मुरथल DCRUST में प्रशासनिक अव्यवस्था के आरोप, भर्ती से लेकर हॉस्टल और सड़कों तक पर उठे सवाल

मुरथल के DCRUST में कर्मचारी यूनियन ने कुलपति की कार्यशैली, लंबित भर्ती, जर्जर भवनों, अधूरी परियोजनाओं और कर्मचारियों के वेतन को लेकर सवाल उठाए।

मुरथल DCRUST में प्रशासनिक अव्यवस्था के आरोप, भर्ती से लेकर हॉस्टल और सड़कों तक पर उठे सवाल

➤ कर्मचारी यूनियन का आरोप—कुलपति के कार्यकाल विस्तार के बाद मनमाने फैसले, नियमित कुलपति नियुक्त करने की मांग

➤ लाइब्रेरी के ₹7 करोड़ के बजट में तीन साल में सिर्फ ₹20 लाख खर्च होने का दावा, कई विभागों में विजिटिंग फैकल्टी नहीं

➤ 2012 के बाद नियमित भर्ती नहीं होने, कर्मचारियों के वेतन और जर्जर इमारतों पर सवाल; धरने के बाद भी सुनवाई नहीं होने का आरोप


सोनीपत/मुरथल। दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (DCRUST), मुरथल में प्रशासनिक व्यवस्था, शैक्षणिक सुविधाओं, निर्माण कार्यों और कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। विश्वविद्यालय कर्मचारी यूनियन ने वर्तमान कुलपति की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि परिसर में प्रशासनिक अव्यवस्था बढ़ रही है और छात्रों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा। यूनियन ने दावा किया कि कई विभागों में विजिटिंग फैकल्टी की नियुक्ति नहीं हुई है, लाइब्रेरी के बजट का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं किया गया, कंप्यूटरों की मांग लंबित है और हॉस्टल, सड़कों तथा शैक्षणिक भवनों की हालत चिंताजनक है। कर्मचारियों ने कुलपति के कार्यकाल विस्तार के दौरान लिए गए फैसलों की समीक्षा करने और विश्वविद्यालय में जल्द नियमित कुलपति नियुक्त करने की मांग की है। ये आरोप कर्मचारी यूनियन की ओर से लगाए गए हैं; इन पर विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष उपलब्ध नहीं कराया गया है।

कुलपति की कार्यशैली और फैसलों पर यूनियन ने उठाए सवाल

कर्मचारी यूनियन का आरोप है कि कुलपति को कार्यकाल विस्तार मिलने के बाद विश्वविद्यालय में उनकी उपस्थिति कम हो गई है और महत्वपूर्ण प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यूनियन ने दावा किया कि कुलपति के कार्यकाल के अंतिम दो महीनों और विस्तार अवधि के दौरान महत्वपूर्ण भर्ती, प्रमोशन, बड़े वित्तीय या प्रशासनिक फैसलों तथा नई नीतियों को लेकर सरकार और राजभवन के निर्देश लागू होते हैं। यूनियन के अनुसार, आवश्यक मामलों में संबंधित प्राधिकरणों की पूर्व अनुमति लेना जरूरी है।

यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण कमेटियों में तेजी से बदलाव किए गए और कुछ लोगों को सदस्य तथा संयोजक बनाया गया। कर्मचारियों का कहना है कि इन बदलावों की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने हरियाणा सरकार से मांग की है कि विश्वविद्यालय में जल्द नियमित कुलपति की नियुक्ति की जाए और विस्तार अवधि में लिए गए फैसलों की नियमों के अनुरूप जांच कराई जाए। यूनियन ने नियमों के उल्लंघन के आरोप भी लगाए हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

कई विभागों में विजिटिंग फैकल्टी नहीं, इंटरनेट सुविधा पर भी सवाल

यूनियन के प्रधान सुरेश पुट्ठी ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक स्थिति पर चिंता जताई। उनके मुताबिक, वर्तमान सेमेस्टर 23 नवंबर 2026 को समाप्त होना है, लेकिन CSE, ARCH, BT, BME और CHE सहित कई विभागों में विजिटिंग फैकल्टी तक नियुक्त नहीं की गई है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो विद्यार्थियों की पढ़ाई और शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका है।

यूनियन ने दावा किया कि विश्वविद्यालय परिसर में पिछले तीन वर्षों से इंटरनेट सुविधा ठप पड़ी है। कर्मचारियों के मुताबिक, आज के डिजिटल शैक्षणिक माहौल में इंटरनेट की अनुपलब्धता विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए बड़ी समस्या बन सकती है। इस संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण उपलब्ध नहीं है।

लाइब्रेरी के ₹7 करोड़ के बजट में सिर्फ ₹20 लाख खर्च होने का दावा

शैक्षणिक संसाधनों को लेकर यूनियन ने लाइब्रेरी के बजट का मुद्दा भी उठाया है। यूनियन के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 से 2025-26 के दौरान लाइब्रेरी के लिए करीब ₹7 करोड़ का बजट था, लेकिन तीन वर्षों में केवल ₹20 लाख खर्च किए गए। यदि ये आंकड़े सही हैं, तो पुस्तकें, जर्नल और अन्य शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं।

यूनियन ने बताया कि वर्ष 2024 में प्रयोगशालाओं के लिए 400 और प्रशासनिक कार्यालयों व विभागों के लिए 400 सहित कुल 800 कंप्यूटरों की मांग भेजी गई थी। दावा है कि यह मांग अब तक पूरी नहीं हुई। कर्मचारियों ने कहा कि आधुनिक तकनीकी शिक्षा के लिए पर्याप्त कंप्यूटर और प्रयोगशाला सुविधाएं जरूरी हैं।

अधूरा टीचिंग ब्लॉक, जर्जर हॉस्टल और भवनों की सुरक्षा पर चिंता

विश्वविद्यालय के निर्माण और रखरखाव से जुड़े कार्यों पर भी कर्मचारी यूनियन ने सवाल उठाए हैं। यूनियन के अनुसार, वर्ष 2019 से 2021 के बीच राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) के तहत ₹10 करोड़ की लागत से टीचिंग ब्लॉक बनाया जाना था, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से अपने हिस्से के ₹32 लाख उपलब्ध नहीं कराने के कारण निर्माण कार्य अधूरा रह गया।

हॉस्टल की स्थिति को लेकर यूनियन ने दावा किया कि आखिरी बार वर्ष 2019 में मरम्मत हुई थी और उसके बाद व्हाइटवॉश तक नहीं कराया गया। यूनियन का कहना है कि लड़कों और लड़कियों के हॉस्टल में मरम्मत नहीं होने से मलबा गिरने की घटनाएं हो रही हैं। कर्मचारियों ने इसे विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।

यूनियन ने यह भी आरोप लगाया कि विद्यार्थियों की सिक्योरिटी मनी वर्षों से वापस नहीं की जा रही। इन मामलों में भुगतान की स्थिति, मरम्मत संबंधी रिकॉर्ड और प्रशासन की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी सामने आना जरूरी है।

केमिकल ब्लॉक का लेंटर गिरने का दावा, पहले भी हुई थी घटना

यूनियन के मुताबिक, 10 सितंबर 2026 को केमिकल ब्लॉक के लेंटर का बड़ा हिस्सा गिर गया था। इससे पहले मई 2026 में भी दीवार का एक हिस्सा गिरने का दावा किया गया है। कर्मचारियों का कहना है कि मई की घटना के बाद लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन चार महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

यदि भवनों में संरचनात्मक खामियां हैं, तो विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए समय रहते तकनीकी जांच और जरूरी मरम्मत महत्वपूर्ण है। इन घटनाओं और शिकायतों के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।

सड़क निर्माण और स्विमिंग पूल परियोजना पर भी सवाल

यूनियन ने विश्वविद्यालय परिसर में सड़क निर्माण और अन्य परियोजनाओं को लेकर भी सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों के मुताबिक, लोक निर्माण विभाग (PWD) को सड़क निर्माण के लिए ₹3 करोड़ का टेंडर दिया गया था और ₹1 करोड़ 15 लाख 50 हजार का भुगतान भी किया गया, लेकिन सड़क का निर्माण पूरा नहीं हुआ। यूनियन का दावा है कि यह कार्य वर्ष 2025 में पूरा होना था।

इसी तरह, स्विमिंग पूल परियोजना को लेकर यूनियन ने बताया कि इसका टेंडर वर्ष 2017 में दिया गया था और इसे 2019 तक पूरा होना था, लेकिन काम 2022 में पूरा हुआ। कर्मचारियों के मुताबिक, करीब ₹5.5 करोड़ खर्च होने के बावजूद स्विमिंग पूल पिछले तीन वर्षों से बंद है। फैकल्टी पार्किंग का काम भी तीन वर्षों से अधूरा होने का आरोप लगाया गया है।

इन परियोजनाओं में देरी, भुगतान और वर्तमान स्थिति की जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। फिलहाल ये विवरण कर्मचारी यूनियन की ओर से साझा किए गए दावों पर आधारित हैं।

2012 के बाद नियमित भर्ती नहीं होने का आरोप

कर्मचारियों की स्थिति पर यूनियन ने दावा किया कि विश्वविद्यालय में वर्ष 2012 के बाद से नियमित भर्ती नहीं हुई। यूनियन के मुताबिक, सेवा नियम पिछले तीन वर्षों से सरकार के पास अनुमोदन के लिए लंबित हैं, जिसके कारण प्रमोशन की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। जिन कर्मचारियों की पदोन्नति हो चुकी है, उनके वेतन निर्धारण में भी देरी होने का आरोप लगाया गया है।

यूनियन ने नए पदों का सृजन नहीं होने और कर्मचारियों को ACP का लाभ समय पर नहीं मिलने की बात भी कही। इसके अलावा, महिला कर्मचारियों के लिए क्रेच की सुविधा और आपात स्थिति में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं होने का दावा किया गया है।

कर्मचारियों ने C, D और E श्रेणी के आवासों को जर्जर बताते हुए सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। उनका आरोप है कि NOC और रिलीविंग नहीं मिलने से कर्मचारियों के दूसरे अवसरों और करियर की संभावनाओं पर असर पड़ रहा है।

HKRNL और DC Rate कर्मचारियों के वेतन को लेकर शिकायतें

यूनियन ने कहा कि हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) और DC Rate पर कार्यरत अस्थायी कर्मचारियों को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि प्रशासन सरकारी पत्र के विश्वविद्यालय को सीधे संबोधित नहीं होने का हवाला देकर कुछ कर्मचारियों का एक्सटेंशन नहीं करता। इसके कारण HKRNL पोर्टल पर उपस्थिति अपडेट नहीं होने और वेतन में बाधा आने की शिकायत की गई है।

यूनियन ने दावा किया कि तीन HKRNL कर्मचारियों—पुनीत, ड्राफ्ट्समैन; सुभाष, लिफ्टमैन; और बिरमल, माली—का तीन महीने का वेतन एक साल से लंबित है। इसके अलावा, 13 अनुभवी DC Rate कर्मचारियों पर SETC टेस्ट लागू करने को लेकर भी आपत्ति जताई गई है।

कर्मचारी यूनियन का आरोप है कि सरकार के 30 अप्रैल 2025 के SETC संबंधी आदेशों का भी पालन नहीं किया गया। इन शिकायतों की स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित आदेशों, वेतन रिकॉर्ड और प्रशासनिक निर्णयों की जांच जरूरी होगी।

कोर्ट केसों की संख्या बढ़ने का दावा, धरने के बाद भी नाराजगी

यूनियन के अनुसार, विश्वविद्यालय से जुड़े कोर्ट केसों की संख्या वर्ष 2013 से 2022 के बीच 93 थी, जो वर्ष 2023 से 2026 के बीच बढ़कर 198 हो गई। यूनियन का दावा है कि अकेले पिछले तीन वर्षों में 105 मामले सामने आए। कर्मचारियों ने कहा कि मुकदमों में वृद्धि प्रशासनिक फैसलों और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर चिंता का विषय है, हालांकि मामलों की प्रकृति और उनके कारणों का स्वतंत्र विवरण उपलब्ध नहीं है।

इन्हीं मुद्दों के विरोध में कर्मचारियों ने 28 सितंबर 2026 को रोष मार्च और अनिश्चितकालीन धरना दिया था। यूनियन का आरोप है कि कुलपति या रजिस्ट्रार धरना स्थल पर नहीं पहुंचे और कर्मचारियों की मांगों के बारे में जानकारी लेने की पहल भी नहीं की गई। इससे कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ने की बात कही गई है।

कर्मचारी यूनियन ने सरकार से नियमित कुलपति की नियुक्ति, प्रशासनिक फैसलों की समीक्षा, शैक्षणिक संसाधनों की उपलब्धता, भवनों की सुरक्षा, लंबित वेतन और प्रमोशन संबंधी समस्याओं के समाधान की मांग की है। अब इन आरोपों पर विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकार की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।