विदेश दौरे पर रोक को हाईकोर्ट ने बताया बेतुका, हरियाणा सरकार को तीखी फटकार; शीतल रानी को ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर लगी पूर्ण रोक खारिज कर दी और PGIMS नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी को ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति दी।

विदेश दौरे पर रोक को हाईकोर्ट ने बताया बेतुका, हरियाणा सरकार को तीखी फटकार; शीतल रानी को ऑस्ट्रेलिया जाने की अनुमति

हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर लगी पूर्ण पाबंदी खारिज की
अदालत ने रोक को मनमाना और संवैधानिक अधिकारों का हनन बताया
PGIMS की नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी को ऑस्ट्रेलिया जाने की तुरंत अनुमति


पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर लगाई गई पूर्ण पाबंदी को खारिज कर दिया है। अदालत ने सरकार के इस फैसले को मनमाना बताते हुए कहा कि यह कर्मचारियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है। हाईकोर्ट ने सरकार के उस तर्क पर भी कड़ा ऐतराज जताया, जिसके आधार पर सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर पूरी तरह रोक लगाई गई थी।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा कि सरकार की ओर से लगाई गई यह पाबंदी उसके बताए गए उद्देश्यों के मुकाबले बेहद असंतुलित थी। अदालत ने सरकार के कदम पर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह "अखरोट तोड़ने के लिए भारी हथौड़े का इस्तेमाल करने जैसा है।"

हाईकोर्ट ने यह सवाल भी उठाया कि अगर किसी कर्मचारी को अपने पेशेवर कौशल को बढ़ाने के लिए विदेश जाने से रोका जाता है तो इससे सरकार के ईंधन बचाने के लक्ष्य में आखिर कैसे मदद मिल सकती है। अदालत की इस टिप्पणी के साथ ही सरकारी कर्मचारियों के विदेश दौरे पर लगाई गई पूर्ण पाबंदी पर सवाल खड़े हो गए।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद रोहतक स्थित PGIMS की नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी की याचिका से जुड़ा है। शीतल रानी ने ऑस्ट्रेलिया में एक पेशेवर कोर्स और रजिस्ट्रेशन परीक्षा में शामिल होने के लिए छुट्टी की अर्जी दी थी।

शीतल रानी फरवरी 2021 में PGIMS रोहतक में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात हुई थीं। इसके बाद जनवरी 2024 में उन्हें ऑस्ट्रेलियाई वीजा आवेदन की मंजूरी मिली और बाद में उन्हें विजिटर वीजा भी जारी हो गया।

ऑस्ट्रेलिया में उनकी परीक्षा 29 सितंबर को निर्धारित थी। इसी परीक्षा में शामिल होने के लिए उन्होंने अर्न्ड लीव के लिए आवेदन किया था। लेकिन सरकार की ओर से विदेश यात्रा पर लगाए गए प्रतिबंध के चलते उनकी छुट्टी की अर्जी निरस्त कर दी गई।

जून में जारी दिशा-निर्देश के बाद लगी थी विदेश जाने पर रोक

हरियाणा सरकार ने 10 जून को एक दिशा-निर्देश जारी किया था। इसके तहत सितंबर तक सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था।

इस नीति में केवल गंभीर मेडिकल इलाज के मामलों को ही छूट दी गई थी। बाकी परिस्थितियों में सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर रोक लगा दी गई थी। इसी नीति के कारण शीतल रानी की ऑस्ट्रेलिया जाने और परीक्षा में शामिल होने के लिए मांगी गई छुट्टी की अर्जी भी निरस्त कर दी गई।

शीतल रानी ने इसके बाद हाईकोर्ट का रुख किया। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार की इस पूर्ण पाबंदी के औचित्य पर सवाल उठाया और इसे सरकार की ओर से बताए गए उद्देश्यों की तुलना में असंतुलित करार दिया।

हाईकोर्ट ने पूरा आदेश खारिज किया

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के कर्मचारियों के विदेश जाने पर लगाए गए इस पूर्ण प्रतिबंध को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने इसे मनमाना बताते हुए संवैधानिक अधिकारों के हनन से जोड़ा।

हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी को अपनी परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की तुरंत अनुमति दी जाए।

अदालत की टिप्पणी और आदेश के बाद शीतल रानी के लिए ऑस्ट्रेलिया जाकर पेशेवर कोर्स और रजिस्ट्रेशन परीक्षा में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।

सरकार के तर्क पर भी अदालत ने उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर सवाल उठाया कि किसी सरकारी कर्मचारी को अपने पेशेवर कौशल को बढ़ाने के लिए विदेश जाने से रोकने का सरकार के ईंधन बचाने के लक्ष्य से क्या संबंध है।

अदालत ने माना कि सरकार की ओर से बताए गए उद्देश्य और विदेश यात्रा पर लगाई गई पूरी पाबंदी के बीच संतुलन नहीं दिखाई देता। इसी संदर्भ में हाईकोर्ट ने सरकार की कार्रवाई की तुलना अखरोट तोड़ने के लिए भारी हथौड़े का इस्तेमाल करने से की।

इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश ने सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर लागू की गई उस नीति को सीधे चुनौती दी है, जिसमें गंभीर मेडिकल इलाज के अलावा अन्य मामलों में विदेश यात्रा पर रोक लगाई गई थी।