DCRUST मुरथल में AC खराबी पर SDE के निलंबन से भड़का विवाद, शिक्षक-कर्मचारी आमने-सामने, प्रदर्शन
सोनीपत के DCRUST मुरथल में ऑडिटोरियम AC खराबी पर SDE युद्धवीर दलाल के निलंबन से विवाद बढ़ा। शिक्षक-कर्मचारी संघों ने प्रदर्शन कर निलंबन वापस लेने की मांग की।
➤ ऑडिटोरियम का AC खराब होने पर SDE युद्धवीर दलाल निलंबित
➤ शिक्षक-कर्मचारी संघों ने कार्रवाई को एकतरफा और भेदभावपूर्ण बताया
➤ प्रशासनिक ब्लॉक पर 4 घंटे प्रदर्शन, प्रशासन ने EC नियमों का हवाला दिया
मुरथल (सोनीपत)। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल में ऑडिटोरियम का सेंट्रलाइज्ड एयर कंडीशनिंग सिस्टम खराब होने के बाद शुरू हुआ विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। 13 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय ऑडिटोरियम का सेंट्रलाइज्ड AC सिस्टम बंद होने के मामले में SDE (इलेक्ट्रिकल) युद्धवीर दलाल को निलंबित किए जाने के विरोध में शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी लामबंद हो गए। मंगलवार को शिक्षक संघ DCRUTA और कर्मचारी संघ DCRUEU के संयुक्त आह्वान पर प्रशासनिक ब्लॉक के सामने प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के दौरान शिक्षण और प्रशासनिक कार्य प्रभावित रहे।
मामले को लेकर शिक्षक और कर्मचारी संघों ने विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। DCRUTA के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार और DCRUEU के अध्यक्ष सुरेश कुमार ने कुलपति को पत्र भेजकर SDE के निलंबन पर कड़ा एतराज जताया। संघों का कहना है कि किसी तकनीकी खराबी के लिए सीधे तौर पर एक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराकर निलंबित करना न्यायसंगत नहीं है। उनका आरोप है कि बिना निष्पक्ष और तटस्थ जांच के आनन-फानन में लिया गया यह फैसला एकतरफा, तानाशाही और भेदभावपूर्ण है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, 13 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम का सेंट्रलाइज्ड AC सिस्टम अचानक बंद हो गया था। AC सिस्टम में आई इस तकनीकी खराबी के बाद प्रशासन की ओर से त्वरित कार्रवाई करते हुए SDE (इलेक्ट्रिकल) युद्धवीर दलाल को निलंबित कर दिया गया।
निलंबन की कार्रवाई के बाद शिक्षक और कर्मचारी संगठनों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। संगठनों का कहना है कि तकनीकी सिस्टम में आई खराबी के लिए किसी एक अधिकारी को जिम्मेदार ठहराने से पहले पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी। उनका कहना है कि निलंबन से पहले संबंधित परिस्थितियों और तकनीकी पहलुओं की पूरी जांच की जानी चाहिए थी।
DCRUTA के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार और DCRUEU के अध्यक्ष सुरेश कुमार की ओर से कुलपति को भेजे गए पत्र में भी इसी कार्रवाई पर आपत्ति जताई गई। संघों ने निलंबन आदेश तत्काल वापस लेने की मांग की।
मांग पूरी नहीं हुई तो ठप किया कामकाज
शिक्षक और कर्मचारी संघों ने प्रशासन के सामने निलंबन आदेश वापस लेने की मांग रखी थी। मांग पूरी नहीं होने के बाद मंगलवार सुबह 9:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक प्रशासनिक ब्लॉक के बाहर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया।
प्रदर्शन के दौरान शिक्षक और गैर-शिक्षण कर्मचारी बड़ी संख्या में मौजूद रहे। संघों की ओर से कहा गया कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई जाती और निलंबन रद्द नहीं किया जाता, तब तक कर्मचारियों के आत्मसम्मान और अधिकारों की लड़ाई जारी रहेगी।
प्रदर्शन के चलते विश्वविद्यालय का शिक्षण और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित रहा। कर्मचारियों और शिक्षकों ने निलंबन के फैसले को वापस लेने की मांग को प्रमुखता से उठाया।
प्रशासन ने नियमों का दिया हवाला
दूसरी ओर, प्रदर्शन की सूचना मिलने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से रजिस्ट्रार ने संघों को पत्र जारी किया। प्रशासन ने परिसर में धरना और प्रदर्शन को लेकर कार्यकारी परिषद (EC) के पुराने आदेशों का हवाला दिया।
रजिस्ट्रार के पत्र में 12 अगस्त 2024 के कार्यकारी परिषद के संकल्प और कार्यालय आदेश संख्या 205 का उल्लेख किया गया। प्रशासन के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में किसी भी प्रदर्शन या धरने के लिए सी.वी. रमन ब्लॉक के समीप बनी 'अंब्रेला कैंटीन' का स्थान निर्धारित किया गया है।
प्रशासन ने यह भी कहा कि इस तरह के किसी भी आयोजन के लिए 15 दिन का पूर्व नोटिस देना और विश्वविद्यालय तथा पुलिस प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य है।
इस तरह ऑडिटोरियम के AC की तकनीकी खराबी से शुरू हुआ विवाद अब निलंबन के फैसले और विश्वविद्यालय में प्रदर्शन के नियमों तक पहुंच गया है। एक ओर शिक्षक और कर्मचारी संघ निलंबन को वापस लेने और निष्पक्ष जांच की मांग पर कायम हैं, वहीं दूसरी ओर विश्वविद्यालय प्रशासन ने परिसर में प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों और स्थान का हवाला दिया है।
Akhil Mahajan