BREAKING: दिल्ली में भरभराकर गिरीं दो इमारतें, मलबे में दबे दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र; भारी नुकसान की आशंका

दिल्ली के सत्य निकेतन में दो बिल्डिंग गिरने से PG में रह रहे कई छात्र मलबे में फंसे, NDRF और रेस्क्यू टीमें बचाव अभियान में जुटीं

BREAKING: दिल्ली में भरभराकर गिरीं दो इमारतें, मलबे में दबे दिल्ली यूनिवर्सिटी के कई छात्र; भारी नुकसान की आशंका

सत्य निकेतन में दो इमारतें गिरीं, PG में रह रहे कई छात्र मलबे में फंसे

➤ अब तक 10-15 छात्रों को बचाने का दावा, NDRF समेत रेस्क्यू टीमें मौके पर

➤ पतली गली में JCB से मलबा हटाने और डॉग स्क्वॉड से तलाश जारी


नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे दो इमारतें गिरने से हड़कंप मच गया। इनमें एक इमारत छह मंजिला बताई जा रही है, जिसमें PG चलता था। हादसे के समय छात्र अपने कमरों में मौजूद थे। शुरुआती जानकारी के मुताबिक कई छात्र मलबे में फंसे हैं और राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है। स्थानीय लोगों के मुताबिक इमारत गिरने के तुरंत बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंच गए और हथौड़ों से मलबा हटाकर छात्रों को बाहर निकालने की कोशिश शुरू कर दी। अब तक कई छात्रों को बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आई है।

 DUSU अध्यक्ष आर्यन मान ने करीब 10-15 छात्रों को बचाए जाने की बात कही है। हादसे की गंभीरता को देखते हुए आसपास की दूसरी इमारतों को भी सुरक्षा के लिहाज से खाली कराया गया है। मलबे में कुछ वाहन भी दब गए हैं, जिससे राहत एवं बचाव कार्य में परेशानी बढ़ी है।

बिल्डिंग गिरने के बाद स्थानीय तुरंत मौके पर पहुंचे। कुछ हथौड़े से मलबा हटाने लगे।

हादसे के वक्त PG के कमरों में थे छात्र, कई के फंसे होने की आशंका

चश्मदीद के मुताबिक गिरी हुई इमारत का नाम 'हॉस्टल डेज' है। उन्होंने इसे लड़कों के लिए बना PG बताया और कहा कि हादसे के समय जो छात्र अपने कमरों में थे, वे मलबे में फंस गए। चश्मदीद के अनुसार इमारत पांच मंजिला थी और इसके ठीक बगल में एक दूसरी इमारत भी गिर गई। कितने छात्र अंदर फंसे हैं, इसकी सही संख्या रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड देखने के बाद ही पता चल सकेगी ! चश्मदीद ने बताया कि इमारत गिरने के बाद करीब 15-20 मिनट से फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमें छात्रों को बाहर निकालने में जुटी थीं। कई छात्रों को गंभीर चोटें आने की बात भी सामने आई है।

मलबे में कुछ गाड़ियां भी दबी हैं। गाड़ियों को किनारे करके रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंच रही है।

NDRF की टीम मौके पर, डॉग स्क्वॉड से मलबे में तलाश

हादसे के बाद NDRF की पूरी टीम मौके पर पहुंच गई। रेस्क्यू टीमों ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू कर दी है। दबे हुए लोगों को खोजने के लिए डॉग स्क्वॉड भी बुलाया गया है।रेस्क्यू टीम मौके पर ऑक्सीजन सिलेंडर और स्ट्रेचर लेकर पहुंची। मलबे से बाहर निकाले गए घायलों को सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया है। दोपहर बाद JCB मशीन की मदद से भी मलबा हटाने का काम शुरू किया गया। संकरी गली होने के कारण भारी मशीनों और रेस्क्यू टीमों की आवाजाही में दिक्कत आ रही है।

जिस गली में यह हादसा हुआ, वह बहुत पतली है। आसपास कई ऊंची बिल्डिंग मौजूद हैं।

स्थानीय लोगों ने हाथ से हटाई एक-एक ईंट

इमारत गिरने के बाद मौके पर पहुंचे स्थानीय लोगों ने राहत टीमों के पहुंचने से पहले ही अपने स्तर पर बचाव शुरू कर दिया। लोगों ने हाथ से एक-एक ईंट हटाकर मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की। हादसे वाली गली काफी पतली है और उसके आसपास कई ऊंची इमारतें मौजूद हैं। इसके चलते रेस्क्यू अभियान को चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मलबे के नीचे कुछ गाड़ियां भी दब गई हैं, जिन्हें हटाकर बचाव दल को आगे बढ़ने की कोशिश की जा रही है।

DUSU अध्यक्ष बोले- 10-15 छात्रों को बचाया गया

DUSU अध्यक्ष आर्यन मान ने बताया कि अब तक करीब 10-15 छात्रों को बचाया जा चुका है, जबकि कुछ छात्र अभी भी अंदर फंसे हुए हैं। उन्होंने कहा कि वे छात्रों के संपर्क में हैं और NDRF की पूरी टीम मौके पर पहुंच गई है। आर्यन मान के मुताबिक उन्होंने मुख्यमंत्री से भी बात की है और छात्रों की मदद के लिए अन्य टीमें भी मौके पर पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी की मौत की खबर नहीं है।

भाजपा विधायक बोले- मलबे के अंदर कई छात्र फंसे

भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने हादसे को बेहद दुखद बताया। उन्होंने कहा कि अलग-अलग जगहों से छात्र पढ़ाई के लिए दिल्ली आते हैं और इस इमारत में PG में रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह कहना मुश्किल है कि मलबे के अंदर पांच, 10 या 20 छात्र हैं, लेकिन इतना तय है कि छात्र अंदर फंसे हुए हैं।

बिल्डिंग का पूरा हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया है।

सत्य निकेतन में बड़ी संख्या में PG और हॉस्टल में रहते हैं छात्र

सत्य निकेतन दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के पास स्थित प्रमुख छात्र इलाकों में शामिल है। यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और हॉस्टल में रहते हैं। इलाके में कई छात्र आवास हैं और आसपास वेंकटेश्वर कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज जैसे संस्थान मौजूद हैं। इसी वजह से यहां दिनभर छात्रों की आवाजाही रहती है।हालांकि, सत्य निकेतन में कुल कितने छात्र रहते हैं, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

बिल्डिंग गिरने से नीचे खड़ी गाड़ियां भी मलबे की चपेट में आ गईं।

बिल्डिंग गिरने की चार संभावित वजहों की चर्चा

मीडिया रिपोर्ट्स में बिल्डिंग गिरने की चार संभावित वजहों का जिक्र किया गया है। हालांकि हादसे की वास्तविक वजह की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। बेसमेंट के लिए चल रही थी खुदाई बताया जा रहा है कि बिल्डिंग के नीचे बेसमेंट बनाने का काम चल रहा था। इससे नींव पर दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। एक चश्मदीद ने दावा किया कि बिल्डिंग के नीचे के पिलर कमजोर थे। अगर पिलर इमारत का भार संभालने में सक्षम नहीं रहे हों, तो इससे ढांचा गिर सकता है। बेसमेंट या अन्य निर्माण कार्य के दौरान नींव, पिलर अथवा इमारत के दूसरे हिस्सों में बदलाव हुआ हो, तो इससे ढांचे की मजबूती प्रभावित होने की संभावना हो सकती है। एक संभावना यह भी जताई जा रही है कि अगर इमारत की नींव या ढांचा पहले से कमजोर था, तो निर्माण के दौरान पड़ा अतिरिक्त दबाव हादसे की वजह बना हो सकता है। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है। हादसे में कितने लोग फंसे हैं और इमारत गिरने की वास्तविक वजह क्या रही, इसकी स्थिति बचाव अभियान और जांच आगे बढ़ने के बाद स्पष्ट होगी।