोग रह रहे हैं। इनमें बच्चे, दिव्यांग, बुजुर्ग और बीमार लोग शामिल हैं।
आश्रम का निर्माण अभी चल रहा है। यहां रहने वाले लोगों की सेवा में बाबा निशान सिंह का बेटा हरिंद्र पाल और पुत्रवधू भी मदद करते हैं।
उन्होंने बताया कि लखविंद्र सिंह ने 2 कनाल जमीन दी थी। अब उनका बेटा अर्शदीप सिंह अमेरिका से मदद भेज रहा है। आश्रम में रहने वाले बेघर लोगों की देखभाल और सेवा का काम लगातार किया जा रहा है।
सोनीपत में भी सामने आया था ऐसा मामला, बेटियों ने वीडियो कॉल पर कराया था अंतिम संस्कार
हरियाणा में पारिवारिक रिश्तों के कमजोर पड़ते बंधन का यह पहला मामला नहीं है। करीब एक माह पहले सोनीपत आश्रम में दम तोड़ने वाले मुंबई के कपड़ा व्यापारी शिवचरण रामरत्न गुप्ता (74) के मामले में भी ऐसा ही देखने को मिला था।
शिवचरण रामरत्न गुप्ता की तीन टीचर बेटियों ने भी अंतिम संस्कार में आने से मना कर दिया था। बेटियों ने ऑनलाइन 5100 रुपए भेजकर वीडियो कॉल पर ही अंतिम संस्कार कराया था।
जब चिता को अग्नि दी जा रही थी, तब बेटी ने पूछा था कि “अभी और कितना टाइम लगेगा?” इस पर उसे बताया गया कि मुखाग्नि दी जा चुकी है और 10-15 मिनट में प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
इसके बाद बेटी ने कहा था, “सारा काम अच्छे से हो गया ना, मुझे सारी वीडियो भेज देना।”
कुरुक्षेत्र के जुगल किशोर के मामले में भी बहन के अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होने और अस्थियां तक नहीं लेने की बात सामने आई है। आश्रम कमेटी ने ही भाई के अंतिम संस्कार से लेकर अस्थि विसर्जन तक की पूरी जिम्मेदारी निभाई।
Akhil Mahajan