रोहतक में पाखंड खंडन सम्मेलन, रामपाल दास के खिलाफ तीसरी लड़ाई का आह्वान
रोहतक के दयानंद मठ में पाखंड खंडन सम्मेलन में आर्य समाज के विद्वानों ने रामपाल दास के खिलाफ तीसरी लड़ाई का आह्वान किया
➤ दयानंद मठ में पाखंड खंडन सम्मेलन, कई राज्यों से पहुंचे आर्य समाज के विद्वान
➤ रामपाल दास के खिलाफ तीसरी लड़ाई का आह्वान, सम्मेलन में आगे की रणनीति पर चर्चा
➤ आर्य समाज ने देश में बढ़ते पाखंड को खत्म करने के लिए अभियान तेज करने की बात कही
रोहतक। आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा की ओर से रविवार को रोहतक के दयानंद मठ में पाखंड खंडन सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में विभिन्न राज्यों से आर्य समाज के प्रतिनिधि और विद्वान पहुंचे। कार्यक्रम के दौरान देश में बढ़ रहे पाखंड को समाप्त करने को लेकर विचार-विमर्श किया गया। वहीं, वक्ताओं ने रामपाल दास से जुड़े मामलों को लेकर भी अपने विचार रखे और उनके खिलाफ संघर्ष को आगे बढ़ाने की बात कही।
आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के उपप्रधान उमेद सिंह ने कहा कि पाखंड के खिलाफ आर्य समाज ने बिगुल बजा दिया है। देश में बढ़ रहे पाखंड को समाप्त करने के लिए सम्मेलन में निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रामपाल दास से जुड़े विषयों को लेकर चर्चा के लिए 7 विद्वानों को आमंत्रित किया गया है।
रामपाल के खिलाफ तीसरी लड़ाई का आह्वान
उमेद शर्मा ने कहा कि 2006 में करौंथा में रामपाल के खिलाफ पहली लड़ाई लड़ी गई थी, जिसे उनके अनुसार आर्य समाज ने जीता था। इसके बाद 2013 में बरवाला में रामपाल के समर्थकों के साथ दूसरा संघर्ष हुआ। उमेद शर्मा के मुताबिक, अब रामपाल के खिलाफ तीसरी लड़ाई का आह्वान किया गया है।
उन्होंने कहा कि पाखंड के खिलाफ आर्य समाज की ओर से अभियान चलाया जाएगा और सम्मेलन में इस संबंध में आगे की रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा। सम्मेलन के अंत में आर-पार के संघर्ष की घोषणा किए जाने की बात भी कही गई।
रामपाल पर लगाए कई आरोप
उमेद शर्मा ने रामपाल दास पर कई आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि रामपाल बंद कमरे में महिलाओं को मंत्र देते हैं और महिलाओं से पैर धुलवाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रामपाल स्वामी दयानंद की आलोचना करते हैं, जिसे आर्य समाज सहन नहीं कर सकता।
उमेद शर्मा ने कहा कि कुछ लोग आर्य समाज की संख्या कम होने की बात कहते हैं, लेकिन सम्मेलन में उनके सामने बड़ी संख्या में लोग मौजूद हैं। उन्होंने इसे पाखंड के खिलाफ आर्य समाज की ताकत बताया।
रामपाल को वेदों का ज्ञान नहीं होने का दावा
उमेद शर्मा ने रामपाल दास के वेदों के ज्ञान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि रामपाल कहते हैं कि वेद स्वामी दयानंद ने लिखे थे। उमेद शर्मा ने कहा कि जिसे वेदों के बारे में जानकारी नहीं है, वह लोगों को क्या ज्ञान देगा।
उन्होंने कहा कि महाभारत के बाद अगर कोई ऋषि हुआ तो वह स्वामी दयानंद थे। उमेद शर्मा ने कबीर शब्द को फारसी बताते हुए उसे भगवान मानने को भी गलत बताया।
12 साल जेल का हवाला देकर साधा निशाना
उमेद शर्मा ने रामपाल के जेल जाने का जिक्र करते हुए कहा कि रामपाल 21 दिन रिमांड पर रहे और 12 साल जेल काटकर आए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे व्यक्ति उन लोगों को कैसे चुनौती दे सकते हैं, जिन्होंने 12 साल तपस्या की और 12 साल वनवास काटा।
उमेद शर्मा ने कहा कि ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि रामपाल ने सनातन धर्म को चुनौती देकर गलत किया है।
खापों की पगड़ी को लेकर भी उठाए सवाल
सम्मेलन में सुभाष फौजी ने भी रामपाल दास को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि रामपाल ने खाप प्रतिनिधियों की पगड़ी अपने पैरों में रखवा ली। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे लोग भगवान कैसे हो सकते हैं।
सुभाष फौजी ने खापों से रामपाल के बहिष्कार की अपील की। उन्होंने कहा कि महम खाप ने सबसे पहले बहिष्कार किया है। उन्होंने रामपाल को देशद्रोही बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने सनातन धर्म पर हमला किया और सत्यार्थ प्रकाश को बदनाम करने की कोशिश की।
सम्मेलन में आगे की रणनीति पर चर्चा
दयानंद मठ में आयोजित सम्मेलन में आर्य समाज के सदस्यों और विद्वानों ने पाखंड के खिलाफ अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि देश में बढ़ रहे पाखंड को समाप्त करने के लिए अभियान को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
सम्मेलन में रामपाल दास को लेकर लगाए गए आरोपों और आर्य समाज के आगामी कदमों पर भी चर्चा हुई। मंच से तीसरी लड़ाई के आह्वान की बात कही गई और आगे की रणनीति को लेकर निर्णय लेने की बात कही गई।
Akhil Mahajan