बहक रहे अपनों को रोकें,रक्षाबंधन पर गुरमीत राम रहीम का संदेश,नेपाल-तिब्बत बाढ़ पर जताया दुख

रक्षाबंधन पर गुरमीत राम रहीम ने रिश्तों में वफादारी और पवित्रता का संदेश दिया। नेपाल-तिब्बत बाढ़ पर दुख जताकर प्रभावितों के लिए दुआ की अपील की।

बहक रहे अपनों को रोकें,रक्षाबंधन पर गुरमीत राम रहीम का संदेश,नेपाल-तिब्बत बाढ़ पर जताया दुख

➤ रक्षाबंधन पर गुरमीत राम रहीम ने रिश्तों में वफादारी का दिया संदेश

➤ नेपाल-तिब्बत बाढ़ और भूस्खलन पर जताया दुख, प्रभावितों के लिए दुआ की अपील

➤ बोले- बहक रहे अपनों को रोकें, मुश्किल समय में एक-दूसरे के हितों की रक्षा करें

सिरसा। रक्षाबंधन के पर्व पर सिरसा डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम ने साध-संगत को रिश्तों की पवित्रता, वफादारी और मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देने का संदेश दिया। शुक्रवार को डेरे में चल रहे सत्संग के दौरान उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का बंधन केवल भाई-बहन के बीच प्यार का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह रिश्तों के प्रति वफादारी और जिम्मेदारी की याद भी दिलाता है। उन्होंने कहा कि दर्द और तकलीफ में ही पता चलता है कि अपना कौन है

गुरमीत राम रहीम ने कहा कि आज के दौर में रक्षाबंधन मनाने का मतलब रिश्तों की पवित्रता को बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि यह ऐसा समय नहीं है कि कोई युद्ध चल रहा हो और भाई-बहन उसमें जाकर एक-दूसरे की सहायता करें। ऐसे में इस पर्व का महत्व रिश्ते को मजबूत रखने, एक-दूसरे को संभालने और जरूरत पड़ने पर साथ खड़े होने में है।

नेपाल-तिब्बत में बाढ़-भूस्खलन पर जताया दुख

सत्संग के दौरान डेरा प्रमुख ने नेपाल और तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन पर भी दुख जताया। उन्होंने जारी वीडियो में कहा कि नेपाल के जिले और तिब्बत सीमा के पास आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन से बड़ी तबाही हुई है। इस हादसे में कई लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों लोग लापता हो गए हैं।

उन्होंने इस घटना को बेहद दर्दनाक हादसा बताया और कहा कि जिन लोगों के जान-माल की तबाही हुई है, उनके लिए मालिक से दुआ करनी चाहिए। उन्होंने प्रार्थना की कि मालिक प्रभावित लोगों को इस कठिन परिस्थिति को झेलने और उससे निपटने की ताकत दे।

गुरमीत राम रहीम ने साध-संगत और सभी लोगों से प्रभावितों के लिए दुआ करने का आग्रह भी किया। उन्होंने कहा कि दुआ की जाए कि इस मुश्किल स्थिति का सामना कर रहे लोगों को ताकत मिले और वे इस परिस्थिति को झेल सकें।

इस दौरान डेरे में आयोजित सत्संग में साध-संगत मौजूद रही। ऑनलाइन माध्यम से भी अनुयायी सत्संग से जुड़े रहे।

रिश्तों की पवित्रता को बताया सबसे जरूरी

रक्षाबंधन के महत्व पर बात करते हुए गुरमीत राम रहीम ने कहा कि यह बहन-भाई को याद रखने का पवित्र दिन है। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन के मौजूदा दौर के अर्थ को देखें तो रिश्तों की पवित्रता जरूरी है और यही सबसे बड़ा बंधन होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कोई युद्ध नहीं लड़ा जा रहा, जिसमें जाकर भाई अपनी बहन की सहायता करेगा या बहन अपने भाई की मदद करेगी। इसलिए इस त्योहार का वास्तविक संदेश रिश्ते की मजबूती और एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी को समझना है।

गुरमीत राम रहीम ने कहा कि अगर कोई बहक रहा है तो दोनों में से एक को उसे रोकना चाहिए। एक-दूसरे की मदद करनी चाहिए और एक-दूसरे के हितों की रक्षा करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर बांधा जाने वाला धागा भाई-बहन के बीच उच्च दर्जे के प्यार और उस जिम्मेदारी की याद दिलाता रहता है, जिसमें दर्द और तकलीफ के समय एक-दूसरे की मदद करना शामिल है।

खुशी में सब साथ, तकलीफ में पता चलता है कौन अपना

गुरमीत राम रहीम ने कहा कि तकलीफ में जो साथ होता है, वही अपना होता है। उन्होंने कहा कि खुशी के समय तो सभी लोग साथ आ जाते हैं और लड्डू खा लेते हैं, लेकिन जब मुश्किल आती है और लेने के देने पड़ते हैं, तब असली रिश्ते की पहचान होती है।

उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन का दिन रिश्तों के प्रति वफादारी सिखाता है। यह भावना केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन के दूसरे रिश्तों में भी इसकी अहमियत है। उन्होंने गुरु-शिष्य और माता-पिता-बच्चे के रिश्ते का उदाहरण देते हुए कहा कि हर रिश्ते में विश्वास, वफादारी, सहयोग और एक-दूसरे की मदद करने की भावना जरूरी है।

सत्संग में दिए संदेश के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रिश्तों की असली मजबूती केवल खुशी के अवसरों पर साथ रहने से नहीं, बल्कि कठिन समय में एक-दूसरे के साथ खड़े होने से सामने आती है। रक्षाबंधन के अवसर पर उनका संदेश रिश्तों को पवित्र बनाए रखने, अपनों को गलत रास्ते से रोकने और जरूरत के समय एक-दूसरे की मदद करने पर केंद्रित रहा।