148% महिलाएं कर रहीं एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग, जानें कैसे खतरे में पड़ रही आधुनिक शादी?
भारत में एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप्स के बढ़ते इस्तेमाल और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से रिश्तों और शादी की परिभाषा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है।
- एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप्स का तेजी से बढ़ता ट्रेंड
- महिलाओं की भागीदारी में बड़ा उछाल, सोच में बदलाव के संकेत
- डिजिटल दुनिया से आधुनिक शादी और रिश्तों पर असर
भारत में बदलती लाइफस्टाइल और डिजिटल दुनिया के प्रभाव ने रिश्तों की परिभाषा को बदलना शुरू कर दिया है। एक्स्ट्रा मैरिटल डेटिंग ऐप Gleeden के 4 मिलियन यूजर्स पार करने के आंकड़े ने इस बदलाव को और स्पष्ट कर दिया है।
यह ट्रेंड दिखाता है कि अब लोग पारंपरिक शादी के ढांचे से बाहर निकलकर अपनी भावनाओं, इच्छाओं और रोमांच की तलाश कर रहे हैं। खास बात यह है कि अब इसमें केवल पुरुष ही नहीं, बल्कि महिलाओं की भागीदारी भी तेजी से बढ़ रही है।
महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ने बदली तस्वीर
रिपोर्ट के अनुसार, ऐप पर पुरुष यूजर्स अभी भी करीब 65% हैं, लेकिन महिलाओं की संख्या में पिछले दो वर्षों में 148% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह बदलाव संकेत देता है कि महिलाएं अब सिर्फ पारंपरिक भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। वे शादी में स्थिरता के साथ-साथ भावनात्मक जुड़ाव और व्यक्तिगत संतुष्टि भी तलाश रही हैं।
क्यों बढ़ रहे हैं एक्स्ट्रा मैरिटल रिश्ते?
1. समय की कमी और तनाव
IPSOS के 2025 सर्वे के अनुसार, 33% लोग अपने लिए समय नहीं निकाल पाते। काम और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर “छोटा सा रोमांच” ढूंढते हैं।
2. डिजिटल प्लेटफॉर्म की आसान पहुंच
सोशल मीडिया और ऐप्स ने नए रिश्ते बनाना बेहद आसान बना दिया है। लगभग 60% लोग मानते हैं कि ऑनलाइन फ्लर्टिंग की सुविधा अफेयर बढ़ने का बड़ा कारण है।
3. भावनात्मक और व्यक्तिगत जरूरतें
कई लोग शादी में सब कुछ होने के बावजूद भावनात्मक खालीपन महसूस करते हैं, जिसे वे बाहर पूरा करने की कोशिश करते हैं।
पुरुष vs महिलाएं: क्या कहते हैं आंकड़े?
- 43% पुरुष और 42% महिलाएं मानती हैं कि उन्होंने शादी के बाहर रिश्ते बनाए हैं
- पुरुष आमतौर पर कम उम्र के पार्टनर पसंद करते हैं
- महिलाएं स्थिर और प्रोफेशनल व्यक्तियों (डॉक्टर, CA आदि) को प्राथमिकता देती हैं
किन शहरों में ज्यादा ट्रेंड?
यह ट्रेंड सबसे ज्यादा मेट्रो शहरों जैसे बेंगलुरु, मुंबई और हैदराबाद में देखा जा रहा है, लेकिन अब लखनऊ और सूरत जैसे शहर भी तेजी से इस सूची में शामिल हो रहे हैं।
क्या सच में खतरे में है शादी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल “धोखा” का मामला नहीं, बल्कि बदलती सामाजिक मानसिकता का संकेत है।
- रिश्तों में संवाद की कमी
- व्यक्तिगत समय का अभाव
- डिजिटल दुनिया का प्रभाव
ये सभी मिलकर शादी की पारंपरिक संरचना को चुनौती दे रहे हैं।
हालांकि, यह भी सच है कि मजबूत संवाद, विश्वास और समझ से किसी भी रिश्ते को स्थिर रखा जा सकता है।
Akhil Mahajan 