दूध अब ₹100 पार! मुंबई में दाम बढ़ने के बाद हरियाणा में गांवों से शुरूहुई बड़ी तैयारी, शहरों में ₹115 तक पहुंचेगा भाव?
मुंबई के बाद हरियाणा में भी पशुपालक दूध का न्यूनतम भाव ₹100 तय करने की तैयारी में हैं। ट्रांसपोर्ट खर्च जुड़ने पर शहरों में कीमत ₹115 तक जा सकती है।
➤ हरियाणा के गांवों में दूध ₹100 प्रति लीटर से कम न बेचने पर मंथन
➤ चारा और पशु आहार की लागत बढ़ने से पशुपालक कीमत बढ़ाने की तैयारी में
➤ ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च जुड़ने पर शहरों में ₹115 तक पहुंच सकता है भाव
रोहतक/करनाल: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में 1 सितंबर से तबेला दूध का भाव ₹102 प्रति लीटर किए जाने के फैसले के बाद अब इसका असर हरियाणा की डेयरी राजनीति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी दिखाई देने लगा है। हरियाणा के कई गांवों में पशुपालक और डेयरी संचालक बैठकें और पंचायतें कर रहे हैं। इनमें दूध की न्यूनतम कीमत ₹100 प्रति लीटर तय करने की रणनीति पर मंथन चल रहा है।
पशुपालकों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और लगातार बढ़ रही उत्पादन लागत के बीच अब पुराने दामों पर दूध बेचना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में वे ₹100 प्रति लीटर से कम कीमत पर दूध नहीं बेचने के रुख पर विचार कर रहे हैं।
यदि गांवों से शहरों तक दूध पहुंचाने में लगने वाला ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन खर्च भी इसमें जुड़ता है, तो शहरी उपभोक्ताओं के लिए दूध की कीमत ₹115 प्रति लीटर तक पहुंच सकती है। इससे शहरों में दूध खरीदने वाले परिवारों के बजट पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
गांव-गांव में पशुपालकों की पंचायतें, ₹100 से कम पर बिक्री नहीं करने की तैयारी
हरियाणा के विभिन्न जिलों के ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों की पंचायतें और बैठकें शुरू हो गई हैं। इन बैठकों में दूध के मौजूदा भाव, पशुपालन पर बढ़ते खर्च और दूध उत्पादन की लागत को लेकर चर्चा हो रही है।
पशुपालकों का कहना है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद दूध की कीमतों में उनकी लागत के अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई है। अब उनका कहना है कि वे ₹100 प्रति लीटर से कम पर दूध बेचने की स्थिति में नहीं हैं।
पशुपालकों के सामने केवल दूध उत्पादन की लागत ही नहीं, बल्कि पशुओं के रखरखाव, चारे और मजदूरी से जुड़े खर्च भी बढ़ रहे हैं। यही वजह है कि ग्रामीण स्तर पर दूध की न्यूनतम कीमत बढ़ाने को लेकर रणनीति तैयार की जा रही है।
दाना, खल और चारे की कीमतों में करीब 25 फीसदी तक उछाल
दूध उत्पादकों और पशुपालकों के अनुसार दूध की कीमत बढ़ाना अब उनकी मजबूरी बन चुका है। उनका कहना है कि पशु आहार और चारे की लागत में करीब 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है।
पशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले खल, बिनौला, चूरी-चोकर और सूखा चारा यानी तूड़ी के दाम बढ़ने से पशुपालकों का रोजाना खर्च बढ़ गया है। दूध उत्पादन के लिए पशुओं को पर्याप्त आहार देना जरूरी है, लेकिन इसकी बढ़ती कीमतों ने पशुपालकों की लागत पर सीधा असर डाला है।
पशुपालकों का कहना है कि जब उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली जरूरी चीजें महंगी हो रही हैं तो पुराने भाव पर दूध बेचने से उनकी आमदनी और खर्च के बीच संतुलन बिगड़ रहा है।
मुर्राह भैंसों के बढ़े दाम ने डेयरी कारोबार की लागत भी बढ़ाई
दूध उत्पादन के लिए अच्छी नस्ल के दुधारू पशुओं की जरूरत होती है। पशुपालकों के अनुसार अच्छी नस्ल की मुर्राह भैंसों की कीमतों में भारी उछाल आया है। इससे नया डेयरी सेटअप तैयार करना या पुराने मवेशियों को बदलना पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है।
डेयरी संचालकों और पशुपालकों के लिए दुधारू पशुओं की कीमत बढ़ना सीधे तौर पर उनके निवेश और उत्पादन लागत से जुड़ा है। ऐसे में बढ़ती लागत के बीच दूध की कीमत को मौजूदा स्तर पर बनाए रखना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है।
चारे, दाने और मजदूरी का बढ़ता खर्च बना बड़ी वजह
पशुपालकों के मुताबिक उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है। चारे और दाने के साथ मजदूरी पर होने वाला खर्च भी बढ़ रहा है। ऐसे में पुराने दामों पर दूध बेचना उनके लिए घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
पशुपालकों का तर्क है कि दूध की कीमत तय करते समय केवल दूध की बिक्री का भाव नहीं, बल्कि पशुओं को पालने और दूध उत्पादन में आने वाली पूरी लागत को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसी वजह से गांवों में न्यूनतम ₹100 प्रति लीटर कीमत तय करने को लेकर विचार-विमर्श किया जा रहा है।
मुंबई में ₹93 से बढ़कर ₹102 हुआ तबेला दूध का भाव
मुंबई में तबेला दूध का थोक भाव ₹93 से बढ़कर ₹102 प्रति लीटर किए जाने का फैसला 1 सितंबर से लागू होगा। इसके बाद खुदरा बाजार में भी दूध की कीमतों में और बढ़ोतरी संभव बताई गई है।
मुंबई में दूध के भाव में हुई इस बढ़ोतरी का असर अब हरियाणा के पशुपालकों की चर्चाओं में भी दिखाई दे रहा है। हरियाणा में ग्रामीण स्तर पर दूध की कीमत ₹100 प्रति लीटर न्यूनतम तय करने की तैयारी की जा रही है।
वहीं, शहरों में दूध की कीमत तय होने पर केवल ग्रामीण खरीद भाव ही नहीं, बल्कि उसे शहर तक पहुंचाने में लगने वाला ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी खर्च भी जुड़ता है। ऐसे में शहरी उपभोक्ताओं के लिए दूध का भाव ₹115 प्रति लीटर तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
मुंबई और हरियाणा में दूध की कीमतों का गणित
| क्षेत्र / श्रेणी | मौजूदा / प्रस्तावित स्थिति | उपभोक्ता पर संभावित असर |
|---|---|---|
| मुंबई (तबेला थोक भाव) | ₹93 से बढ़कर ₹102 / लीटर (1 सितंबर से लागू) | खुदरा (Retail) में और अधिक बढ़ोतरी संभव |
| हरियाणा (ग्रामीण खरीद) | ₹100 प्रति लीटर न्यूनतम तय करने की तैयारी | सीधे डेयरी/किसानों से दूध लेने वालों पर असर |
| हरियाणा (शहरी रिटेल भाव) | ट्रांसपोर्ट और डिलीवरी खर्च जोड़कर ₹115 / लीटर तक | त्योहारों से पहले शहरी परिवारों के बजट पर सीधा झटका |
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता, मिठाई से लेकर पनीर-मावा तक पर असर
दूध की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी ऐसे समय में सामने आ रही है, जब रक्षाबंधन के बाद आगामी नवरात्र, दशहरा और दीवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं। त्योहारों के दौरान दूध और उससे तैयार होने वाले उत्पादों की मांग बढ़ती है।
दूध के भाव में बढ़ोतरी का असर केवल सीधे दूध खरीदने वाले उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। इससे मिठाई, पनीर, मावा और अन्य डेयरी उत्पादों की कीमतों पर भी सीधा असर पड़ सकता है।
ऐसे में त्योहारों से ठीक पहले यदि हरियाणा में गांवों से दूध की खरीद का न्यूनतम भाव ₹100 प्रति लीटर तय होता है और ट्रांसपोर्ट व डिलीवरी खर्च जुड़ने के बाद शहरों में इसकी कीमत ₹115 प्रति लीटर तक पहुंचती है, तो इसका सीधा असर शहरी परिवारों के बजट पर पड़ सकता है।
Akhil Mahajan