अंकिता भंडारी केस में पिता की पांच मांगें, सीबीआई जांच की निगरानी से लेकर फोन रिकॉर्ड खंगालने तक उठे सवा. लड़के 4 बजे हिरासत में लिया, 2 घंटे बाद छोड़ा

अंकिता भंडारी हत्याकांड में पिता वीरेंद्र भंडारी ने सीबीआई जांच की निगरानी, फोन रिकॉर्ड और कई लोगों से पूछताछ समेत पांच प्रमुख मांगें रखीं।

अंकिता भंडारी केस में पिता की पांच मांगें, सीबीआई जांच की निगरानी से लेकर फोन रिकॉर्ड खंगालने तक उठे सवा. लड़के 4 बजे हिरासत में लिया, 2 घंटे बाद छोड़ा

➤ पिता वीरेंद्र भंडारी ने सीबीआई जांच की निगरानी की मांग रखी
➤ यमकेश्वर विधायक समेत कई लोगों से पूछताछ की मांग
➤ तीनों दोषी उम्रकैद की सजा काट रहे, फिर भी जांच को लेकर उठ रहे सवाल


अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर एक बार फिर सियासी और कानूनी बहस तेज हो गई है। अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी ने बेटी की हत्या से जुड़े मामले में पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सीबीआई जांच को सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने, कुछ लोगों से पूछताछ करने और वर्ष 2022 की घटना से जुड़े फोन रिकॉर्ड तथा लोकेशन की विस्तृत जांच कराने की मांग शामिल है। यह मामला उस समय फिर चर्चा में आया, जब अंकिता के माता-पिता समेत कुछ लोगों को दिल्ली के इंडिया गेट के पास प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया और बाद में उन्हें छोड़ दिया गया।

रात 3.45 बजे पवन खेड़ा, इमरान प्रतापगढ़ी, सुप्रिया श्रीनेत, उदय भानु चिब, विनोद जाखड़, वरुण चौधरी को पुलिस ने हिरासत में लिया।

अंकिता के माता-पिता इंडिया गेट के पास प्रदर्शन कर रहे थे। उनकी मांग थी कि बेटी की हत्या से संबंधित सीबीआई जांच पूरी होने तक दुष्यंत कुमार गौतम की सिक्किम के राज्यपाल के तौर पर नियुक्ति पर रोक लगाई जाए। दुष्यंत कुमार गौतम को केंद्र सरकार ने 12 अक्टूबर को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया था। अंकिता के परिवार की ओर से उनकी नियुक्ति को लेकर आपत्ति जताई गई है, जबकि गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए अलग मामले में शिकायत दर्ज कराई है।

दिल्ली महिला पुलिस अंकिता की मां सोनी देवी को धरने से उठाकर ले गई। इस दौरान वे रोती हुई नजर आईं।

अंकिता के पिता ने रखीं पांच प्रमुख मांगें

वीरेंद्र भंडारी ने मामले की जांच को लेकर पांच मांगें सामने रखी हैं। उनका कहना है कि जांच की पूरी प्रक्रिया की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश के स्तर पर होनी चाहिए।

पहली मांग है कि अंकिता मामले में चल रही सीबीआई जांच की निगरानी सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त जज की सीधी निगरानी में कराई जाए।

दूसरी मांग में यमकेश्वर की विधायक रेनू बिष्ट से पूछताछ और 22 से 23 सितंबर 2022 के दौरान उनके फोन की कॉल डिटेल की जांच की बात कही गई है। साथ ही परिवार की ओर से यह भी पता लगाने की मांग की गई है कि वनंतरा रिजॉर्ट को ध्वस्त करने का आदेश किसने दिया था।

तीसरी मांग में उर्मिला सनावर और उनके पति के औपचारिक बयान दर्ज करने तथा सुरेश राठौर का नार्को टेस्ट कराने की मांग शामिल है।

चौथी मांग में 18 से 24 सितंबर 2022 के बीच अजय कुमार और दुष्यंत कुमार गौतम के फोन की लोकेशन और पूरी कॉल डिटेल की जांच कराने की बात कही गई है।

पांचवीं मांग में अभियुक्त पुलकित आर्य के 18 और 19 सितंबर 2022 के फोन रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है, ताकि उस अवधि में उनके संपर्क में रहे लोगों की जानकारी सामने आ सके।

अंकिता भंडारी की सितंबर 2022 में हुई थी हत्या

अंकिता भंडारी उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के गंगा-भोगपुर क्षेत्र स्थित वनंतरा टूरिस्ट रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद उत्तराखंड में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने विशेष जांच दल यानी एसआईटी का गठन किया था।

मामले में पुलकित आर्य, अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को मई 2025 में दोषी ठहराया गया। तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई और वे फिलहाल जेल में सजा काट रहे हैं।

परिवार की मांगों के बीच 'वीआईपी' एंगल पर भी चर्चा

अंकिता हत्याकांड के बाद से ही मामले में कथित 'वीआईपी एंगल' को लेकर चर्चा होती रही है। हालांकि जांच से जुड़े रहे वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शेखर सुयाल ने जनवरी 2026 में मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि जांच के दौरान ऐसा कोई ठोस तथ्य सामने नहीं आया, जिससे यह साबित हो कि रिजॉर्ट में ठहरने या बुकिंग कराने वाला कोई व्यक्ति वास्तव में 'वीआईपी' था।

सुयाल उस समय पौड़ी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे और एसआईटी का हिस्सा भी रहे थे। उनके अनुसार 18 से 22 सितंबर 2022 के बीच रिजॉर्ट में ठहरने या बुकिंग कराने वाले लोगों की विभिन्न पहलुओं से जांच की गई थी।

दुष्यंत गौतम ने आरोपों को बताया था साजिश

अंकिता भंडारी मामले को लेकर चल रहे विवाद के बीच दुष्यंत कुमार गौतम ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने देहरादून के डालनवाला थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि पूर्व विधायक सुरेश राठौर, अभिनेत्री उर्मिला सनावर और अन्य लोगों ने उनके खिलाफ सुनियोजित आपराधिक साजिश रची।

गौतम ने यह भी दावा किया है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच, चार्जशीट और अदालत की कार्यवाही में उनका नाम सामने नहीं आया है। उन्होंने अपने खिलाफ कथित आपत्तिजनक सामग्री के प्रसार पर रोक लगाने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से ऐसी सामग्री हटाने की मांग भी की है।

इन आरोपों और दावों के बीच यह स्पष्ट करना जरूरी है कि परिवार की ओर से उठाए गए सवाल और मांगें अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध नहीं करतीं। संबंधित लोगों पर लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण सक्षम जांच एजेंसी और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

दिल्ली में हिरासत के बाद फिर बढ़ा विवाद

अंकिता के माता-पिता समेत कई लोगों को इंडिया गेट के पास प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। कांग्रेस नेताओं ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे अंकिता के परिवार के साथ कठोर कार्रवाई बताया। पीटीआई के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों को बाद में सुबह करीब पांच बजे छोड़ दिया गया।

कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी अंकिता के माता-पिता को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाए। अंकिता की मां ने कहा कि जब तक दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति रद्द नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।

इससे पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी।

मुख्यमंत्री धामी पहले जांच पर जता चुके हैं भरोसा

अंकिता भंडारी मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले कह चुके हैं कि राज्य सरकार की एसआईटी ने मामले की जांच की थी और निचली अदालत के साथ-साथ उच्च न्यायालय तथा सर्वोच्च न्यायालय ने भी जांच पर संतोष व्यक्त किया था। सरकार की ओर से जांच को निष्पक्ष और मजबूत बताया गया है।

वहीं, अंकिता के परिवार की ओर से अब भी कुछ बिंदुओं पर अतिरिक्त जांच की मांग की जा रही है। पांच मांगों के जरिए परिवार ने वर्ष 2022 की घटना से जुड़े फोन रिकॉर्ड, लोकेशन और कथित संपर्कों की दोबारा पड़ताल की मांग उठाई है। ऐसे में आने वाले समय में इस मामले को लेकर जांच और राजनीतिक बहस दोनों के जारी रहने की संभावना है।