फर्जी नंबर प्लेट लगी कार पकड़ी, लोन और चालान से बचने के लिए बदला नंबर

नारनौल में लोन की किश्त और चालान से बचने के लिए फर्जी नंबर प्लेट लगी स्विफ्ट डिजायर पकड़ी गई। पुलिस ने सुनील और हरेंद्र पर केस दर्ज किया।

फर्जी नंबर प्लेट लगी कार पकड़ी, लोन और चालान से बचने के लिए बदला नंबर

लोन की किश्त और चालान से बचने के लिए कार पर लगाई फर्जी नंबर प्लेट
असली नंबर HR66C-1634, कार पर लगी थी HR47G-1307 की प्लेट
सुनील और हरेंद्र के खिलाफ केस दर्ज, एएसआई प्रीतम सिंह कर रहे जांच

नारनौल। महेंद्रगढ़ जिले के नारनौल में लोन की किश्तों और चालान से बचने के लिए कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगाने का मामला सामने आया है। सदर नारनौल थाना पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान फर्जी नंबर प्लेट लगी स्विफ्ट डिजायर कार पकड़ी। जांच में कार की असली रजिस्ट्रेशन संख्या HR66C-1634 मिली, जबकि कार पर HR47G-1307 नंबर की प्लेट लगी हुई थी।

पुलिस ने मामले में कार चालक समेत दो लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस की जांच में सामने आया कि कार चालक ने फाइनेंस कंपनी से जुड़े दबाव और फिटनेस नहीं होने के कारण चालान से बचने के लिए कार की नंबर प्लेट बदलवाई थी।

गहली चौक पर नाकाबंदी के दौरान पुलिस को मिली सूचना

पुलिस के अनुसार 10 सितंबर की रात सदर नारनौल थाना पुलिस टीम गहली चौक पर नाकाबंदी कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि नारनौल से गोद बलाहा की तरफ एक सफेद रंग की स्विफ्ट डिजायर कार जा रही है। सूचना में बताया गया कि कार पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई है और उसका ड्राइवर सुनील निवासी सरेली, थाना निजामपुर है।

सूचना के आधार पर पुलिस ने नाकाबंदी और जांच तेज कर दी। कुछ देर बाद पुलिस को सफेद रंग की कार आती दिखाई दी। पुलिस टीम ने कार को रुकवाकर उसकी नंबर प्लेट की जांच की।

कार पर लगी थी रेवाड़ी के वाहन की नंबर प्लेट

कार की जांच के दौरान उस पर HR47G-1307 नंबर की प्लेट लगी मिली। पुलिस ने चालक से कार के दस्तावेज मांगे, लेकिन वह कोई दस्तावेज पेश नहीं कर सका।

इसके बाद पुलिस ने मशीन के माध्यम से कार के नंबर की जांच की। जांच में HR47G-1307 नंबर का मालिक रणवीर सिंह निवासी नांगल जमालपुर, जिला रेवाड़ी मिला। इससे पुलिस को नंबर प्लेट को लेकर संदेह और गहरा गया।

पुलिस ने इसके बाद कार के इंजन और चेसिस नंबर की जांच की। इस जांच में कार की वास्तविक रजिस्ट्रेशन संख्या HR66C-1634 सामने आई। यह कार सुनील निवासी सरेली के नाम से पंजीकृत थी।

इस तरह मौके पर ही कार पर लगी नंबर प्लेट और उसके वास्तविक रजिस्ट्रेशन नंबर में अंतर सामने आ गया। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आगे की पूछताछ शुरू की।

लोन की किश्तें नहीं भर पा रहा था सुनील, फाइनेंस कंपनी का था डर

पूछताछ में सुनील ने पुलिस को बताया कि उसकी कार का लोन अधिक हो गया था और वह उसकी किश्तें नहीं भर पा रहा था। उसे डर था कि फाइनेंस कंपनी कार को उठा लेगी।

सुनील ने पुलिस को यह भी बताया कि कार की फिटनेस नहीं होने के कारण चालान होने से बचने के लिए उसने कार की नंबर प्लेट बदल ली थी। यानी फर्जी नंबर प्लेट लगाने के पीछे उसके सामने लोन की किश्तों और चालान, दोनों से बचने की वजह बताई गई।

दोस्त हरेंद्र ने बनवाकर दी थी फर्जी नंबर प्लेट

पूछताछ में सुनील ने पुलिस को बताया कि उसके दोस्त हरेंद्र निवासी दनचौली, थाना निजामपुर ने उसे यह नंबर प्लेट बनवाकर दी थी।

सुनील के अनुसार हरेंद्र ने कथित तौर पर उससे कहा था कि इस नंबर प्लेट से कार चलाने पर वह उसके लोन का सेटलमेंट करवा देगा। इसके बाद सुनील कार पर यह नंबर प्लेट लगाकर चलाने लगा।

पुलिस अब मामले में दोनों की भूमिका की जांच कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी नंबर प्लेट तैयार करवाने और इस्तेमाल करने की पूरी प्रक्रिया में दोनों की क्या भूमिका रही।

बीएनएस की तीन धाराओं में मामला दर्ज, एएसआई प्रीतम सिंह को जांच

पुलिस ने शिकायत के आधार पर सुनील और हरेंद्र के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 341(1) और 61(2) के तहत मामला दर्ज किया है।

मामले में मुकदमा नंबर 197 दर्ज किया गया है। यह मुकदमा 10 सितंबर 2026 को सदर नारनौल थाने में दर्ज हुआ। मामले की जांच एएसआई प्रीतम सिंह को सौंपी गई है।

पुलिस की ओर से कार की नंबर प्लेट, उसके वास्तविक रजिस्ट्रेशन नंबर और दोनों आरोपियों से जुड़ी जानकारी के आधार पर मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है।