मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से किया मुक्त, कभी बनाया था अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी

मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को बसपा से पूरी तरह मुक्त कर दिया। कभी उत्तराधिकारी बने आकाश का राजनीतिक सफर पद, वापसी और निष्कासन से गुजरा।

मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से किया मुक्त, कभी बनाया था अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी

➤ मायावती ने आकाश आनंद को पार्टी से भी पूरी तरह किया मुक्त
➤ ससुर अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास के बाद आया बड़ा फैसला
➤ 2019 में राष्ट्रीय संयोजक बने आकाश का सियासी सफर कभी इन तो कभी आउट रहा


बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह ‘मुक्त’ करने का एलान कर दिया है। एक समय मायावती ने आकाश आनंद को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया था और उन्हें पार्टी में राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी थीं। अब वही आकाश आनंद एक बार फिर बसपा से बाहर हैं। पिछले कुछ वर्षों में आकाश का राजनीतिक सफर कई बार जिम्मेदारी मिलने, पद से हटाए जाने, पार्टी में वापसी और फिर बाहर किए जाने के दौर से गुजर चुका है।

मायावती ने गुरुवार को कहा कि आकाश आनंद को पहले राष्ट्रीय संयोजक के पद की जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था और अब उन्हें पार्टी से भी पूरी तरह आजाद कर दिया गया है। बसपा के आधिकारिक हैंडल से एक्स पर जारी पोस्ट में कहा गया कि 3 सितंबर 2026 को आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के अति-महत्वपूर्ण पद की सभी अहम जिम्मेदारियों से मुक्त किया गया था और अब उन्हें पार्टी में भी पूरी तरह से ‘फ्री’ यानी आजाद कर दिया गया है।

मायावती ने साफ शब्दों में कहा कि अगर आकाश आनंद पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं और ऐसे में उन्हें पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है।

मायावती के फैसले के पीछे सियासी घटनाक्रम क्या रहा?

आकाश आनंद को पार्टी से मुक्त किए जाने का फैसला ऐसे समय आया है, जब उनके ससुर और बसपा नेता अशोक सिद्धार्थ ने भी राजनीति से संन्यास लेने का एलान किया है। मायावती ने अशोक सिद्धार्थ के इस फैसले को देर से उठाया गया सही कदम बताया।

मायावती का आरोप है कि अगर अशोक सिद्धार्थ ने यह फैसला पहले ही ले लिया होता तो बसपा, बहुजन समाज, बहुजन मूवमेंट और आकाश आनंद को विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता।

दरअसल, मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए उनके ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ से राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने की मांग की थी। इसके बाद गुरुवार को अशोक सिद्धार्थ ने राजनीति से संन्यास लेने का एलान कर दिया। उन्होंने मायावती को संबोधित करते हुए एक्स पर लिखा कि ‘बहन जी का हर आदेश मेरे लिए अंतिम है।’

यहीं से बसपा की मौजूदा राजनीति का एक अहम पहलू सामने आता है। आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य और उनके आसपास सक्रिय नेताओं को लेकर मायावती का रुख पिछले कुछ समय में लगातार सख्त दिखाई दिया है।

आकाश आनंद को गुमराह करने और पार्टी पर कब्जे की कोशिश का आरोप

मायावती ने आकाश आनंद को गुमराह करने और पार्टी पर कब्जा करने की कोशिश से जुड़े आरोपों को साजिश बताया है। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कई महीनों में उनकी आकाश आनंद से मुलाकात तक नहीं हुई।

इस घटनाक्रम ने बसपा के भीतर नेतृत्व और उत्तराधिकार को लेकर चल रही चर्चाओं को फिर से सामने ला दिया है। हालांकि, मौजूदा फैसले ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि जिस आकाश आनंद को कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर आगे बढ़ाया गया था, अब उन्हें पार्टी से ही मुक्त कर दिया गया है।

पहले भी आकाश आनंद को पार्टी से निकाला जा चुका है

आकाश आनंद के लिए यह पहला मौका नहीं है, जब मायावती ने उन्हें पार्टी से बाहर किया हो। इससे पहले भी मायावती अपने भतीजे को बसपा से निष्कासित कर चुकी हैं।

उस समय भी मायावती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा था कि आकाश आनंद को उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ की तरह ही पार्टी और आंदोलन के हित में निष्कासित किया गया है। हालांकि, बाद में आकाश आनंद की पार्टी में फिर वापसी हुई और उन्हें दोबारा महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।

यही वजह है कि आकाश आनंद का बसपा में राजनीतिक सफर ‘कभी इन, कभी आउट’ की कहानी बन गया है। एक तरफ उन्हें पार्टी के भविष्य के चेहरे के तौर पर आगे बढ़ाया गया, तो दूसरी तरफ समय-समय पर उन्हें संगठन और महत्वपूर्ण पदों से दूर भी किया गया।

2019 में राष्ट्रीय संयोजक बने, 2023 में उत्तराधिकारी घोषित हुए

आकाश आनंद मायावती के सबसे छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। वह 2017 में लंदन से पढ़ाई पूरी करके लौटने के बाद बसपा के कामकाज से जुड़े थे।

मई 2017 में सहारनपुर में ठाकुरों और दलितों के बीच संघर्ष के दौरान वह मायावती के साथ वहां गए थे। इसके बाद धीरे-धीरे पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता बढ़ती गई।

2019 के लोकसभा चुनाव के बाद आकाश आनंद को बसपा का राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया। इसके बाद उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में पार्टी के युवा चेहरे के तौर पर देखा जाने लगा। हालांकि, पार्टी को जीत की दौड़ में लाने में वह कामयाब नहीं रहे।

इसके बाद 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया। यह फैसला इसलिए भी अहम था क्योंकि इससे बसपा के भविष्य के नेतृत्व को लेकर तस्वीर काफी हद तक साफ होती दिखाई दी थी।

लेकिन आकाश का यह राजनीतिक उभार ज्यादा स्थिर नहीं रह सका।

लोकसभा चुनाव से पहले पद से हटाए गए, फिर हुई वापसी

मायावती ने पिछले साल लोकसभा चुनाव से पहले आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटा दिया था। उस समय इसके पीछे यह तर्क दिया गया था कि आकाश को अभी और राजनीतिक परिपक्वता हासिल करने की जरूरत है।

हालांकि, आकाश को उस समय हटाया गया जब वह सत्ताधारी भाजपा पर सीधे और तीखे हमले कर रहे थे। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद आकाश आनंद की पार्टी में फिर वापसी हुई।

जनवरी में तो एक तरह से उन्हें प्रमोट करते हुए राज्यों की जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया और उन्हें सांगठनिक तथा कैंपेन से जुड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारियां दी गईं।

लेकिन यह राजनीतिक बढ़त भी लंबे समय तक कायम नहीं रह सकी।

दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को नहीं मिली कामयाबी

हाल ही में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आकाश आनंद पार्टी के प्रभारी थे। लेकिन बसपा को सीट जीतना तो दूर, पार्टी के वोट शेयर में भी गिरावट आई।

इसके बाद पार्टी नेतृत्व और आकाश आनंद के बीच मतभेदों की चर्चा तेज होती गई। 2025 से मायावती और आकाश आनंद के बीच तल्खियां बढ़ने लगीं और इन मतभेदों के केंद्र में बार-बार आकाश के ससुर अशोक सिद्धार्थ का नाम सामने आया।

अब अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने और आकाश आनंद को पार्टी से पूरी तरह मुक्त किए जाने के फैसले ने इस पूरे घटनाक्रम को एक नए मोड़ पर ला दिया है।

कौन हैं आकाश आनंद, जिन्हें मायावती ने आगे बढ़ाया था?

आकाश आनंद बसपा प्रमुख मायावती के सबसे छोटे भाई आनंद कुमार के बेटे हैं। राजनीति में आने से पहले उन्होंने विदेश में पढ़ाई की। 2017 में लंदन से पढ़ाई करने के बाद भारत लौटे और बसपा के कामकाज से जुड़ गए।

पार्टी में सक्रिय भूमिका मिलने के बाद उनका कद लगातार बढ़ता गया। 2019 में उन्हें राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया और 2023 में मायावती ने उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

इस तरह कुछ ही वर्षों में आकाश आनंद बसपा की राजनीति में एक ऐसे चेहरे के रूप में उभरे, जिन्हें मायावती के बाद पार्टी की कमान संभालने वाले नेता के तौर पर देखा जाने लगा था।

लेकिन अब मायावती के ताजा फैसले ने उनके राजनीतिक भविष्य को एक बार फिर अनिश्चित मोड़ पर ला खड़ा किया है।

लिंक्डइन प्रोफाइल में कारोबारी पहचान का भी जिक्र

आकाश आनंद के नाम से एक लिंक्डइन प्रोफाइल भी मिली है, जिसमें उनकी तस्वीर लगी हुई है। इस प्रोफाइल में उनका पद फाउंडर एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, डीजेटी कॉरपोरेशन एंड इन्वेस्टमेंट्स लिखा हुआ है।

प्रोफाइल के मुताबिक, आकाश डीजेटी कॉरपोरेशन एंड इन्वेस्टमेंट्स के संस्थापक हैं और उन्होंने यह कंपनी अप्रैल 2016 में बनाई थी।

प्रोफाइल में यह भी जानकारी दी गई है कि आकाश ने 2013 से 2016 के बीच यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ प्लीमथ से बीबीए की पढ़ाई की है। उन्होंने गुडगांव के पाथवेज़ वर्ल्ड स्कूल से भी पढ़ाई की है।

लिंक्डइन प्रोफाइल में आकाश ने अपने बारे में बताया है कि वह पहली पीढ़ी के कारोबारी परिवार से आते हैं और अपने निजी अनुभवों के कारण उद्यमी बने। प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने अपना कारोबार शून्य से स्थापित करने की शुरुआत की और फिलहाल अपने ग्रुप की चार कंपनियों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

इन कंपनियों से जुड़े उनके कारोबारी संचालन रिटेल ट्रेड, फाइनेंस और इंश्योरेंस से संबंधित हैं।

मायावती के उत्तराधिकारी से पार्टी से बाहर तक पहुंचा सफर

आकाश आनंद की कहानी बसपा की मौजूदा राजनीति में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करती है। जिस युवा नेता को मायावती ने पहले संगठन में अहम जिम्मेदारी दी, फिर राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाया और अंततः अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया, वही नेता अब पार्टी से पूरी तरह मुक्त कर दिए गए हैं।

आकाश आनंद का राजनीतिक सफर 2017 में बसपा से जुड़ने के बाद तेजी से आगे बढ़ा। 2019 में राष्ट्रीय संयोजक, 2023 में राजनीतिक उत्तराधिकारी, फिर पद से हटना, पार्टी में वापसी, राष्ट्रीय जिम्मेदारियां मिलना और अब दोबारा पार्टी से बाहर होना—इन घटनाओं ने उनके सियासी सफर को लगातार उतार-चढ़ाव वाला बना दिया है।

मायावती के ताजा फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि आकाश आनंद का अगला राजनीतिक कदम क्या होगा और क्या वह सक्रिय राजनीति में स्वतंत्र भूमिका तलाशेंगे। फिलहाल मायावती ने उन्हें बसपा से पूरी तरह मुक्त करने का फैसला सुना दिया है।