हरियाणा के 4 शहरों में लगेंगे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, 5 हजार टन कचरे से बनेगी 50 मेगावाट बिजली

हरियाणा के अंबाला, हिसार, फरीदाबाद और गुरुग्राम में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगेंगे, 5 हजार टन कचरे से 50 मेगावाट बिजली बनेगी, परियोजना अक्टूबर 2028 तक शुरू होगी

हरियाणा के 4 शहरों में लगेंगे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट, 5 हजार टन कचरे से बनेगी 50 मेगावाट बिजली

हरियाणा के 4 शहरों में लगेंगे वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट
5 हजार टन कचरे से रोज बनेगी 50 मेगावाट बिजली
सरकार और ऑयल इंडिया के बीच MoU, अक्टूबर 2028 तक शुरू होंगे प्लांट


हिसार। हरियाणा सरकार ने कचरा प्रबंधन और ग्रीन एनर्जी को लेकर बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में नूंह में शहरी स्थानीय निकाय, हरियाणा और भारत सरकार के उपक्रम ऑयल इंडिया लिमिटेड की सहयोगी इकाई ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बीच समझौता यानी MoU पर हस्ताक्षर किए गए।

इस समझौते के तहत राज्य के चार प्रमुख शहरों अंबाला, हिसार, फरीदाबाद और गुरुग्राम में वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट लगाए जाएंगे। इन संयंत्रों में हर दिन करीब 5,000 टन कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया जाएगा। इससे न्यूनतम 50 मेगावाट (MW) बिजली पैदा होगी, जिसे बिजली निगम यानी डिस्कॉम को बेचा जाएगा।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि यह परियोजना अक्टूबर 2028 तक पूरी तरह चालू हो जाएगी। कार्यक्रम में चारों नगर निगमों के कमिश्नरों और ऑयल इंडिया के एमडी सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए और एक-दूसरे को दस्तावेज सौंपे।

कचरे से बिजली ही नहीं, बायोगैस भी बनेगी

इस परियोजना में केवल कचरे को जलाकर बिजली बनाने पर जोर नहीं दिया गया है, बल्कि कचरे की वैज्ञानिक तरीके से छंटाई और प्रसंस्करण किया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत सबसे पहले गीले और सूखे कचरे की छंटाई की जाएगी।

गीले कचरे से कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) संयंत्र के जरिए बायोगैस बनाई जाएगी। वहीं सूखे कचरे में मौजूद नॉन-रिसाइकलेबल सामग्री को वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट में प्रसंस्कृत कर बिजली बनाई जाएगी।

यह परियोजना ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत स्थापित की जा रही है। सरकार की योजना कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ उससे उपयोगी संसाधन तैयार करने की है।

प्रोजेक्ट में केंद्र, राज्य और कंपनी की होगी हिस्सेदारी

इस परियोजना की कुल पूंजीगत लागत के लिए वित्तीय ढांचा तय किया गया है। इसमें 25 प्रतिशत राशि भारत सरकार के आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के अर्बन चैलेंज फंड से दी जाएगी।

वहीं 25 प्रतिशत राशि हरियाणा सरकार और संबंधित शहरी स्थानीय निकाय वहन करेंगे। परियोजना की बाकी 50 प्रतिशत राशि ऑयल ग्रीन एनर्जी लिमिटेड द्वारा निवेश की जाएगी।

इस तरह परियोजना में केंद्र सरकार, राज्य सरकार और संबंधित कंपनी की हिस्सेदारी तय की गई है।

9 जिलों का कचरा होगा प्रोसेस

वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांटों में सिर्फ उन चार शहरों का कचरा ही नहीं जाएगा, जहां संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट में कुल 9 जिलों का कचरा प्रोसेस होगा।

इनमें गुरुग्राम, फरीदाबाद, अंबाला, यमुनानगर, पंचकूला, हिसार, हांसी, फतेहाबाद और जींद शामिल हैं।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार, सभी चार संयंत्र अक्टूबर 2028 तक पूरी तरह चालू हो जाएंगे।

सड़कों और डंपिंग यार्ड में कचरे के ढेर कम करने की योजना

सरकार के अनुसार, इस परियोजना का उद्देश्य शहरों में कचरे के बढ़ते ढेर की समस्या को कम करना है। इससे सड़कों और डंपिंग यार्ड में कचरे के पहाड़ बनने बंद होंगे। साथ ही बदबू और बीमारियों से राहत मिलने की उम्मीद है।

परियोजना के जरिए राज्य को 50 मेगावाट क्लीन/ग्रीन एनर्जी भी मिलेगी। तैयार होने वाली बिजली को हरियाणा बिजली वितरण निगम (डिस्कॉम) को बेचा जाएगा और इसे राज्य के पावर ग्रिड में सप्लाई किया जाएगा।

मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि सरकार कचरे को समस्या से समाधान, बोझ से संसाधन और संपदा में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे शहरों को स्वच्छ बनाने के साथ ऊर्जा के नए स्रोत विकसित होंगे और आने वाली पीढ़ियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।

प्रदूषण रोकने के लिए लगाए जाएंगे एडवांस्ड सिस्टम

प्रोजेक्ट को लेकर यह भी सवाल उठता है कि कचरे से बिजली बनाने के दौरान प्रदूषण और धुएं की समस्या तो नहीं होगी। सरकार के अनुसार, इन संयंत्रों को सर्वोच्च पर्यावरणीय मानकों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत तैयार किया जा रहा है।

इनमें एडवांस्ड एयर पोल्यूशन कंट्रोल सिस्टम (APCS) लगाए जाएंगे। इनके जरिए धुएं और हानिकारक गैसों को वातावरण में मिलने से रोकने की व्यवस्था की जाएगी।

‘वेस्ट टू वेल्थ’ से कचरे को संसाधन में बदलने पर जोर

मुख्यमंत्री की ओर से इस्तेमाल की गई ‘वेस्ट टू वेल्थ’ अवधारणा का मतलब बेकार समझकर फेंके जाने वाले कचरे को समस्या मानने के बजाय वैज्ञानिक तकनीक से उपयोगी संसाधनों में बदलना है।

इसके तहत कचरे से बिजली, बायोगैस और जैविक खाद जैसे संसाधन तैयार कर आर्थिक लाभ कमाने की दिशा में काम किया जाएगा।

आम नागरिकों की भी होगी अहम भूमिका

इस परियोजना को सफल बनाने में आम नागरिकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई गई है। नागरिकों को अपने घरों और संस्थानों से निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करना होगा और इसे सफाईकर्मियों को देना होगा।

कचरे की शुरुआत में ही सही तरीके से छंटाई होने से उसके आगे के वैज्ञानिक प्रसंस्करण में मदद मिलेगी।

पहले के असफल समझौतों से अलग बताई जा रही व्यवस्था

प्रोजेक्ट से जुड़े सवालों में यह भी शामिल है कि क्या इस समझौते का भी पहले के असफल वेस्ट-टू-एनर्जी समझौतों जैसा हश्र होगा। इसके जवाब में बताया गया है कि इस बार भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम ऑयल इंडिया के साथ करार हुआ है और सरकार इसकी सीधी निगरानी कर रही है, ताकि काम समयबद्ध तरीके से धरातल पर पूरा किया जा सके।

दुनिया के कई देश कचरे से बना रहे बिजली

कचरे से बिजली बनाने के मामले में स्वीडन, जर्मनी, जापान और सिंगापुर को आगे बताया गया है। स्वीडन में कचरे से इतनी बिजली बनाई जाती है कि अपने प्लांट्स चलाने के लिए उसे दूसरे पड़ोसी देशों से कचरा आयात करना पड़ता है।

हरियाणा में प्रस्तावित परियोजना के जरिए भी कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के साथ बिजली और बायोगैस जैसे संसाधन तैयार करने की योजना है।