गणेश चतुर्थी पर बन रहा खास संयोग! 14 सितंबर को विराजेंगे गणपति बप्पा, जानिए मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विसर्जन की तारीख

गणेश चतुर्थी 2026 पर 14 सितंबर को गणपति स्थापना होगी। जानिए मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, शुभ योग और विसर्जन की तारीख।

गणेश चतुर्थी पर बन रहा खास संयोग! 14 सितंबर को विराजेंगे गणपति बप्पा, जानिए मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और विसर्जन की तारीख

14 सितंबर को मनाई जाएगी गणेश चतुर्थी, इसी दिन होगी गणपति स्थापना
सुबह 11:21 से दोपहर 1:48 बजे तक मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस बार रवि, इंद्र, ब्रह्म के साथ भद्र और मालव्य राजयोग का भी संयोग


गणेश चतुर्थी 2026 का पर्व 14 सितंबर, सोमवार को मनाया जाएगा। हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7 बजकर 7 मिनट से शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 43 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर गणेश चतुर्थी और गणपति स्थापना 14 सितंबर को ही की जाएगी।

इस दिन से 10 दिवसीय गणेश उत्सव की शुरुआत होगी, जिसका समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन गणपति विसर्जन के साथ होगा। इस बार गणेश चतुर्थी को धार्मिक दृष्टि से खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन रवि योग, इंद्र योग और ब्रह्म योग बनने की बात कही गई है। वहीं संबंधित रिपोर्ट में करीब 200 साल बाद भद्र और मालव्य राजयोग के संयोग का भी उल्लेख किया गया है।

गणपति स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त कब है

गणेश चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने और पूजा करने के लिए मध्याह्न काल को विशेष शुभ माना गया है।

इस वर्ष गणपति स्थापना का शुभ मुहूर्त 14 सितंबर को सुबह 11:21 बजे से दोपहर 1:48 बजे तक रहेगा। भक्त इसी अवधि में विधि-विधान से गणेश जी की प्रतिमा घर में स्थापित कर सकते हैं।

हालांकि अलग-अलग पंचांगों में मुहूर्त के समय में कुछ मिनट का अंतर मिल सकता है। इसलिए स्थानीय परंपरा और अपने क्षेत्र के पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

गणेश चतुर्थी पर कैसे करें गणपति की पूजा

गणपति स्थापना से पहले घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें। इसके बाद पूजा स्थल को गंगाजल या शुद्ध जल से पवित्र करके लाल या पीले रंग का कपड़ा चौकी पर बिछाएं।

चौकी पर भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करें और उनके सामने कलश रखें। इसके बाद गणपति को शुद्ध जल या गंगाजल से स्नान कराकर वस्त्र, जनेऊ, चंदन और सिंदूर अर्पित करें।

पूजा में भगवान गणेश को दूर्वा घास, लाल फूल और मोदक या लड्डू अर्पित करें। इसके बाद धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएं।

गणपति का ध्यान करते हुए ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें। इसके बाद गणेश चालीसा या गणेश स्तुति का पाठ करके भगवान गणेश की आरती करें। अंत में परिवार की सुख-शांति, आरोग्य, बुद्धि और समृद्धि की कामना करते हुए प्रसाद वितरित करें।

गणेश चतुर्थी पर बन रहे हैं ये शुभ योग

इस बार गणेश चतुर्थी के दिन कई शुभ योगों का संयोग बताया गया है। पंचांग संबंधी जानकारी के अनुसार रवि योग, इंद्र योग और ब्रह्म योग बन रहे हैं। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को शुभ माना जाता है।

वहीं जनसत्ता की ताजा रिपोर्ट में इस गणेश चतुर्थी पर भद्र और मालव्य राजयोग बनने का भी उल्लेख है और इसे करीब 200 साल बाद बनने वाला विशेष संयोग बताया गया है।

गणेश उत्सव कितने दिन चलेगा

14 सितंबर से गणेश उत्सव की शुरुआत होगी और 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के साथ इसका समापन होगा। हालांकि सभी भक्त 10 दिन तक ही गणपति को घर में रखें, ऐसा जरूरी नहीं है। परंपरा के अनुसार कई लोग डेढ़ दिन, तीन दिन, पांच दिन या सात दिन बाद भी गणपति विसर्जन करते हैं।

गणेश विसर्जन की प्रमुख तारीखें

  • डेढ़ दिन का विसर्जन: 15 सितंबर 2026
  • तीसरे दिन का विसर्जन: 16 सितंबर 2026
  • पांचवें दिन का विसर्जन: 18 सितंबर 2026
  • सातवें दिन का विसर्जन: 20 सितंबर 2026
  • गौरी विसर्जन: 19 सितंबर 2026
  • मुख्य विसर्जन, अनंत चतुर्दशी: 25 सितंबर 2026

25 सितंबर को होने वाले अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश उत्सव का मुख्य समापन और गणपति विसर्जन किया जाएगा।

गणेश चतुर्थी पर क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा

धार्मिक मान्यताओं में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य, विघ्नहर्ता, मंगलकर्ता और बुद्धि-विवेक के देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश जी की पूजा से करने की परंपरा है।

मान्यता है कि गणपति की पूजा करने से कार्यों में आने वाले विघ्न दूर होते हैं और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। इसी वजह से गणेश चतुर्थी का पर्व केवल धार्मिक उत्सव ही नहीं, बल्कि सुख, समृद्धि, बुद्धि और सौभाग्य की कामना से भी जुड़ा माना जाता है।

मिट्टी की गणेश प्रतिमा की पूजा का भी है महत्व

धार्मिक ग्रंथों से जुड़ी मान्यताओं में भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मुद्गल पुराण से संबंधित उद्धरण में मिट्टी के स्वरूप में गणेश जी की पूजा को विघ्न दूर होने और कार्यों की सफलता से जोड़ा गया है।

हालांकि धार्मिक मान्यताओं और पंचांग से जुड़ी जानकारी अलग-अलग परंपराओं में कुछ भिन्न हो सकती है। इसलिए पूजा की विधि और मुहूर्त के लिए स्थानीय पंचांग या विद्वान की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।