भिवानी में लघु सचिवालय के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ, गौहत्या रोकने की मांग
भिवानी में गो सम्मान अभियान के तहत विभिन्न संगठनों ने गौहत्या पर रोक और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर लघु सचिवालय के बाहर हनुमान चालीसा का पाठ किया और ज्ञापन सौंपा।
भिवानी में गो सम्मान अभियान के तहत लघु सचिवालय तक निकाली गई यात्रा
अधिकारी के देर से पहुंचने पर प्रदर्शनकारियों ने गेट पर बैठकर पढ़ी हनुमान चालीसा
गौहत्या पर रोक और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग वाला ज्ञापन सौंपा
हरियाणा के भिवानी में सोमवार को गो सम्मान अभियान के तहत विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने लघु सचिवालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर यात्रा निकाली। इस दौरान अधिकारी ज्ञापन लेने के लिए समय पर नहीं पहुंचे तो लोग लघु सचिवालय के मुख्य गेट के बाहर बैठ गए और हनुमान चालीसा का पाठ किया।
जानकारी के अनुसार गो सम्मान अभियान के तहत साधु-संतों, गौसेवकों और विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने प्रेक्षा विहार से यात्रा शुरू की। यह यात्रा घंटाघर, हांसी गेट और पुराना बस स्टैंड होते हुए लघु सचिवालय पहुंची। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया और गोवंश भी साथ रहे। अभियान का नेतृत्व नंदी के साथ किया गया।
प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने पहुंचे थे। उनका कहना था कि जब तक अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचे, तब तक सभी लोग सचिवालय के गेट पर शांतिपूर्वक बैठकर हनुमान चालीसा का पाठ करते रहे। बाद में ज्ञापन संबंधित अधिकारियों को सौंपा गया।
गौ रक्षा दल के प्रधान संजय परमार ने कहा कि पूरे देश में गौहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और गाय को राष्ट्रमाता का दर्जा देने की मांग को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी 27 अप्रैल को इसी मांग को लेकर अभियान चलाया गया था, जिसमें करोड़ों लोगों के हस्ताक्षर जुटाए गए थे।
उन्होंने दावा किया कि इस बार देशभर में 15 करोड़ हस्ताक्षर जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। उनके अनुसार भिवानी जिले के हिस्से में 5 लाख हस्ताक्षर का लक्ष्य था, जबकि अभियान के दौरान 5 लाख 3 हजार हस्ताक्षर एकत्र कर ज्ञापन के साथ सौंपे गए हैं।
संजय परमार ने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर विचार नहीं करती है तो भविष्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर संत-महात्मा भूख हड़ताल भी कर सकते हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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