राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- अहिंसा से मिली जीत

मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सोनम वांगचुक राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि अहिंसा की वजह से आंदोलन सफल हुआ और शिक्षा सुधार की उम्मीद जताई।

राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- अहिंसा से मिली जीत

सोनम वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज होकर सीधे राजघाट पहुंचे, महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि

बोले- हिंसा से आंदोलन कमजोर पड़ता, इसलिए समय से पहले अनशन खत्म किया

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बताया शुरुआत, कहा- शिक्षा ही नहीं, शासन व्यवस्था भी बदलेगी


सामाजिक एवं पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे। यहां उन्होंने अपनी पत्नी डॉ. गीतांजलि के साथ महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि बापू का सत्य और अहिंसा का मार्ग आज भी उतना ही प्रभावी है, जितना सौ वर्ष पहले था।

वांगचुक ने कहा कि उनका पूरा आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चला और यही इसकी सबसे बड़ी ताकत रही। उन्होंने कहा कि यदि आंदोलन हिंसक हो जाता तो पूरा मामला बिगड़ सकता था। इसी कारण उन्होंने तय समय से पहले अपना 26 दिन का अनशन समाप्त करने का फैसला लिया।

उन्होंने कहा कि कई लोगों ने उन्हें बताया था कि आज के दौर में महात्मा गांधी का रास्ता सफल नहीं हो सकता, लेकिन उनका अनुभव इससे बिल्कुल अलग रहा। उनके अनुसार अहिंसा का रास्ता सरकार से पहले जनता के दिल तक पहुंचता है और जब जनता साथ खड़ी होती है तो बदलाव की राह अपने आप खुलने लगती है।

वांगचुक ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि संघर्ष का सबसे प्रभावी तरीका वही है जिसमें दूसरों को कष्ट देने के बजाय स्वयं कठिनाइयों का सामना किया जाए। उन्होंने कहा कि यही रास्ता सबसे कठोर दिल को भी पिघला सकता है। सफलता भले देर से मिले, लेकिन लगातार प्रयास करने वालों को उसका परिणाम जरूर मिलता है।

उन्होंने अपने आंदोलन से जुड़े सभी युवाओं और समर्थकों का आभार जताया। वांगचुक ने कहा कि आंदोलन की सफलता लाठी, पत्थर या हिंसा से नहीं, बल्कि शांति, संयम और लोकतांत्रिक तरीके से मिली है। यदि कहीं हिंसा होती तो बातचीत और समाधान दोनों प्रभावित होते।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया देते हुए वांगचुक ने कहा कि यह केवल शुरुआत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अब शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार होंगे और संसद में जिस तरह परीक्षा सुधारों पर चर्चा चल रही है, उससे देश को मजबूत और पारदर्शी व्यवस्था मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि जहां जनता सवाल पूछे, वहां नेताओं और मंत्रियों को जवाबदेह होना चाहिए।

डिस्चार्ज होने से पहले जारी वीडियो संदेश में वांगचुक ने बताया कि उनकी तबीयत पहले से काफी बेहतर है। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे भोजन शुरू कर दिया है और शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह अनशन शुरू करने से पहले वह राजघाट गए थे, उसी परंपरा को निभाते हुए अस्पताल से निकलने के बाद भी सबसे पहले बापू को श्रद्धांजलि देने पहुंचे। इसके बाद वह अपने घर लद्दाख रवाना होंगे।

मेदांता अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया गया कि सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हुआ है। उनकी सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य हैं और अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। डॉक्टरों के अनुसार वह बिना किसी परेशानी के चलने-फिरने में सक्षम हैं।

गौरतलब है कि सोनम वांगचुक लद्दाख से जुड़े मुद्दों और NEET पेपर लीक के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 26 दिनों तक अनशन पर बैठे थे। सरकार की ओर से प्रमुख मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया था। इससे पहले भी वह लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने, पूर्ण राज्य का दर्जा, स्थानीय युवाओं के अधिकार और पर्यावरण संरक्षण की मांग को लेकर लंबे समय तक आंदोलन कर चुके हैं।