सोनीपत के धड़कन ने जीते ₹1 करोड़,MTV Hustle 0.5 के बने विजेता

सोनीपत के दक्ष उर्फ धड़कन ने MTV Hustle 0.5 जीतकर एक करोड़ रुपये हासिल किए। जानिए दोस्तों से कपड़े मांगने से विजेता बनने तक का उनका संघर्षपूर्ण सफर।

सोनीपत के धड़कन ने जीते ₹1 करोड़,MTV Hustle 0.5 के बने विजेता

सोनीपत के दक्ष उर्फ धड़कन ने MTV Hustle 0.5 का खिताब जीता, एक करोड़ रुपये की इनामी राशि अपने नाम की

➤ कभी दोस्तों से कपड़े-जूते मांगकर रैप शो में जाते थे धड़कन, खर्च निकालने के लिए करते थे वीडियो एडिटिंग

➤ आठवीं कक्षा से शुरू किया रैप लिखना, ठेठ हरियाणवी अंदाज और मेहनत ने दिलाई राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

सोनीपत। कभी रैप शो में जाने के लिए दोस्तों से कपड़े, जूते और जैकेट मांगने पड़ते थे। दिल्ली और गुरुग्राम में कार्यक्रमों तक पहुंचने के लिए बस या शेयरिंग टैक्सी का सहारा लेना पड़ता था। संगीत के सपने को पूरा करने के लिए रात ढाई बजे तक जागकर अभ्यास करना और खर्च निकालने के लिए वीडियो एडिटिंग का काम करना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। संघर्ष के इन्हीं दिनों से निकलकर सोनीपत के दक्ष उर्फ धड़कन पेंढरकर ने MTV Hustle 0.5 का खिताब अपने नाम कर लिया है। शो जीतने के बाद वह एक करोड़ रुपये की इनामी राशि के साथ घर लौटे। पैराडॉक्स की टीम का हिस्सा रहे धड़कन ने अपने ठेठ हरियाणवी अंदाज, दमदार रैप और शानदार प्रस्तुति से दर्शकों और जजों का ध्यान खींचा। सोमवार को सोनीपत के सेक्टर-10 स्थित वर्धमान गार्डेनिया पहुंचने पर उनका स्वागत किया गया। उनकी इस कामयाबी के पीछे वर्षों की मेहनत, परिवार का सहयोग और दोस्तों की मदद की कहानी है।

आठवीं कक्षा से शुरू हुआ रैप का सफर, धीरे-धीरे सीखी संगीत की बारीकियां

दक्ष ने आठवीं कक्षा में ही रैप लिखना और गाना शुरू कर दिया था। शुरुआत में यह उनकी रुचि थी, लेकिन समय के साथ उन्होंने संगीत को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया। रैप लिखने और गाने के साथ-साथ उन्होंने म्यूजिक कंपोज करने, मिक्सिंग, मास्टरिंग और वीडियो एडिटिंग जैसी बारीकियां भी सीखीं। 12वीं कक्षा के बाद उन्होंने रैप को अधिक समय देना शुरू कर दिया।

परिवार के मुताबिक, दक्ष बचपन से ही अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ने की कोशिश करते थे। वह किसी दूसरे के सहारे अपनी पहचान बनाने के बजाय अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने संगीत को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार अपनी प्रस्तुति को बेहतर करने में जुटे रहे।

दक्ष के पिता सुधीर पेंढरकर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। उन्होंने वर्ष 2009 में सोनीपत के सेक्टर-10 स्थित वर्धमान गार्डेनिया में फ्लैट खरीदा था। वर्ष 2015 में परिवार सोनीपत में रहने लगा। इसी दौरान दक्ष का दाखिला घर के सामने स्थित ब्राइट स्कॉलर स्कूल में चौथी कक्षा में कराया गया।

दोस्तों से मांगकर पहनते थे कपड़े और जूते, फिर भी नहीं रुका संगीत का सफर

दक्ष के पिता सुधीर पेंढरकर बताते हैं कि कॉलेज के बाद जब बेटे को दिल्ली और गुरुग्राम में रैप शो करने जाना होता था, तो कई बार उसे रात में दोस्तों के पास रुकना पड़ता था। उस समय उसके पास स्टेज पर पहनने के लिए पर्याप्त कपड़े, अच्छे जूते और जैकेट नहीं होते थे। ऐसे में उसके दोस्त अपने कपड़े और जूते उसे दे देते थे।

कार्यक्रमों तक पहुंचने के लिए दक्ष को बस, किराये की टैक्सी या शेयरिंग टैक्सी का सहारा लेना पड़ता था। आर्थिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने अपने संगीत के सफर को रुकने नहीं दिया। दोस्तों ने भी संघर्ष के दिनों में उनका साथ दिया और जरूरत पड़ने पर मदद की।

परिवार के अनुसार, दक्ष ने कभी इन परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। वह लगातार अपने हुनर को निखारने और नए अवसर तलाशने में लगे रहे। आज उनकी सफलता को उन्हीं मुश्किल दिनों में की गई मेहनत का परिणाम माना जा रहा है।

गुरुग्राम जाकर समझते थे लोगों की पसंद, रैप में अपनाया हरियाणवी अंदाज

सुधीर पेंढरकर के मुताबिक, दक्ष रैपिंग को केवल गाने तक सीमित नहीं रखना चाहते थे। वह गुरुग्राम जाकर यह समझने की कोशिश करते थे कि लोगों को किस तरह का संगीत पसंद है। इसके बाद वह अपनी प्रस्तुति और गानों में उसी के अनुसार सुधार करते थे।

धीरे-धीरे उनके रैप सॉन्ग गुरुग्राम और दिल्ली विश्वविद्यालय में लोकप्रिय होने लगे। वर्ष 2015 में सोनीपत आने के बाद उन्होंने दोस्तों के साथ रहते हुए हरियाणवी बोली और संस्कृति को करीब से समझना शुरू किया।

पिता का कहना है कि दक्ष की खासियत है कि वह जिस माहौल में रहते हैं, वहां की भाषा और संस्कृति को समझने की कोशिश करते हैं। उनके रैप में दिखाई देने वाला ठेठ हरियाणवी अंदाज भी इसी लगन का हिस्सा है। इसी शैली ने उन्हें दूसरे प्रतिभागियों से अलग पहचान बनाने में मदद की।

खर्च निकालने के लिए बहन की कंपनी में करते थे वीडियो एडिटिंग

दक्ष की बहन दीक्षा बताती हैं कि उनके भाई के पास अपना निजी वाहन नहीं था। वह कभी बस तो कभी शेयरिंग टैक्सी से कॉलेज जाते थे। कई बार रात नौ बजे तक कॉलेज से लौटने के बाद घर पहुंचने में परेशानी होती थी। इसके बावजूद वह पढ़ाई और संगीत दोनों के लिए समय निकालते थे।

शो और आने-जाने का खर्च पूरा करने के लिए दक्ष अपनी बहन की कंपनी में वीडियो एडिटिंग का काम भी करते थे। इससे उन्हें आर्थिक रूप से कुछ मदद मिल जाती थी। संगीत के प्रति उनकी लगन का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह रैप की बारीकियां सीखने और अपनी प्रस्तुति सुधारने के लिए रात ढाई बजे तक जागते थे।

उनके लिए संगीत केवल शौक नहीं, बल्कि भविष्य बनाने का लक्ष्य था। इसी वजह से उन्होंने काम, पढ़ाई और रैप के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की। सीमित संसाधनों के बीच अपने सपने को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने लगातार मेहनत की।

दोस्त रचित के साथ लिखते थे रैप, अब टीम में संभाल रहे मैनेजर की भूमिका

दक्ष अपने दोस्त रचित के साथ मिलकर रैप लिखते थे। दोनों ने साथ काम करते हुए अपने हुनर को निखारा और संगीत के क्षेत्र में आगे बढ़ने की कोशिश की। अब रचित उनकी टीम में मैनेजर की भूमिका निभा रहे हैं।

पिता सुधीर के अनुसार, वह बेटे को आर्थिक रूप से ज्यादा मदद नहीं दे पाए, लेकिन दक्ष ने भी कभी पैसों की बड़ी मांग नहीं की। परिवार का कहना है कि उन्होंने अपनी मेहनत और दोस्तों के सहयोग से इस मुकाम तक पहुंचने का रास्ता तैयार किया।

बहन दीक्षा के मुताबिक, दक्ष में आत्मसम्मान की भावना है। वह अपने काम के दम पर आगे बढ़ना चाहते थे। परिवार ने संघर्ष के दिनों में उनकी लगन को करीब से देखा और अब उनकी सफलता पर खुशी जताई है।

MTV Hustle में जाने के लिए दो साल किया इंतजार, पहली बार में बने विजेता

परिवार के मुताबिक, दक्ष लंबे समय से MTV Hustle में हिस्सा लेना चाहते थे। हालांकि, निर्धारित उम्र पूरी नहीं होने के कारण उन्हें आवेदन करने के लिए करीब दो साल इंतजार करना पड़ा। 18 साल का होने के बाद उन्होंने शो के लिए आवेदन किया और पहली बार में ही विजेता बन गए।

पिता सुधीर बताते हैं कि दक्ष ने मार्च में ऑडिशन दिया था। उन्हें उसी महीने मुंबई जाना था, लेकिन शो की तारीख आगे बढ़ गई। इसके बाद 17 जून को वह प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए मुंबई रवाना हुए।

दक्ष के लिए यह सिर्फ एक रियलिटी शो नहीं था, बल्कि लंबे समय से देखे जा रहे सपने को पूरा करने का अवसर था। प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने अपनी अलग शैली और हरियाणवी अंदाज के दम पर पहचान बनाई। आखिरकार वह विजेता बनकर लौटे और एक करोड़ रुपये की इनामी राशि अपने नाम की।

MTV Hustle 0.5 जीतकर सोनीपत लौटे धड़कन, वर्धमान गार्डेनिया में हुआ स्वागत

MTV Hustle 0.5 जीतने के बाद दक्ष के सोनीपत पहुंचने पर सेक्टर-10 स्थित वर्धमान गार्डेनिया में उनका स्वागत किया गया। शो में ट्रॉफी मिलने के बाद परिवार और साथियों में खुशी का माहौल रहा। स्वागत समारोह में स्थानीय लोगों और परिचितों ने भी उन्हें बधाई दी।

इस दौरान स्कूल से जुड़े लोगों और अन्य शुभचिंतकों ने भी उनका स्वागत किया। परिवार के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास रही, क्योंकि उन्होंने दक्ष को सीमित संसाधनों के बीच संगीत के लिए लगातार मेहनत करते देखा था।

दोस्तों से कपड़े और जूते मांगकर शो में जाने से लेकर राष्ट्रीय स्तर के मंच पर विजेता बनने तक का उनका सफर परिवार और परिचितों के लिए गर्व का विषय बन गया है।

बेटे की सफलता से पिता को मिली नई पहचान, मां ने बताया खाना बनाने का शौक

सुधीर पेंढरकर का कहना है कि पहले लोग उन्हें दक्ष के पिता के रूप में जानते थे, लेकिन अब बेटे की सफलता के कारण उनकी अपनी पहचान भी बन रही है। मां सरिता के मुताबिक, दक्ष को संगीत के साथ-साथ खाना बनाने और अलग-अलग व्यंजन तैयार करने का भी शौक है।

इस सफर के दौरान परिवार को व्यक्तिगत दुख का भी सामना करना पड़ा। दक्ष की दादी का इसी साल एक जुलाई को निधन हो गया था। परिवार के अनुसार, इन परिस्थितियों के बावजूद दक्ष ने संगीत के प्रति अपनी लगन बनाए रखी।

दक्ष की सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के बीच अपने हुनर को पहचान दिलाना चाहते हैं। दोस्तों का सहयोग, परिवार का समर्थन और लगातार अभ्यास उनके सफर के महत्वपूर्ण हिस्से रहे। सोनीपत के इस युवा रैपर ने MTV Hustle 0.5 जीतकर अपनी प्रतिभा को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाई है।