पेपर लीक रोकने का सख्त कानून लोकसभा में पास
लोकसभा ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त संशोधन विधेयक 2026 पारित किया। अब दोषियों को 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपए तक जुर्माना हो सकता है। राज्यसभा ने वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाला संशोधन बिल भी पारित किया।
➤ पेपर लीक मामलों में अब 10 साल तक की जेल और 10 करोड़ रुपए तक जुर्माने का प्रावधान
➤ लोकसभा ने ध्वनि मत से लोक परीक्षा संशोधन विधेयक 2026 किया पारित
➤ राज्यसभा से वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने वाला संशोधन बिल भी पास
नई दिल्ली। लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद पेपर लीक और परीक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी पर पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। नए प्रावधानों के तहत ऐसे अपराधों में अधिकतम 10 साल तक की कैद और 10 करोड़ रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखना और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
संसद में इस विधेयक पर मंगलवार को करीब 9 घंटे तक चर्चा हुई। बुधवार को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी लगभग 50 मिनट तक अपनी बात रखी। चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला, जिसके बाद ध्वनि मत से विधेयक पारित कर दिया गया।
पेपर लीक के खिलाफ सख्त होगा कानून
सरकार का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा घोटालों को देखते हुए कानून को और प्रभावी बनाया गया है। संशोधित कानून में संगठित तरीके से परीक्षा में गड़बड़ी करने वाले गिरोहों, संस्थाओं और अन्य दोषियों के खिलाफ कठोर दंड का प्रावधान किया गया है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
राहुल गांधी और सत्ता पक्ष में तीखी बहस
विधेयक पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने छात्रों से जुड़े मुद्दों और पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। इस पर केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और जितेंद्र सिंह ने कड़ी आपत्ति जताई। सरकार ने राहुल गांधी के आरोपों को निराधार बताते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की। आरोप-प्रत्यारोप के बीच सदन में कई बार हंगामे की स्थिति बनी और कार्यवाही भी कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी।
वंदे मातरम् को मिलेगा कानूनी संरक्षण
उधर राज्यसभा ने राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पारित कर दिया। इस संशोधन के बाद वंदे मातरम् को भी जन-गण-मन की तरह कानूनी संरक्षण मिलेगा। नए प्रावधानों के अनुसार वंदे मातरम् का अपमान, उसका अनादर करना या उसके गायन में बाधा डालना दंडनीय अपराध माना जाएगा।
तीन साल तक की सजा का प्रावधान
संशोधन के तहत यदि कोई व्यक्ति वंदे मातरम् का अपमान करता है तो उसे तीन साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े प्रतीकों की गरिमा बनाए रखने के उद्देश्य से यह संशोधन लाया गया है।
संसद की कार्यवाही गुरुवार तक स्थगित
दोनों सदनों में दिनभर चली बहस और विधेयकों के पारित होने के बाद लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
Akhil Mahajan