गर्मियों में ज्यादातर लोग कर रहे हैं ये बड़ी भूल, तीन जाने-माने डॉक्टरों ने किया सावधान
भीषण गर्मी में सिर्फ पानी पीना पर्याप्त नहीं है। डॉक्टरों ने इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी, डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को सावधान किया है।
- सिर्फ पानी पीना गर्मियों में शरीर को पूरी तरह हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त नहीं
- पसीने के साथ निकलने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी से बढ़ सकता है हीट स्ट्रोक का खतरा
- डायबिटीज, हाई बीपी और हार्ट मरीजों को गर्मी में विशेष सावधानी बरतने की सलाह
देश के अधिकांश हिस्सों में इन दिनों भीषण गर्मी और उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बढ़ते तापमान के कारण हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, तेज बुखार और पेट संबंधी समस्याओं के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी के मौसम में लोग एक बड़ी गलती कर रहे हैं, जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
डॉक्टरों के अनुसार, अधिकांश लोग यह मान लेते हैं कि सिर्फ अधिक मात्रा में पानी पीना ही शरीर को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त है। जबकि वास्तविकता यह है कि तेज गर्मी में शरीर से पसीने के जरिए केवल पानी ही नहीं बल्कि कई जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स भी बाहर निकल जाते हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जब गर्मी और नमी दोनों एक साथ बढ़ जाती हैं, तो शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम प्रभावित होने लगता है। पसीना निकलने के बावजूद उसका वाष्पीकरण सही ढंग से नहीं हो पाता, जिससे शरीर का तापमान लगातार बढ़ा रहता है। यही स्थिति आगे चलकर हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्या का रूप ले सकती है।
मुंबई की इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. दिव्या गोपाल के अनुसार, गर्मियों में सिर्फ पानी पीना पर्याप्त नहीं है। अत्यधिक पसीना आने से शरीर से सोडियम, पोटैशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे महत्वपूर्ण मिनरल्स भी निकल जाते हैं। ये इलेक्ट्रोलाइट्स मांसपेशियों और नसों के सही कार्य करने के साथ-साथ शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति लगातार पसीना बहाने के बाद केवल पानी पीता है, तो शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी बनी रह सकती है। इसके कारण थकान, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, चक्कर आना और बार-बार प्यास लगना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेज गर्मी के दौरान ओआरएस, नमक मिला नींबू पानी, नारियल पानी, छाछ और संतुलित भोजन का सेवन शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी को पूरा करने में मदद करता है।
इमरजेंसी मेडिकल सर्विसेज विशेषज्ञ डॉ. मुर्तजा एस बागवाला का कहना है कि डिहाइड्रेशन केवल कमजोरी तक सीमित नहीं रहता। समय रहते ध्यान न देने पर यह कई अंगों को प्रभावित कर सकता है। शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी के कारण लो ब्लड प्रेशर, तेज धड़कन, बेहोशी और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति में शरीर के जरूरी अंगों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं बढ़ सकती हैं।
इंटरनल मेडिसिन और मेटाबॉलिक विशेषज्ञ डॉ. विमल पाहुजा के मुताबिक, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग से पीड़ित लोगों के लिए गर्मियों में खतरा और अधिक बढ़ जाता है। इन बीमारियों की दवाएं भी शरीर के पानी और मिनरल संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं।
उन्होंने बताया कि शरीर में अत्यधिक तरल पदार्थ की कमी होने पर हाइपोवोलेमिया की स्थिति बन सकती है, जिसमें रक्त की मात्रा कम हो जाती है। इससे खून का संचार प्रभावित होता है और चक्कर आने, बेहोशी तथा किडनी संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
डॉक्टरों की सलाह है कि गर्मियों में केवल पानी पर निर्भर रहने के बजाय इलेक्ट्रोलाइट्स युक्त पेय पदार्थों और संतुलित आहार को भी दिनचर्या का हिस्सा बनाया जाए। साथ ही तेज धूप से बचाव, पर्याप्त आराम और शरीर में पानी की कमी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज न किया जाए।
pooja