7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग, BRICS समिट में PM मोदी से होगी मुलाकात; चीन ने दौरे पर लगाई मुहर

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को भारत आएंगे। BRICS समिट में शामिल होंगे और PM मोदी से द्विपक्षीय बैठक करेंगे, 7 साल बाद भारत दौरा।

7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग, BRICS समिट में PM मोदी से होगी मुलाकात; चीन ने दौरे पर लगाई मुहर

➤ 7 साल बाद भारत आएंगे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, 12-13 सितंबर को BRICS समिट में होंगे शामिल
➤ पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच भारत मंडपम में होगी द्विपक्षीय बैठक, रिश्तों पर रहेगी दुनिया की नजर
➤ 11 देशों के राष्ट्राध्यक्ष होंगे शामिल, BRICS में दुनिया की 49.5 फीसदी आबादी और 40 फीसदी GDP का प्रतिनिधित्व


चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आखिरकार 7 साल बाद भारत आने वाले हैं। पिछले कई दिनों से उनके दिल्ली दौरे को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब चीन के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर उनके भारत आने की पुष्टि कर दी है। चीन ने बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आएंगे।

भारत 12 से 13 सितंबर तक नई दिल्ली के भारत मंडपम में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। जिनपिंग की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब भारत और चीन सीमा विवाद को लेकर पैदा हुए तनाव के बाद अपने संबंधों को फिर से स्थिर करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में उनकी भारत यात्रा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

चीन ने खत्म किया सस्पेंस, विदेश मंत्रालय ने की जिनपिंग के दौरे की पुष्टि

पिछले कुछ दिनों से चीन की ओर से राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई थी। चीन के विदेश मंत्रालय की पिछली दो-तीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उनके भारत दौरे को लेकर सस्पेंस बना हुआ था। साफ तौर पर यह नहीं बताया गया था कि जिनपिंग BRICS समिट में शामिल होने भारत आएंगे या नहीं।

अब चीन के विदेश मंत्रालय की ओर से आधिकारिक बयान जारी कर दिया गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आएंगे और 12-13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।

इस घोषणा के साथ ही जिनपिंग के दिल्ली दौरे को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लग गया है। चीन की ओर से आधिकारिक पुष्टि के बाद अब BRICS समिट में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात पर दुनिया की निगाहें टिक गई हैं।

सात साल बाद भारत की धरती पर होंगे शी जिनपिंग

शी जिनपिंग की भारत यात्रा करीब सात साल बाद हो रही है। उनकी पिछली भारत यात्रा 11-12 अक्टूबर 2019 को हुई थी। उस समय वह तमिलनाडु के मामल्लापुरम पहुंचे थे, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भारत-चीन के दूसरे अनौपचारिक शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे।

जिनपिंग पहली बार सितंबर 2014 में भारत आए थे। उस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक बातचीत की थी। इसके बाद वह 2016 में गोवा में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आए थे।

इसके बाद 2019 में अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए उन्होंने भारत का दौरा किया था। अब 2026 में BRICS समिट के लिए उनकी प्रस्तावित भारत यात्रा करीब सात साल बाद हो रही है।

भारत में शी जिनपिंग की पिछली यात्राएं

  • सितंबर 2014: पहली बार भारत आए और प्रधानमंत्री मोदी के साथ व्यापक बातचीत की
  • 2016: गोवा में हुए BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल हुए
  • 2019: भारत-चीन की अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए भारत आए
  • 2026: करीब सात साल बाद BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे

पीएम मोदी और जिनपिंग के बीच होगी अहम द्विपक्षीय बैठक

सूत्रों के मुताबिक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब 24 घंटे दिल्ली में रहेंगे। बताया जा रहा है कि वह 12 सितंबर को दोपहर 12 बजे दिल्ली पहुंचेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच भारत मंडपम में द्विपक्षीय बातचीत होगी।

द्विपक्षीय बैठक के बाद जिनपिंग BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इसके अगले दिन 13 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे वह वापस चीन के लिए रवाना होंगे।

जिनपिंग की इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक पर खास नजर रहेगी। दोनों देशों के बीच सीमा विवाद के बाद संबंधों में आई तल्खी को कम करने और रिश्तों को फिर से स्थिर करने की कोशिशों के बीच यह मुलाकात महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

BRICS के मंच पर दुनिया की नजर, मोदी-जिनपिंग मुलाकात होगी अहम

12 सितंबर की तारीख भारत और चीन के संबंधों के लिहाज से खास रहने वाली है। इसी दिन दिल्ली में BRICS का शिखर सम्मेलन शुरू होगा और दुनिया की नजरें भारत मंडपम पर होंगी। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर रहेगा।

दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बैठक केवल दो देशों के प्रमुखों के बीच होने वाली सामान्य मुलाकात नहीं होगी, बल्कि इसका असर भारत-चीन संबंधों के साथ-साथ व्यापक एशियाई रणनीतिक समीकरणों पर भी देखा जाएगा।

भारत और चीन के बीच हाल के वर्षों में सीमा विवाद को लेकर तनाव रहा है। ऐसे में दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की आमने-सामने बातचीत को रिश्तों को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयासों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

चीन की ओर से भी रिश्तों को लेकर आए सकारात्मक संकेत

BRICS समिट से पहले चीन की तरफ से भी भारत-चीन संबंधों को लेकर सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। भारत में चीनी दूतावास की आधिकारिक प्रवक्ता यू जिंग ने एक्स पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के बयान को शेयर किया था।

रणधीर जायसवाल ने कहा था कि भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने दोनों देशों के बीच लोगों के आपसी जुड़ाव को भी महत्वपूर्ण बताया था।

ऐसे में शी जिनपिंग का भारत दौरा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक दोनों देशों के बीच संबंधों को लेकर आगे की दिशा के लिहाज से अहम हो सकती है।

BRICS को सफल बनाने पर रूस और चीन की भी नजर

BRICS अब चार महाद्वीपों में फैला एक प्रभावशाली जियो-पॉलिटिक्स ग्रुप बन चुका है। समय के साथ नए सदस्य देशों के जुड़ने से संगठन की आर्थिक और रणनीतिक ताकत लगातार बढ़ी है।

रूस और चीन दोनों का मानना है कि BRICS शिखर सम्मेलन को हर हाल में सफल बनाया जाए। भारत की मेजबानी में होने वाले इस सम्मेलन में कई बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्ष हिस्सा ले रहे हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी समिट में मौजूद होंगे।

समिट में सभी 11 सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष मौजूद होंगे। ऐसे में नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन वैश्विक राजनीति और बदलते आर्थिक समीकरणों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।

2026 में भारत के हाथों में BRICS की कमान

साल 2026 में BRICS की अध्यक्षता भारत के हाथों में है। यह भारत की चौथी BRICS अध्यक्षता है। भारत अपनी अध्यक्षता के दौरान संगठन को अधिक समावेशी, प्रभावी और समाधान-केंद्रित मंच बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

भारत की 2026 की अध्यक्षता का विषय “बिल्डिंग फॉर रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन एंड सस्टेनेबिलिटी” रखा गया है। इसके तहत संगठन की भूमिका को आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ व्यापक वैश्विक चुनौतियों के समाधान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

11 देशों का संगठन, दुनिया की 49.5 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व

वर्तमान में BRICS में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सहित कुल 11 सदस्य देश शामिल हैं।

ये 11 देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 फीसदी आबादी, 40 फीसदी GDP और 26 फीसदी वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह आंकड़े BRICS की बढ़ती आर्थिक और डेमोग्राफिक ताकत को दर्शाते हैं।

ऐसे में नई दिल्ली में होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का महत्व केवल सदस्य देशों तक सीमित नहीं रहेगा। खास तौर पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात पर वैश्विक राजनीति की नजर रहेगी।

शी जिनपिंग के भारत दौरे की चीन की ओर से आधिकारिक पुष्टि के बाद अब 12 सितंबर को दिल्ली में होने वाली उनकी मौजूदगी तय हो गई है। सात साल बाद भारत आ रहे जिनपिंग की इस यात्रा में BRICS समिट के साथ प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय बातचीत सबसे अहम घटनाक्रमों में शामिल होगी।