दिवाली पर घर पहुंचा बेटे का ताबूत,112 दिन बाद लौटा शव, चेहरा देखे बिना अंतिम विदाई
यमुनानगर के पंजेटो गांव में 112 दिन बाद गुरप्रीत सिंह का शव दिवाली पर पहुंचा। मिसाइल हमले में मौत के बाद परिवार ने चेहरा देखे बिना अंतिम संस्कार किया।
3 महीने 20 दिन बाद दिवाली के दिन गांव पहुंचा गुरप्रीत का पार्थिव शरीर
➤ मिसाइल हमले में बुरी तरह झुलसने के कारण पिता-पत्नी ने चेहरा देखे बिना दी अंतिम विदाई
➤ पिता के DNA सैंपल से हुई पहचान, परिवार का इकलौता सहारा था गुरप्रीत
यमुनानगर में एक परिवार के लिए दिवाली खुशियों का नहीं, बल्कि जिंदगी के सबसे बड़े दुख का दिन बन गई। जिस घर में पिछले करीब साढ़े तीन महीने से इकलौते बेटे के पार्थिव शरीर का इंतजार हो रहा था, वहां रविवार को आखिरकार उसका शव पहुंचा। लेकिन परिवार की आखिरी उम्मीद भी उस समय टूट गई, जब बेटे का चेहरा तक देखने की स्थिति नहीं थी। मिसाइल हमले में बुरी तरह झुलसने और लंबे समय तक शवगृह में रखे रहने के कारण गुरप्रीत सिंह का पार्थिव शरीर इस हालत में पहुंचा कि परिजनों को चेहरा देखे बिना ही उसे अंतिम विदाई देनी पड़ी।
19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह के पास जहाज पर हुए मिसाइल हमले में जान गंवाने वाले पंजेटो गांव के गुरप्रीत का पार्थिव शरीर आखिरकार 3 माह 20 दिन बाद रविवार को दिवाली के दिन गांव पहुंचा। दोपहर करीब 12 बजे जैसे ही ताबूत घर पहुंचा, परिवार में चीख-पुकार मच गई। पिता, पत्नी और दूसरे परिजन अपने आंसू नहीं रोक पाए। इसके बाद नम आंखों के साथ परिवार और ग्रामीणों ने गुरप्रीत का अंतिम संस्कार कर दिया।
करीब 112 दिनों तक बेटे के शव का इंतजार करने वाले परिवार के लिए यह पल बेहद दर्दनाक था। जिस पिता को अपने बेटे के अंतिम दर्शन की आस थी, उसे मजबूरी में चेहरा देखे बिना ही अंतिम विदाई देनी पड़ी।
परिवार पिछले साढ़े तीन महीने से कर रहा था शव का इंतजार
गुरप्रीत के मामा अमरीक सिंह ने बताया कि उसका पार्थिव शरीर शनिवार रात दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचा था। वहां जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रविवार दोपहर करीब 12 बजे उसे गांव लाया गया। परिवार पिछले साढ़े तीन माह से गुरप्रीत के शव का इंतजार कर रहा था।
गुरप्रीत परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी मौत के बाद से ही पिता कीर्तन सिंह, पत्नी और दूसरे परिजन गहरे सदमे में थे। दिव्यांग पिता हर दिन इस उम्मीद में बैठे रहते थे कि एक बार बेटे का अंतिम चेहरा देख सकेंगे। परिवार को उम्मीद थी कि लंबे इंतजार के बाद कम से कम बेटे को आखिरी बार देख तो पाएंगे, लेकिन शव की हालत देखकर यह संभव नहीं हो सका।
मिसाइल हमले के दौरान लगी भीषण आग में गुरप्रीत का शरीर बुरी तरह झुलस गया था। इसके बाद शव को लंबे समय तक मोर्चरी में रखा गया। इसी वजह से परिजनों ने उसका चेहरा देखे बिना ही अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया।
पिता के DNA सैंपल से हुई गुरप्रीत के शव की पहचान
अमरीक सिंह ने बताया कि 19 जुलाई को यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुए मर्चेंट वेसल पर क्रूज मिसाइल से हमला हुआ था। इस हमले में गुरप्रीत समेत चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई थी। मिसाइल हमले के बाद जहाज पर भीषण आग लग गई थी, जिसमें गुरप्रीत का शरीर बुरी तरह जल गया था।
शरीर की हालत इतनी खराब थी कि सामान्य तरीके से उसकी पहचान करना संभव नहीं था। ऐसे में शिपिंग कंपनी ने परिजनों से DNA सैंपल मांगे थे। इसके बाद गुरप्रीत के पिता कीर्तन सिंह का DNA सैंपल लिया गया। सैंपल का मिलान होने के बाद ही शव की पहचान हो सकी।
अमरीक सिंह के अनुसार, पहचान की प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद गुरप्रीत का शव करीब साढ़े तीन माह तक वहीं मोर्चरी में रखा रहा। इतने लंबे समय तक शव रखे रहने के कारण उसकी हालत और खराब हो गई थी। जब पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो परिवार के सामने बेटे का चेहरा देखने तक का विकल्प नहीं बचा था। आखिरकार परिजनों ने भारी मन से चेहरा देखे बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया।
कंपनी और एंबेसी से बार-बार संपर्क किया, हर बार मिला अगले सप्ताह भेजने का आश्वासन
गुरप्रीत की मौत के बाद से ही परिवार लगातार शिपिंग कंपनी और एंबेसी के संपर्क में था। परिजनों का आरोप था कि शुरुआत में कंपनी और एंबेसी के अधिकारी उनसे लगातार बातचीत कर रहे थे, लेकिन बाद में अधिकारियों ने फोन उठाना भी बंद कर दिया।
परिवार की ओर से कई बार संपर्क करने पर हर बार अगले सप्ताह शव भारत भेजने का आश्वासन दिया जाता रहा। लेकिन हर बार तारीख आगे बढ़ती गई और परिवार का इंतजार लंबा होता चला गया।
गुरप्रीत के पिता कीर्तन सिंह ने इस मामले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी मुलाकात की थी। परिवार ने सरकार से हस्तक्षेप कर बेटे का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की मांग की थी। करीब तीन माह तक इंतजार करने के बावजूद जब कोई ठोस जानकारी नहीं मिली तो परिजनों ने कंपनी और एंबेसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
परिवार ने गुरप्रीत की मौत के बाद उचित मुआवजा दिलाने की मांग भी की थी। परिजनों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह थी कि विदेश में जान गंवाने वाले बेटे का पार्थिव शरीर कब तक भारत पहुंचेगा और वे कब उसे अंतिम विदाई दे पाएंगे।
पिता की एक टांग कट चुकी थी, परिवार की जिम्मेदारी संभालता था गुरप्रीत
गुरप्रीत के परिवार की आर्थिक स्थिति और जिम्मेदारियों को देखते हुए उसकी मौत ने परिवार को बड़ा झटका दिया है। उसके पिता कीर्तन सिंह का वर्ष 2016 में सड़क हादसा हुआ था। इस हादसे में उनकी एक टांग काटनी पड़ी थी। इसके बाद परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी काफी हद तक गुरप्रीत के कंधों पर आ गई थी।
गुरप्रीत मर्चेंट नेवी में काम करता था और परिवार का इकलौता बेटा था। पिता की शारीरिक स्थिति के कारण वह परिवार का सबसे बड़ा सहारा बन गया था। करीब डेढ़ साल पहले उसकी शादी हुई थी और छह माह पहले ही वह बेटी का पिता बना था। परिवार में उसकी बेटी के आने से खुशियां बढ़ी थीं, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि इतनी जल्दी परिवार को इस तरह का दुख झेलना पड़ेगा।
गुरप्रीत 12 जून को काम के सिलसिले में तुर्की गया था। इसके बाद 19 जुलाई को उसका जहाज एमवी गोल्डन लियो यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से रवाना हुआ था। इसी दौरान क्रूज मिसाइल ने जहाज को निशाना बनाया। इस हमले में कुल 10 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें चार भारतीय नागरिक शामिल थे।
दिवाली के दिन पंजेटो गांव में पसरा मातम, ग्रामीणों की आंखें भी हुईं नम
रविवार को जब देशभर में लोग दिवाली का त्योहार मना रहे थे, उसी समय यमुनानगर के पंजेटो गांव में गुरप्रीत के घर मातम पसरा हुआ था। परिवार के लिए यह दिवाली जिंदगी का सबसे दुखद दिन बन गई। घर में जिस बेटे की वापसी का इंतजार था, वह लौटा भी तो ताबूत में।
गुरप्रीत का पार्थिव शरीर पहुंचने की सूचना मिलते ही गांव के लोग परिवार को सांत्वना देने के लिए घर पहुंचने लगे। ग्रामीण भी इस बात से बेहद भावुक थे कि परिवार को अपने इकलौते बेटे का शव तो मिल गया, लेकिन अंतिम समय में उसका चेहरा देखने का अवसर तक नहीं मिला।
पिता की आंखें बेटे के अंतिम दर्शन के लिए तरसती रहीं। पत्नी के सामने भी जिंदगी का सबसे कठिन समय था। छह माह की बेटी के सिर से पिता का साया उठ चुका था। करीब 112 दिनों के लंबे इंतजार के बाद परिवार ने आखिरकार गुरप्रीत को अंतिम विदाई दी, लेकिन यह विदाई ऐसी थी जिसका दर्द शायद परिवार कभी नहीं भुला पाएगा।
Akhil Mahajan