करनाल में 1000 टन सरकारी धान गायब, राइस मिल मालिक गिरफ्तार

करनाल में 1000 टन सरकारी धान गायब मिलने के मामले में राइस मिल मालिक गिरफ्तार हुआ है। 2.61 करोड़ रुपये के गबन की जांच एसआईटी कर रही है और कई अन्य लोग भी जांच के दायरे में हैं।

करनाल में 1000 टन सरकारी धान गायब, राइस मिल मालिक गिरफ्तार

करनाल में 1000 टन सरकारी धान गायब, राइस मिल मालिक गिरफ्तार

रिकॉर्ड में स्टॉक पूरा, फिजिकल वेरिफिकेशन में 2.61 करोड़ का धान मिला गायब

महिला पार्टनर पर भी केस, खाद्य आपूर्ति विभाग का इंस्पेक्टर जांच के घेरे में

हरियाणा के करनाल में सरकारी धान के बड़े गबन का मामला सामने आया है। जिले की एक राइस मिल से करीब 1000 टन सरकारी धान गायब मिला है, जिसकी बाजार कीमत लगभग 2.61 करोड़ रुपये आंकी गई है। मामले का खुलासा प्रशासन द्वारा कराए गए फिजिकल स्टॉक वेरिफिकेशन के दौरान हुआ। इसके बाद पुलिस ने मिल मालिक को गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार सरकार के निर्देश पर जिले की सभी राइस मिलों में सरकारी धान और चावल के स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया गया था। जांच के दौरान यूनाइटेड फूड राइस मिल के दस्तावेजों में जितना धान दर्ज था, मौके पर उससे करीब 1000 टन कम मिला। इस अनियमितता के सामने आते ही प्रशासन और खाद्य आपूर्ति विभाग में हड़कंप मच गया।

पुलिस ने शेखपुरा खालसा स्थित राइस मिल के मालिक नसीब सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं सरकारी धान के कथित गबन के मामले में उसकी महिला साझेदार संतोष रानी के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है।

जांच में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक इंस्पेक्टर रणधीर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। एसआईटी यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी धान आखिर कहां खपाया गया और इस पूरे खेल में किन अधिकारियों व कारोबारियों की मिलीभगत रही।

एसआईटी के अनुसार रिकॉर्ड में मिल में सरकारी धान का पूरा स्टॉक दर्ज था, लेकिन फिजिकल वेरिफिकेशन में करीब 1000 टन धान गायब मिला। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 2.61 करोड़ रुपये आंकी गई। पूछताछ के दौरान मिल मालिक इस संबंध में संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।

अनियमितता सामने आने के बाद तत्कालीन जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक (डीएफएससी) अनिल की शिकायत पर इंद्री थाना पुलिस ने नसीब सिंह और संतोष रानी के खिलाफ सरकारी धान के गबन सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया। बाद में जांच एसआईटी को सौंप दी गई।

एसआईटी की जांच में यह भी सामने आया कि मंडियों में फर्जी धान खरीद दिखाकर रिकॉर्ड में सरकारी धान की आवक दर्ज की गई, जबकि वास्तविक स्टॉक मौजूद ही नहीं था। इसी कथित फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी धान का गबन कर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।

जांच एजेंसियों का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर सरकारी धान का गबन किसी एक व्यक्ति के बूते संभव नहीं था। इसी वजह से अब जांच पूरे नेटवर्क पर केंद्रित कर दी गई है। एसआईटी रिकॉर्ड में हेराफेरी, फर्जी खरीद और सरकारी अनाज के गबन में शामिल अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों और कारोबारियों की भूमिका भी खंगाल रही है।

पुलिस का कहना है कि रिमांड के दौरान कई अहम खुलासे हो सकते हैं और मामले में आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं। वहीं यूनाइटेड फूड राइस मिल में गड़बड़ी सामने आने के बाद जिले की अन्य राइस मिलों के स्टॉक की भी गहन जांच शुरू कर दी गई है।