वन विभाग ने कटवा दिए खैर के 34 पेड़, FIR दर्ज; DFO समेत अफसर सस्पेंड

पंचकूला की मोरनी-पिंजौर वन रेंज में 34 खैर के पेड़ काटे मिले। तस्कर रेड के दौरान फरार हुए, आठ नामजद समेत 13 पर FIR दर्ज हुई।

वन विभाग ने कटवा दिए खैर के 34 पेड़, FIR दर्ज; DFO समेत अफसर सस्पेंड

➤ पंचकूला में रात के अंधेरे में काटे गए खैर के 34 पेड़, तस्कर कार छोड़कर फरार
➤ वन विभाग के वॉचमैन की मिलीभगत से अवैध कटान का आरोप, आठ नामजद समेत 13 पर FIR
➤ छह महीने पहले खैर कटान मामले में DFO समेत तीन अधिकारी हो चुके हैं सस्पेंड


पंचकूला की मोरनी-पिंजौर वन रेंज में बेशकीमती खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। रात के अंधेरे में जंगल के भीतर खैर के 34 पेड़ काट दिए गए। वन विभाग की टीम को इसकी सूचना मिली तो मौके पर रेड की गई, लेकिन टीम के पहुंचने की भनक लगते ही तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर कार से फरार हो गए। इसके बाद वन विभाग की टीम ने जंगल के अंदर सर्च अभियान चलाया तो सड़क से करीब 1 से 1.5 किलोमीटर भीतर 26 खैर के पेड़ कटे हुए मिले। जंगल की दूसरी तरफ भी 8 खैर के पेड़ कटे हुए पाए गए।

जांच के दौरान सामने आया कि पेड़ों को काटने के बाद उनके लट्ठे (सौरा) भी तैयार कर लिए गए थे। इन्हें जंगल से निकालकर सड़क के पास लाया गया था, ताकि वाहनों में भरकर ले जाया जा सके। वन विभाग की टीम ने कटे हुए सभी पेड़ों को जब्त कर लिया है। मामले में आठ नामजद सहित 13 तस्करों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे गंभीर बात यह है कि वन विभाग की ओर से तस्करों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगाए गए वॉचमैन की मिलीभगत से अवैध कटान चलने की बात सामने आई है। इससे जंगल की सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय निगरानी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

खोलमोला के पास संदिग्ध सेंट्रो कार की सूचना से खुला मामला

वन विभाग को 24 जून को सूचना मिली थी कि गांव खोलमोला के पास आर-71 सी-9 जंगल से गुजरने वाले कौना लिंक रोड पर एक गोल्डन रंग की संदिग्ध सेंट्रो कार खड़ी है। सूचना मिलते ही वन दरोगा सुमित सिंह, जो नानकपुर ब्लॉक के इंचार्ज हैं, और बीट-9 इंचार्ज वन रक्षक सचिन अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे।

वन विभाग की टीम के मौके पर पहुंचने की भनक लगते ही कार चालक ने अंधेरे का फायदा उठाया और गाड़ी को तेजी से वहां से भगा लिया। वन विभाग की टीम ने कार का पीछा भी किया, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर कार सवार फरार हो गए।

कार मौके से निकल गई, लेकिन इस संदिग्ध गतिविधि ने वन विभाग की टीम को जंगल के भीतर जांच करने के लिए मजबूर किया। इसके बाद आसपास के इलाके और जंगल में सर्च अभियान चलाया गया।

सड़क से डेढ़ किलोमीटर अंदर मिले 26 कटे पेड़

टीम ने जब जंगल के भीतर जाकर निरीक्षण किया तो सड़क से करीब 1 से 1.5 किलोमीटर अंदर 26 खैर के पेड़ कटे हुए मिले। जंगल की दूसरी तरफ भी 8 और खैर के पेड़ कटे पड़े थे। इस तरह जांच में कुल 34 खैर के पेड़ों की कटाई सामने आई।

तस्करों ने पेड़ों को काटने के बाद उनके लट्ठे यानी सौरा भी तैयार कर रखे थे। कुछ लट्ठों को सड़क के पास लाया जा चुका था। माना गया कि इन्हें आगे वाहनों में भरकर जंगल से बाहर ले जाने की तैयारी थी।

वन विभाग की टीम ने मौके से काटे गए सभी पेड़ों को जब्त कर लिया। इस मामले में विभाग की ओर से पहले ही फॉरेस्ट ऑफेन्स रिपोर्ट (FOR) दर्ज की जा चुकी थी और मामले की लगातार जांच की जा रही थी।

मुखबिर की सूचना से सामने आया संदिग्ध कार और गैंग का कनेक्शन

जांच आगे बढ़ने पर वन विभाग की टीम ने संदिग्ध सेंट्रो कार और अपने मुखबिर तंत्र से मिली जानकारी को खंगाला। जांच में पता चला कि जिस गोल्डन रंग की सेंट्रो कार को मौके से भागते हुए देखा गया था, उसका इस्तेमाल मेहदा पुत्र बरकत निवासी नगली द्वारा किया जा रहा था।

जांच के दौरान मुखबिर ने यह भी जानकारी दी कि मेहदा ने अपनी दिहाड़ी पर गैंग के कई अन्य लोगों को अवैध कटाई के लिए जंगल में उतारा था। इस जानकारी के आधार पर वन विभाग ने मामले में शामिल लोगों की पहचान और उनकी भूमिका की जांच आगे बढ़ाई।

इसी जांच के आधार पर मामले में आठ नामजद सहित कुल 13 तस्करों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। फिलहाल कटे हुए पेड़ों को जब्त कर लिया गया है और मामले की जांच जारी है।

छह महीने पहले भी आसरेवाली में हुआ था खैर कटान

पंचकूला में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई का यह मामला इसलिए भी गंभीर है, क्योंकि करीब छह माह पहले भी आसरेवाली संरक्षित वन क्षेत्र (वाइल्ड लाइफ सैंक्चुरी) से खैर के पेड़ काट लिए गए थे।

उस मामले के बाद वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे। कार्रवाई करते हुए वन मंत्री राव नरबीर सिंह ने वाइल्ड लाइफ DFO राजेंद्र प्रसाद डांगी, टेरिटोरियल DFO विशाल कौशिक और वाइल्ड लाइफ इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह को सस्पेंड कर दिया था।

अब मोरनी-पिंजौर वन रेंज में एक बार फिर खैर के पेड़ों की बड़े पैमाने पर कटाई सामने आने से विभागीय निगरानी को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। खास तौर पर इस मामले में वन विभाग के लिए निगरानी पर रखे गए वॉचमैन की कथित मिलीभगत सामने आने के बाद जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है।

बेशकीमती खैर के पेड़ों की कटाई से वन सुरक्षा पर सवाल

मोरनी-पिंजौर का जंगल खैर के पेड़ों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है। ऐसे में रात के अंधेरे में 34 पेड़ों का काटा जाना वन क्षेत्र की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

वन विभाग की टीम को संदिग्ध कार की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचने में तो सफलता मिली, लेकिन तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में कामयाब रहे। इसके बाद जंगल के भीतर की गई सर्च में बड़े पैमाने पर पेड़ कटे मिलने से साफ हुआ कि मामला केवल संदिग्ध वाहन तक सीमित नहीं था, बल्कि जंगल के अंदर काफी पेड़ों को पहले ही काटा जा चुका था।

अब 13 लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और जांच में सामने आए नामों के आधार पर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। छह महीने के भीतर खैर कटान की दूसरी बड़ी घटना सामने आने से वन विभाग के सामने जंगल की निगरानी और अवैध कटान रोकने की चुनौती और बढ़ गई है।