35.669 किलो दूध देकर वर्ल्ड रिकार्ड हरियाणा का नाम रोशन करने वाली ‘राधा’ नहीं रही, PM से भी मिल चुका है सम्मान
35.669 किलो दूध देकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली मुर्रा भैंस राधा का निधन हो गया। चार लाख में खरीदी गई राधा को प्रधानमंत्री भी सम्मानित कर चुके थे।
➤ 35.669 किलो दूध देकर विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली राधा नहीं रही
➤ चार लाख रुपये में खरीदी थी, खास दिनचर्या से बनाया था चैंपियन
➤ PM से मिल चुका था सम्मान, मौत की खबर से पशुपालक समुदाय में शोक
कभी पशु प्रतियोगिताओं के रैंप पर अपनी कद-काठी से लोगों का ध्यान खींचने वाली और फिर 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर विश्व स्तर पर हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम चमकाने वाली मुर्रा भैंस ‘राधा’ अब नहीं रही। शनिवार को उसकी मौत की खबर सिंघवा खास पहुंचते ही उसे विश्व चैंपियन बनाने वाले पशुपालक ईश्वर सिंह के परिवार और पशुपालन समुदाय में शोक की लहर दौड़ गई।
करीब एक माह पहले ही ईश्वर सिंह ने राधा को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर निवासी पशुपालक सुनील यादव को उपहार में दिया था। इसके बावजूद राधा से उनका लगाव कम नहीं हुआ था। वह प्रतिदिन फोन कर उसकी सेहत और खानपान की जानकारी लेते थे। शुक्रवार को राधा ने एक स्वस्थ कटड़ी को जन्म दिया था। पशुपालक के अनुसार इसके बाद रात तक उसकी स्थिति सामान्य थी, लेकिन शनिवार सुबह वह नहीं उठी।
बीमारी की आशंका, डॉक्टर ने की जांच
राधा की तबीयत बिगड़ने के बाद चिकित्सक को बुलाकर उसकी जांच कराई गई। पशुपालक के अनुसार बीमारी के कारण उसकी मौत होने की आशंका जताई गई है। राधा के निधन के साथ ही पशुपालन के क्षेत्र में सिंघवा खास की उस उपलब्धि का एक यादगार अध्याय भी समाप्त हो गया, जिसने मुर्रा नस्ल को विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई थी।
मुर्रा नस्ल की बेहतरीन भैंसों के लिए पहचान रखने वाले सिंघवा खास के ईश्वर सिंह लंबे समय से पशुपालन कर रहे हैं। उनकी धन्नो और हेमा मालिनी नाम की भैंसें भी पशु प्रतियोगिताओं में अपनी पहचान बना चुकी हैं। इसके बाद ईश्वर सिंह ने दूध उत्पादन का नया कीर्तिमान बनाने के लिए राधा को तैयार किया।
पहले 33 किलो 800 ग्राम का रिकॉर्ड था
ईश्वर सिंह के अनुसार उन्होंने इंटरनेट पर अधिक दूध देने वाली भैंसों के रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई। इससे पहले 33 किलो 800 ग्राम दूध का रिकॉर्ड कैथल के बूढा खेडा के पशुपालक नरेश की भैंस रेशमा के नाम होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद राधा ने 35 किलो 669 ग्राम दूध देकर नया कीर्तिमान बनाया।
राधा की इस उपलब्धि ने न केवल उसके पालक ईश्वर सिंह का नाम रोशन किया, बल्कि हरियाणा की मुर्रा नस्ल को भी विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाई।
चार लाख रुपये में खरीदी, चैंपियन बनाने के लिए बदली पूरी दिनचर्या
ईश्वर सिंह ने बताया कि उन्होंने राधा को पिछले वर्ष फतेहाबाद के गांव कन्हेडी से चार लाख रुपये में खरीदा था। इसके बाद उसे चैंपियन बनाने के लिए उसकी देखभाल और खानपान पर विशेष ध्यान दिया गया।
राधा के लिए साफ गद्दे बिछाए जाते थे। उसे दिन में तीन बार स्नान कराया जाता था। महीने में एक बार कटिंग की जाती थी और प्रतिदिन सरसों के तेल से मालिश की जाती थी। गर्मी के मौसम में उसके लिए कूलर की व्यवस्था रहती थी।
उसके आहार में आठ किलो चने, चार किलो बिनोला, दो किलो गेहूं का दलिया और दो किलो गुड़ सहित विशेष फीड दी जाती थी। इसी विशेष देखभाल और मेहनत के दम पर राधा ने दूध उत्पादन में नया कीर्तिमान बनाया। राधा को प्रधानमंत्री भी सम्मानित कर चुके थे।
राधा सिर्फ भैंस नहीं, वर्षों की मेहनत की पहचान थी
ईश्वर सिंह ने बताया कि राधा को उपहार में देने के बाद भी वह लगातार उसकी जानकारी लेते रहते थे। शनिवार को उसकी मौत की सूचना मिली तो पूरा परिवार दुखी हो गया। घर में चूल्हा तक नहीं जला।
उन्होंने कहा कि राधा उनके लिए केवल पशु नहीं थी, बल्कि वर्षों की मेहनत और पशुपालन से जुड़े सपने की पहचान बन चुकी थी। राधा को चैंपियन बनाने के लिए उन्होंने जिस तरह उसकी देखभाल की, वह उनके पशुपालन के प्रति समर्पण को भी दिखाता है।
पशुपालकों में शोक, उपलब्धि हमेशा याद रहेगी
राधा की मौत की सूचना मिलने के बाद क्षेत्र के पशुपालकों ने भी दुख जताया। पशुपालकों का कहना है कि 35.669 किलो दूध देकर राधा ने अकेले अपने पालक का ही नहीं, बल्कि हरियाणा की मुर्रा नस्ल का नाम विश्व स्तर पर पहुंचाया।
राधा की उपलब्धि पशुपालकों के लिए लंबे समय तक यादगार बनी रहेगी। उसकी कहानी बेहतर नस्ल और वैज्ञानिक तरीके से पशुपालन के लिए प्रेरणा देने वाली उपलब्धि के रूप में याद की जाएगी।
Akhil Mahajan