CM नायब सैनी के कार्यक्रम से फिर दूर रहे राव इंद्रजीत, पोस्टरों में नाम के बावजूद नहीं पहुंचे

रेवाड़ी में CM नायब सैनी के मैराथन कार्यक्रम में राव इंद्रजीत फिर नहीं पहुंचे। पोस्टरों में नाम के बावजूद गैरहाजिरी और CM के जवाब ने बढ़ाई सियासी चर्चा

CM नायब सैनी के कार्यक्रम से फिर दूर रहे राव इंद्रजीत, पोस्टरों में नाम के बावजूद नहीं पहुंचे

रेवाड़ी में CM नायब सैनी के कार्यक्रम से फिर दूर रहे राव इंद्रजीत
पोस्टर-बैनर में नाम, कार्यक्रम में गैरहाजिरी पर CM ने सवाल का जवाब नहीं दिया
तीन कार्यक्रमों से दूरी के बीच आरती राव के बयान से BJP की अंदरूनी तल्खी फिर चर्चा में


हरियाणा BJP में अंदरूनी तल्खी एक बार फिर सामने आई है। रविवार को रेवाड़ी में नशे के खिलाफ आयोजित मैराथन में मुख्यमंत्री नायब सैनी पहुंचे और उन्होंने खुद भी दौड़ लगाई, लेकिन केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह कार्यक्रम से दूर रहे। खास बात यह रही कि कार्यक्रम के पोस्टरों और बैनरों पर राव इंद्रजीत का नाम प्रमुखता से लिखा गया था।

मैराथन को लेकर जिला प्रशासन की ओर से जारी किए गए पोस्टर में भी राव इंद्रजीत सिंह का नाम मुख्यमंत्री नायब सैनी के ठीक नीचे लिखा गया था। इसके बावजूद उनकी कार्यक्रम में मौजूदगी नहीं रही। इसको लेकर जब पत्रकारों ने मुख्यमंत्री नायब सैनी से सवाल किया कि जब आप रेवाड़ी आते हैं तो राव साहब दूर रहते हैं, तो मुख्यमंत्री बिना जवाब दिए ही आगे बढ़ गए।

राव इंद्रजीत का मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से दूर रहना पहली बार नहीं है। इससे पहले भी रेवाड़ी में मुख्यमंत्री के दो कार्यक्रमों में उनकी गैरहाजिरी रही थी। ऐसे में रविवार का कार्यक्रम लगातार तीसरा मौका रहा, जब राव इंद्रजीत सिंह मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में नजर नहीं आए।

रेवाड़ी जिला प्रशासन द्वारा पोस्टर में भी राव इंद्रजीत का नाम है।

पोस्टर में नाम, लेकिन कार्यक्रम से दूरी ने बढ़ाई चर्चा

रेवाड़ी में आयोजित मैराथन में BJP के तीनों विधायक लक्ष्मण यादव, कृष्ण कुमार और अनिल यादव मौजूद रहे। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने भी मैराथन में दौड़ लगाई और कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

वहीं, दूसरी ओर राव इंद्रजीत सिंह की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बनी रही। मैराथन के पोस्टरों और बैनरों पर कई जगह उनका नाम दर्ज था। प्रशासन की ओर से जारी पोस्टर में भी मुख्यमंत्री नायब सैनी के ठीक नीचे राव इंद्रजीत का नाम लिखा गया था।

इससे पहले 23 अगस्त को बावल में और 30 अगस्त को भी मुख्यमंत्री का कार्यक्रम हुआ था। इन दोनों कार्यक्रमों से भी राव इंद्रजीत सिंह और उनके समर्थकों ने दूरी बनाई थी। हालांकि 23 अगस्त के कार्यक्रम में क्षेत्र के तीनों विधायक मौजूद रहे थे।

सीएम ने राव तुलाराम का नाम लेकर अहीरवाल को साधने की कोशिश की

रेवाड़ी के मैराथन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सैनी ने अपने संबोधन के दौरान राव तुलाराम का नाम लिया। इसे अहीरवाल क्षेत्र को साधने की कोशिश के तौर पर देखा गया।

राव इंद्रजीत सिंह लंबे समय से अहीरवाल क्षेत्र की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में उनका लगातार नजर नहीं आना और दूसरी ओर मुख्यमंत्री का अपने संबोधन में राव तुलाराम का नाम लेना राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बन गया है।

नारनौल में आरती राव के बयान ने भी बढ़ाई सियासी हलचल

राव इंद्रजीत सिंह की गैरमौजूदगी के बीच गुरुवार को नारनौल में यादव सभा के एक कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के बयान ने भी सियासी हलचल बढ़ा दी थी।

आरती राव ने कहा था, “मेरे परिवार ने हमेशा इस क्षेत्र की आवाज उठाई है। ये नहीं देखा कि मेरा क्या होगा। आज कुछ लोगों के पेट में राव तुलाराम जी का नाम लेने से भी दर्द होता है।”

आरती राव का यह बयान ऐसे समय आया, जब रेवाड़ी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से राव इंद्रजीत सिंह की लगातार गैरमौजूदगी चर्चा में थी। इससे BJP के भीतर अहीरवाल को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान पर एक बार फिर सवाल उठने लगे।

गुरुग्राम में राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने दिखा चुके हैं बागी तेवर

राव इंद्रजीत सिंह इससे पहले गुरुग्राम में 14 अगस्त को आयोजित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस कार्यक्रम में भी अपने तेवर जाहिर कर चुके हैं। कार्यक्रम के मंच पर BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की मौजूदगी में उन्होंने कहा था, “सिर्फ पंजाबी होने के नाम पर चुनाव लड़कर देख लें, पता चल जाएगा कितने वोट मिलते हैं।”

उनके इस बयान को पार्टी के भीतर उनके बागी तेवरों के तौर पर देखा गया था। अब रेवाड़ी में मुख्यमंत्री के लगातार कार्यक्रमों से उनकी दूरी ने इस चर्चा को और हवा दे दी है।

कांग्रेस छोड़ते समय भी राव ने उठाया था अहीरवाल की अनदेखी का मुद्दा

राव इंद्रजीत सिंह की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को उनके पुराने सियासी सफर से जोड़कर भी देखा जा रहा है। साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा पर अहीरवाल की अनदेखी और रोहतक-केंद्रित विकास के आरोप लगाए थे।

राव इंद्रजीत सिंह ने कांग्रेस को अलविदा कहते हुए इसे आत्मसम्मान का सवाल बताया था और इसके बाद भाजपा का दामन थामा था। भाजपा में आने के बाद वह लगातार रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीतते रहे, लेकिन उन्हें कभी पूर्ण कैबिनेट मंत्री का दर्जा नहीं मिला।

हरियाणा में जब भी मुख्यमंत्री चुनने की स्थिति आई, राव इंद्रजीत की दावेदारी को दरकिनार कर पहले मनोहर लाल खट्टर और फिर नायब सिंह सैनी को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी गई।

कांग्रेस को मिला भाजपा के खिलाफ नया राजनीतिक मुद्दा

राव इंद्रजीत सिंह की लगातार गैरमौजूदगी अब कांग्रेस के लिए भी राजनीतिक मुद्दा बनती नजर आ रही है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा और विपक्ष अब जनता के बीच यह संदेश देने की कोशिश कर सकते हैं कि जिस मान-सम्मान और अहीरवाल की आवाज को लेकर राव इंद्रजीत सिंह ने कांग्रेस छोड़ी थी, भाजपा में 12 साल रहने के बाद भी उन्हें कथित तौर पर वही उपेक्षा और अपमान झेलना पड़ रहा है।

रेवाड़ी में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम से लगातार तीसरी बार राव इंद्रजीत सिंह की दूरी, पोस्टर-बैनर में उनका नाम होने और मुख्यमंत्री से इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर उनके जवाब नहीं देने से हरियाणा BJP की अंदरूनी राजनीति एक बार फिर चर्चा में आ गई है।