हरियाणा के सरकारी विभागों में 700 करोड़ की धोखाधड़ी, चार गिरफ्तार

हरियाणा के सरकारी विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी से जुड़े 700 करोड़ रुपये से अधिक के कथित धोखाधड़ी मामले में CBI ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया।

हरियाणा के सरकारी विभागों में 700 करोड़ की धोखाधड़ी, चार गिरफ्तार

➤ हरियाणा के सरकारी विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी से जुड़े मामले में चार और गिरफ्तार

➤ पंचकूला की CBI अदालत ने गौरव कांसल, सिद्धार्थ नरूला, मोहित और मनोज को तीन दिन की रिमांड पर भेजा

➤ जांच एजेंसी के अनुसार, सरकारी धन को बैंक खातों से घुमाकर नकदी में बदलने और हवाला के जरिए भेजने के आरोप


चंडीगढ़। हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी और क्रेस्ट सोसायटी से जुड़े 700 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने चार और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में सेक्टर-35 के बर्तन कारोबारी गौरव कांसल के अलावा सिद्धार्थ नरूला, मोहित और मनोज शामिल हैं। चारों को पंचकूला स्थित CBI अदालत में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें तीन दिन की रिमांड पर भेज दिया। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस मामले में सरकारी खातों से निकाली गई रकम को अलग-अलग बैंक खातों के माध्यम से घुमाकर नकदी में बदला गया, ताकि धन के वास्तविक स्रोत और अंतिम लाभार्थियों का पता लगाना मुश्किल हो जाए।

सरकारी धन को नकदी में बदलने में भूमिका का आरोप

CBI के अनुसार, गौरव कांसल ने सरकारी खातों से निकाली गई रकम को नकदी में बदलने और फिर उसे बैंक खातों में जमा कराने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जांच एजेंसी का आरोप है कि उसने IDFC फर्स्ट बैंक के पूर्व ब्रांच मैनेजर और मामले के कथित मुख्य आरोपी रिभव ऋषि के साथ मिलकर करीब दो वर्षों के दौरान 94 करोड़ रुपये के लेन-देन में भूमिका निभाई।

एजेंसी के मुताबिक, गौरव नकदी उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के तौर पर काम करता था। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि उसके एक चचेरे भाई की इस पूरे मामले में क्या भूमिका रही है। CBI अब यह पता लगाने में जुटी है कि सरकारी खातों से निकाली गई रकम किन लोगों तक पहुंची और उससे कहां-कहां संपत्तियां खरीदी गईं।

फर्जी कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपये के लेन-देन का आरोप

CBI के अनुसार, 6 दिसंबर 2023 से 5 दिसंबर 2025 के बीच कथित फर्जी कंपनियों आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स से भारत डिस्ट्रिब्यूटर्स के खाते में 82 लेन-देन के जरिए 26.78 करोड़ रुपये भेजे गए।

जांच एजेंसी का कहना है कि इसके बदले 66 लेन-देन के माध्यम से 25.18 करोड़ रुपये वापस भेजे गए। आरोप है कि इन लेन-देन के साथ नकदी का भी आदान-प्रदान किया गया। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अलग-अलग खातों के जरिए रकम को किस तरह घुमाया गया और इसका लाभ किन लोगों को मिला।

कालका नगर परिषद के 18.46 करोड़ रुपये से जुड़ा मामला

जांच में 20 जनवरी 2026 को नगर परिषद कालका के खाते से 18.46 करोड़ रुपये निकाले जाने का मामला भी सामने आया है। CBI के मुताबिक, इसमें से चार करोड़ रुपये एसआरआर प्लानिंग गुरुज के RBL बैंक खाते में भेजे गए। इसी दिन इस खाते से 2.50 करोड़ रुपये मेगा स्टोर को ट्रांसफर किए गए।

एजेंसी के अनुसार, 21 और 22 जनवरी को स्वास्तिक देश की ओर से क्रमशः 80 लाख रुपये और 1.10 करोड़ रुपये भी भेजे गए। जांच में आरोप लगाया गया है कि 22 जनवरी को रिभव ऋषि के कहने पर मोहित गोयल ने अपने स्टोर और परिचितों के माध्यम से दो करोड़ रुपये नकद की व्यवस्था की।

CBI के आरोप के मुताबिक, यही रकम उसी शाम हवाला के माध्यम से दिल्ली में आरोपी IAS अधिकारी आरके सिंह के बेटे तक पहुंचाई गई। इस मामले में जांच एजेंसी धन के लेन-देन की कड़ियों और कथित लाभार्थियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

मेगा स्टोर और भगवती एजेंसीज के खातों की जांच

मामले में गिरफ्तार आरोपियों में मोहित गोयल भी शामिल है, जो चंडीगढ़ के सेक्टर-32डी स्थित एससीओ-357 में संचालित चंडीगढ़ मेगा स्टोर का मालिक बताया गया है। वह सेक्टर-37बी का निवासी है।

CBI के अनुसार, मोहित गोयल को जानकारी थी कि आरएस ट्रेडर्स और कैपको फिनटेक सर्विसेज रिभव ऋषि की फर्में हैं। एजेंसी का दावा है कि IDFC फर्स्ट बैंक के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर रिभव ऋषि ने ही उसके स्टोर का बैंक खाता खुलवाया था।

जांच एजेंसी के मुताबिक, 11 अक्टूबर 2023 से 28 जनवरी 2026 के बीच आरएस ट्रेडर्स, कैपको फिनटेक, स्वास्तिक देश और एसआरआर प्लानिंग गुरुज से मोहित गोयल तथा उसकी दो फर्मों चंडीगढ़ मेगा स्टोर और भगवती एजेंसीज को 112 लेन-देन के जरिए कुल 59 करोड़ 50 लाख 47 हजार 515 रुपये भेजे गए।

इसके बदले इन खातों से 14 करोड़ 5 लाख 24 हजार रुपये ही वापस भेजे जाने का आरोप है। CBI इन लेन-देन की प्रकृति, रकम के इस्तेमाल और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

जांच में किन पहलुओं पर है ध्यान

इस मामले में CBI की जांच का प्रमुख केंद्र सरकारी खातों से निकाली गई रकम का वास्तविक प्रवाह, कथित फर्जी कंपनियों की भूमिका, नकदी में रकम बदलने की प्रक्रिया और हवाला के जरिए धन भेजे जाने के आरोप हैं। एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित धोखाधड़ी से हासिल रकम से किन लोगों ने लाभ उठाया और उससे कोई संपत्ति खरीदी गई या नहीं।

चार और आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा है। फिलहाल आरोपों की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों को अदालत में साबित किया जाना बाकी है।