20 लाख का चेक बना FIR की वजह,नॉन-CTS चेक बैंक ने लेने से किया इनकार
सोनीपत के खरखौदा में 20 लाख की उधारी के विवाद में नॉन-CTS चेक को लेकर पूर्व कारोबारी पार्टनर पर FIR हुई। कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने केस दर्ज किया।
सोनीपत में 20 लाख रुपये की उधारी को लेकर पूर्व कारोबारी पार्टनर पर धोखाधड़ी का केस
➤ सिक्योरिटी के लिए दिया HSBC का चेक बैंक ने CTS नहीं होने पर लेने से किया इनकार
➤ पुलिस कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट पहुंचे शिकायतकर्ता, आदेश के बाद खरखौदा थाने में FIR दर्ज
सोनीपत जिले के खरखौदा में 20 लाख रुपये की उधारी को लेकर पूर्व कारोबारी पार्टनर के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला दर्ज हुआ है। आरोप है कि रकम वापस करने की गारंटी के तौर पर दिया गया HSBC बैंक का चेक नॉन-CTS निकला, जिसके चलते बैंक ने उसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोपी पर रकम हड़पने के लिए पहले से ही इस तरह का चेक देने का आरोप लगाया।
पुलिस से कार्रवाई नहीं होने के बाद मामला कोर्ट पहुंचा। खरखौदा कोर्ट के आदेश पर अब थाना खरखौदा में आरोपी के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
2010 से कारोबारी साझेदारी, 2013 में व्यक्तिगत जरूरत के लिए मांगे थे 20 लाख
कोर्ट में दायर शिकायत के अनुसार, शिकायतकर्ता अजय कुमार और आरोपी वेद प्रकाश कई वर्षों से एक-दूसरे को जानते हैं। दोनों वर्ष 2010 से कारोबारी पार्टनर भी रहे हैं। शिकायतकर्ता के मुताबिक जनवरी 2013 में वेद प्रकाश ने अपनी व्यक्तिगत जरूरत के लिए उससे 20 लाख रुपये मांगे।
अजय कुमार ने कारोबारी संबंधों और आपसी विश्वास के चलते गवाहों की मौजूदगी में आरोपी को 20 लाख रुपये नकद दे दिए। शिकायत के अनुसार, रकम तीन साल की अवधि के लिए दी गई थी और उसे वापस करने के लिए आरोपी ने सुरक्षा के तौर पर बैंक का चेक दिया था।
रकम की सुरक्षा के लिए दिया था HSBC का चेक
शिकायतकर्ता के अनुसार, 20 लाख रुपये वापस करने के लिए आरोपी ने HSBC बैंक का चेक नंबर 007265 सिक्योरिटी के तौर पर दिया था। आरोपी ने उस समय कहा था कि जब उसके खाते में भुगतान की राशि आ जाएगी, तब शिकायतकर्ता इस चेक को बैंक में प्रस्तुत कर सकता है।
इस व्यवस्था के आधार पर अजय कुमार ने आरोपी पर भरोसा बनाए रखा। हालांकि बाद में रकम वापस लेने की कोशिश करने पर मामला विवाद में बदल गया।
2018 में पैसे मांगे तो आरोपी ने आर्थिक संकट का हवाला दिया
अजय कुमार के अनुसार, उसने वर्ष 2018 में वेद प्रकाश से अपनी 20 लाख रुपये की रकम वापस मांगी। इस पर आरोपी ने आर्थिक संकट का हवाला देते हुए कुछ साल बाद रकम लौटाने की बात कही।
शिकायतकर्ता का कहना है कि दोनों के पुराने कारोबारी संबंध और आपसी विश्वास के कारण उसने उस समय आरोपी की बात पर भरोसा किया और रकम की वापसी के लिए तत्काल कोई सख्त कदम नहीं उठाया।
2025 में चेक लगाने की सहमति बनी, लेकिन बैंक ने चेक स्वीकार नहीं किया
शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2025 में अजय कुमार ने एक बार फिर अपनी रकम वापस मांगी। इस दौरान आरोपी ने स्वयं चेक बैंक में लगाने की सहमति दी।
इसके बाद अजय कुमार ने 25 मई 2025 को आरोपी की ओर से दिया गया चेक अपने ICICI बैंक, खरखौदा ब्रांच में प्रस्तुत किया। बैंक अधिकारियों ने चेक देखने के बाद बताया कि बैंक में केवल CTS चेक स्वीकार किए जा रहे हैं और प्रस्तुत किया गया चेक CTS कैटेगरी में नहीं आता।
शिकायतकर्ता के अनुसार, बैंक से मिली इस जानकारी के बाद उसे चेक की वास्तविक स्थिति का पता चला और उसने आरोपी से संपर्क करने का प्रयास किया।
बैंक ने चेक नहीं लिया तो आरोपी ने फोन उठाना भी बंद कर दिया
अजय कुमार ने आरोप लगाया कि बैंक द्वारा चेक स्वीकार नहीं किए जाने के बाद उसने वेद प्रकाश से कई बार संपर्क करने की कोशिश की। हालांकि, आरोपी ने उसका फोन उठाना बंद कर दिया।
शिकायतकर्ता ने कोर्ट में आरोप लगाया कि सिक्योरिटी चेक पहले से ही इस तरह जारी किया गया था, जिससे उसके साथ धोखाधड़ी और जालसाजी की गई। उसका आरोप है कि 20 लाख रुपये की रकम वापस करने के बजाय उसे ऐसे चेक के भरोसे रखा गया, जिसे बैंक ने स्वीकार ही नहीं किया।
SHO को शिकायत देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप
शिकायतकर्ता ने बताया कि उसने मामले को लेकर थाना खरखौदा के SHO को शिकायत दी थी। उसका आरोप है कि पुलिस की ओर से इस शिकायत पर कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद अजय कुमार ने शिकायत डाक के माध्यम से भी भेजी। उसने डाक से भेजी गई शिकायत की रसीद कोर्ट में पेश की। पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के बाद शिकायतकर्ता ने न्यायालय का रुख किया।
अजय कुमार ने BNSS की धारा 175(3) के तहत कोर्ट में इस्तगासा दायर कर आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज करने और मामले में कार्रवाई की मांग की।
कोर्ट के आदेश के बाद खरखौदा थाने में FIR दर्ज
इस्तगासा पर कार्रवाई करते हुए थाना खरखौदा में आरोपी वेद प्रकाश के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR में धारा 318(4), 336(3), 338, 340 और 316 BNS लगाई गई हैं।
पुलिस के अनुसार, CCTNS में धारा 316 BNS उपलब्ध नहीं होने के कारण FIR में धारा 316(2) BNS लगाई गई है। कोर्ट के आदेश के बाद मामला दर्ज होने के साथ ही पुलिस ने अब पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
मामले में शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है। जांच के दौरान चेक, बैंक रिकॉर्ड और रकम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
Akhil Mahajan