मुरथल के ढाबों पर करोड़ों का प्रदूषण जुर्माना बना मुसीबत, राहत के लिए मंत्री ने CPCB को लिखा पत्र

मुरथल के ढाबों पर दूषित पानी के निस्तारण को लेकर करोड़ों रुपये का जुर्माना बकाया है। मंत्री राव नरबीर सिंह ने CPCB से राहत मांगी है।

मुरथल के ढाबों पर करोड़ों का प्रदूषण जुर्माना बना मुसीबत, राहत के लिए मंत्री ने CPCB को लिखा पत्र

➤ मुरथल के ढाबों पर वर्ष 2021 से प्रदूषण जुर्माना जारी, अब तक करोड़ों रुपये बकाया

➤ हाईवे ढाबा एसोसिएशन ने पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह से लगाई जुर्माना माफी की गुहार

➤ मंत्री ने CPCB को पत्र लिखकर राहत देने का आग्रह किया, जवाब के बाद ही स्थिति होगी स्पष्ट


सोनीपत के मुरथल के मशहूर ढाबों पर लगा करोड़ों रुपये का प्रदूषण जुर्माना अब संचालकों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने वर्ष 2021 में ढाबों से निकलने वाले दूषित पानी के उचित निस्तारण की व्यवस्था नहीं होने पर प्रतिदिन पांच हजार रुपये के हिसाब से जुर्माना लगाया था। यह जुर्माना वर्ष 2024 में ढाबों के लिए एसटीपी बनने तक चलता रहा, जिसके चलते कई ढाबों पर लाखों रुपये और हाईवे स्थित ढाबों पर कुल मिलाकर करोड़ों रुपये का जुर्माना बकाया हो गया। अब हाईवे ढाबा एसोसिएशन के सदस्यों ने हरियाणा के पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह से मुलाकात कर जुर्माना माफ कराने की मांग की है। ढाबा संचालकों की गुहार पर मंत्री ने CPCB को पत्र लिखकर जुर्माने में राहत देने का आग्रह किया है।

मुरथल के ढाबे अपने स्वाद और खान-पान के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं। ऐसे में ढाबा संचालकों पर लंबे समय से चले आ रहे इस जुर्माने का मामला अब एक बार फिर चर्चा में है। कुछ ढाबा संचालकों ने जुर्माने की राशि जमा भी कराई है, लेकिन अभी भी काफी ढाबों पर जुर्माना बकाया बताया गया है।

2021 में CPCB ने जारी किया था नोटिस

वर्ष 2021 में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मुरथल के ढाबों पर प्रदूषण फैलाने की बात कहते हुए नोटिस जारी किया था। उस समय एकाध बड़े ढाबे के पास ही निजी एसटीपी की व्यवस्था थी, जबकि अन्य ढाबों से निकलने वाला दूषित पानी खुले में छोड़े जाने की बात सामने आई थी।

CPCB ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए ढाबों पर प्रतिदिन पांच हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया था। इसके बाद यह राशि लगातार बढ़ती गई। वर्ष 2024 तक यह जुर्माना ढाबा संचालकों के लिए लाखों रुपये में पहुंच गया और हाईवे पर स्थित ढाबों पर कुल बकाया जुर्माना करोड़ों रुपये तक हो गया।

वर्ष 2024 में बना एसटीपी, सीवर लाइन से जोड़े गए ढाबे

वर्ष 2024 में डीक्रस्ट के पीछे नगर निगम ने एसटीपी बनाया। इसके बाद सीवर लाइन के जरिये मुरथल के ढाबों से निकलने वाला दूषित पानी एसटीपी तक पहुंचाया जाने लगा। इसके साथ ही ढाबों से निकलने वाले पानी के निस्तारण की व्यवस्था पहले की तुलना में बदल गई।

हालांकि, वर्ष 2021 से 2024 के बीच लगाए गए जुर्माने का बोझ ढाबा संचालकों पर बना रहा। इस अवधि के दौरान प्रत्येक ढाबे पर लाखों रुपये का जुर्माना हो चुका था और हाईवे के ढाबों पर कुल बकाया राशि करोड़ों रुपये तक पहुंच गई।

कई संचालकों ने पांच-पांच लाख रुपये जमा कराए

मुरथल के कई ढाबा संचालकों ने लगाए गए जुर्माने में से पांच-पांच लाख रुपये तक जमा करवाए हैं। इसके बावजूद काफी ढाबों पर अभी भी जुर्माना बकाया है। यही वजह है कि अब ढाबा संचालक इस मामले में राहत की उम्मीद लेकर सरकार तक पहुंचे हैं।

पिछले सप्ताह हाईवे ढाबा एसोसिएशन के सदस्यों का एक प्रतिनिधि मंडल चंडीगढ़ में पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह से मिला। प्रतिनिधि मंडल ने मंत्री के सामने जुर्माने का मुद्दा रखा और इसे माफ कराने की मांग की।

ढाबा एसोसिएशन ने कहा- प्रदूषण नहीं फैलाया

हाईवे ढाबा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनजीत सिंह ने बताया कि ढाबों ने प्रदूषण नहीं फैलाया है। उनका कहना है कि जब एसटीपी की व्यवस्था नहीं थी, तब सभी ढाबा संचालकों ने पिट बना रखी थी। ढाबों से निकलने वाला पानी इन्हीं पिट में जमा होता था।

मनजीत सिंह के अनुसार, इसके बाद इस पानी को टैंकर के जरिये गांव राठधना स्थित एसटीपी में डाला जाता था। उनका कहना है कि बाद में जब डीक्रस्ट के लिए ढाबों के लिए एसटीपी बनाया गया तो पानी इसमें जाने लगा। ऐसे में ढाबा संचालकों का दावा है कि इस अवधि में भी उनकी ओर से प्रदूषण नहीं फैलाया गया।

मंत्री ने CPCB को लिखा पत्र

हाईवे ढाबा एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल से मुलाकात के बाद पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने CPCB को पत्र लिखकर ढाबा संचालकों को जुर्माने में राहत देने का आग्रह किया है।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह मामला हरियाणा सरकार के सीधे अधिकार क्षेत्र का विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि ढाबा संचालकों की मांग पर CPCB को पत्र लिखकर जुर्माने से रियायत दिलाने का आग्रह किया गया है। अब इस मामले में CPCB के जवाब का इंतजार है।

राव नरबीर सिंह ने कहा, "मुरथल के ढाबा संचालकों का एक प्रतिनिधि मंडल मिला था, लेकिन यह हरियाणा सरकार का विषय नहीं है। ढाबा संचालकों की मांग पर सीपीसीबी को पत्र लिखकर जुर्माना से रियायत दिलाने का आग्रह किया गया है। वहां से जवाब आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।"

अब मुरथल के ढाबा संचालकों की नजर CPCB के जवाब पर है। करोड़ों रुपये के बकाया जुर्माने से राहत मिलेगी या नहीं, इसका फैसला CPCB के रुख के बाद ही स्पष्ट होगा।