भावना कंठ ने रचा नया इतिहास, बनीं देश की पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर
भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ देश की पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर बनीं। जानिए उनका सफर, TACDE ट्रेनिंग, जिम्मेदारियां और अनुमानित सैलरी।
➤ भावना कंठ बनीं देश की पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर
➤ 20 हफ्तों की कठिन TACDE ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी
➤ करीब 1.55 से 1.90 लाख रुपये तक हो सकती है इन-हैंड सैलरी
भारतीय वायुसेना की जांबाज अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक बार फिर देश का नाम रोशन करते हुए बड़ी उपलब्धि हासिल की है। बिहार की बेटी भावना कंठ ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित प्रतिष्ठित TACDE (Tactics and Air Combat Development Establishment) से फाइटर कॉम्बैट लीडर का बेहद कठिन और प्रतिष्ठित कोर्स सफलतापूर्वक पूरा किया है। इस उपलब्धि के साथ वह देश की पहली महिला फाइटर कॉम्बैट लीडर बनी हैं।
भावना कंठ की इस कामयाबी को भारतीय वायुसेना में महिलाओं की बढ़ती भूमिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कठिन सैन्य प्रशिक्षण और बेहद चुनौतीपूर्ण मानकों को पूरा करने के बाद उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। अब उनके सामने लड़ाकू अभियानों में महत्वपूर्ण नेतृत्व की जिम्मेदारी होगी।
दरभंगा से शुरू हुआ सफर, इंजीनियरिंग के बाद वायुसेना में चयन
भावना कंठ मूल रूप से बिहार के दरभंगा जिले से जुड़ी हैं। उनका जन्म बरौनी में हुआ और शुरुआती शिक्षा बरौनी रिफाइनरी के डीएवी पब्लिक स्कूल से हुई। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वह इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए राजस्थान के कोटा गईं।
इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मेडिकल इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने टीसीएस में नौकरी शुरू की। हालांकि, उनका लक्ष्य इससे आगे का था और बाद में उनका चयन भारतीय वायुसेना में हो गया।
वायुसेना में शामिल होने के बाद उन्होंने फाइटर पायलट के रूप में अपनी पहचान बनाई और अब फाइटर कॉम्बैट लीडर का कठिन प्रशिक्षण पूरा कर एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम की है।
क्या होता है फाइटर कॉम्बैट लीडर?
फाइटर कॉम्बैट लीडर का प्रशिक्षण भारतीय वायुसेना के सबसे कठिन और प्रतिष्ठित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में माना जाता है। इसकी तुलना दुनिया के कठिन सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों से की जाती है। इस कोर्स के लिए भारतीय वायुसेना के अनुभवी फाइटर पायलटों में से बेहद चुनिंदा अधिकारियों का चयन किया जाता है।
बताया गया है कि इस कठिन प्रशिक्षण के लिए वायुसेना के करीब टॉप 1 प्रतिशत अनुभवी फाइटर पायलट्स को ही शॉर्टलिस्ट किया जाता है। इसके बाद भी प्रशिक्षण के दौरान कई पायलट इसे पूरा नहीं कर पाते।
भावना कंठ ने करीब 20 हफ्तों की इस कठिन ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा किया है। इसके बाद उनकी भूमिका सिर्फ एक फाइटर पायलट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वह युद्ध जैसी परिस्थितियों में फाइटर विमानों के पूरे समूह का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी निभाने में सक्षम होंगी।
मिशन की प्लानिंग से लेकर हथियारों के इस्तेमाल तक अहम जिम्मेदारी
फाइटर कॉम्बैट लीडर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। युद्ध के दौरान लड़ाकू विमानों के समूह का नेतृत्व करना, मिशन की रणनीति और योजना तैयार करना तथा परिस्थितियों के अनुसार हथियारों और लड़ाकू संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़े अहम फैसले लेना इस भूमिका का हिस्सा होता है।
यानी भावना कंठ अब सिर्फ विमान उड़ाने वाली पायलट नहीं, बल्कि हवाई युद्ध अभियानों में लीडर और रणनीतिक भूमिका निभाने वाली अधिकारी बन गई हैं।
कितनी होगी भावना कंठ की सैलरी?
भावना कंठ को 7वें वेतन आयोग के नियमों के अनुसार फाइटर कॉम्बैट लीडर के पद पर मिलने वाली आय में मूल वेतन के साथ मिलिट्री सर्विस पे, फ्लाइंग अलाउंस और महंगाई भत्ता जैसे विभिन्न घटक शामिल होंगे।
दी गई जानकारी के अनुसार उनकी अनुमानित इन-हैंड सैलरी करीब 1.55 लाख रुपये से 1.90 लाख रुपये प्रतिमाह के बीच हो सकती है। इसके अलावा भारतीय वायुसेना के अधिकारियों को सरकारी आवास, चिकित्सा सुविधा समेत कई अन्य सरकारी सुविधाएं भी मिलती हैं।
भावना कंठ की कहानी सिर्फ एक सैन्य उपलब्धि की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस सफर की मिसाल भी है जिसमें इंजीनियरिंग की पढ़ाई से कॉरपोरेट नौकरी और फिर भारतीय वायुसेना तक पहुंची एक महिला अधिकारी ने लगातार नए मुकाम हासिल किए।
Akhil Mahajan