हरियाणा कैबिनेट के कई अहम फैसले: स्थानीय निकायों को 7% राजस्व, लाडो लक्ष्मी योजना में बदलाव और पूर्व अग्निवीरों को राहत

हरियाणा कैबिनेट ने स्थानीय निकायों को 7 प्रतिशत कर राजस्व, लाडो लक्ष्मी योजना में आय सीमा बढ़ाने, मीडियाकर्मियों की सहायता और पूर्व अग्निवीरों को भर्ती में छूट देने के फैसले किए।

हरियाणा कैबिनेट के कई अहम फैसले: स्थानीय निकायों को 7% राजस्व, लाडो लक्ष्मी योजना में बदलाव और पूर्व अग्निवीरों को राहत

➤ स्थानीय निकायों को राज्य के कर राजस्व का 7% हिस्सा मिलेगा, जिसमें 55% पंचायती राज संस्थाओं और 45% शहरी निकायों को दिया जाएगा

➤ दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना में आय सीमा बढ़ी, तीन विशेष श्रेणियों के लिए सीमा 3 लाख रुपये तक

➤ पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप C की सीधी भर्ती में लिखित परीक्षा से छूट, मीडिया कर्मियों के लिए अधिकतम सहायता राशि 5 लाख रुपये


हरियाणा में स्थानीय निकायों को वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने, महिलाओं और बच्चों से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं का दायरा बढ़ाने तथा पूर्व अग्निवीरों और मीडियाकर्मियों को राहत देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में स्थानीय निकायों को राज्य के कर राजस्व का हिस्सा हस्तांतरित करने, दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना की पात्रता शर्तों में बदलाव, मीडिया कर्मियों की वित्तीय सहायता बढ़ाने और पूर्व अग्निवीरों को भर्ती प्रक्रिया में छूट देने सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इन फैसलों का संबंध ग्रामीण और शहरी निकायों के वित्तीय प्रबंधन, पात्र परिवारों को आर्थिक सहायता तथा विभिन्न वर्गों के कल्याण से है।

स्थानीय निकायों को राज्य के कर राजस्व का 7% हिस्सा

कैबिनेट ने छठे राज्य वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार स्थानीय निकायों को धनराशि हस्तांतरित करने की व्यवस्था जारी रखने को मंजूरी दी है। इसके तहत वित्त वर्ष 2026-27 से लेकर अगले राज्य वित्त आयोग की सिफारिशें आने तक ग्रामीण और शहरी स्थानीय निकायों को धनराशि मिलती रहेगी।

निर्णय के अनुसार, राज्य के अपने कर राजस्व का वास्तविक आधार पर 7 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय निकायों को दिया जाएगा। इस राशि में से 55 प्रतिशत हिस्सा पंचायती राज संस्थाओं और 45 प्रतिशत हिस्सा शहरी स्थानीय निकायों को आवंटित किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों और शहरी क्षेत्रों में स्थानीय निकायों को विकास संबंधी कार्यों के लिए वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है।

धनराशि के आवंटन के लिए जनसंख्या और क्षेत्रफल को आधार बनाया जाएगा। ग्राम पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों के बीच राशि का वितरण 80 प्रतिशत जनसंख्या और 20 प्रतिशत क्षेत्रफल के आधार पर किया जाएगा।

वहीं, पंचायती राज संस्थाओं के भीतर जिला परिषदों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों के बीच धनराशि का वितरण क्रमशः 10 प्रतिशत, 15 प्रतिशत और 75 प्रतिशत के अनुपात में होगा। इस तरह आवंटन की व्यवस्था में स्थानीय निकायों की जनसंख्या, क्षेत्रफल और संस्थागत स्तर को ध्यान में रखा जाएगा।

दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना में आय सीमा बढ़ी

कैबिनेट ने दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना के पात्र परिवारों के लिए वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर 1.80 लाख रुपये करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही तीन विशेष श्रेणियों के लिए वार्षिक आय सीमा बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दी गई है। इन श्रेणियों में उन माताओं को शामिल किया गया है, जिनके बच्चों की शैक्षणिक उपलब्धियों या स्वास्थ्य में निर्धारित मानकों के अनुसार सुधार दर्ज किया गया है।

पहली श्रेणी में वे माताएं शामिल हैं, जिनके बच्चों ने कक्षा 10वीं या 12वीं की बोर्ड परीक्षा में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त किए हैं। दूसरी श्रेणी में उन माताओं को रखा गया है, जिनके बच्चों ने कक्षा 1 से 4 तक निपुण भारत मिशन के तहत निर्धारित मानकों के अनुसार अपनी कक्षा के स्तर की दक्षता हासिल की है।

तीसरी श्रेणी में वे माताएं शामिल हैं, जिनके बच्चे गंभीर तीव्र कुपोषण या मध्यम तीव्र कुपोषण की स्थिति से उबरकर सामान्य स्वास्थ्य स्थिति में पहुंच गए हैं। इन तीनों श्रेणियों के लिए आय सीमा में बढ़ोतरी का उद्देश्य निर्धारित पात्रता मानकों के तहत आने वाले परिवारों को योजना के दायरे में शामिल करना है।

अब हर महीने नहीं, तीन महीने में होगा लाइवनेस सत्यापन

लाडो लक्ष्मी योजना के लाभार्थियों के लिए सत्यापन प्रक्रिया में भी बदलाव किया गया है। अब लाभार्थियों को लाइवनेस सत्यापन हर महीने के बजाय प्रत्येक तीन महीने में एक बार कराना होगा। इससे सत्यापन की आवृत्ति कम होगी और लाभार्थियों को हर महीने यह प्रक्रिया पूरी नहीं करनी पड़ेगी।

यह नई व्यवस्था 1 नवंबर 2026 से लागू होगी। योजना की पात्रता और सत्यापन से संबंधित बदलावों के साथ ही कैबिनेट ने प्रशासनिक ढांचे में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

नागरिक संसाधन सूचना विभाग को स्वतंत्र विभाग का दर्जा

कैबिनेट ने नागरिक संसाधन सूचना विभाग (CRID) को स्वतंत्र विभाग का दर्जा देने की मंजूरी दी है। इसके साथ ही हरियाणा राज्य इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम लिमिटेड को भी CRID के प्रशासनिक नियंत्रण में लाने का निर्णय लिया गया है।

इस फैसले के तहत विभागीय व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। दोनों निर्णय राज्य के प्रशासनिक ढांचे से संबंधित हैं।

मीडियाकर्मियों की वित्तीय सहायता बढ़ाकर 5 लाख रुपये

कैबिनेट बैठक में प्रदेश के मीडिया कर्मियों के हितों को ध्यान में रखते हुए भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। हरियाणा मीडिया कर्मी कल्याण कोष प्रशासन योजना के तहत पात्र मीडिया कर्मियों को दी जाने वाली अधिकतम वित्तीय सहायता राशि बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मंजूरी दी गई है।

इस फैसले का संबंध पात्र मीडियाकर्मियों को उपलब्ध कराई जाने वाली वित्तीय सहायता से है। सरकार की ओर से मीडिया कर्मियों और उनके परिवारों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्धता जताई गई है। सहायता राशि की अधिकतम सीमा में बढ़ोतरी से योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय मदद का स्तर बढ़ेगा।

पूर्व अग्निवीरों को ग्रुप C भर्ती में लिखित परीक्षा से छूट

कैबिनेट ने पूर्व अग्निवीरों के हित में भी महत्वपूर्ण फैसला लिया है। हरियाणा की अग्निवीर नीति के दायरे में आने वाले ग्रुप C पदों की सीधी भर्ती में पूर्व अग्निवीरों को सभी प्रकार की लिखित परीक्षाओं से छूट देने की मंजूरी दी गई है।

इसके अलावा, कुछ विशेष पदों के लिए आवेदन करने वाले पूर्व अग्निवीरों को लागू प्रावधानों के अनुसार शारीरिक स्क्रीनिंग टेस्ट और शारीरिक माप परीक्षण से भी छूट देने का निर्णय लिया गया है।

इन पदों में वन्य जीव रक्षक, भारतीय रिजर्व बटालियन में कांस्टेबल, राज्य आपदा मोचन बल में कांस्टेबल और फायर ऑपरेटर कम ड्राइवर शामिल हैं। इन पदों के लिए निर्धारित नियमों के तहत पूर्व अग्निवीरों को संबंधित शारीरिक परीक्षणों में छूट का लाभ मिलेगा।

कैबिनेट के इन फैसलों में स्थानीय निकायों के वित्तीय आवंटन, लाडो लक्ष्मी योजना की पात्रता, लाभार्थियों के सत्यापन, प्रशासनिक व्यवस्था, मीडियाकर्मियों की सहायता और पूर्व अग्निवीरों की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग प्रावधान शामिल हैं।