मुख्य सचिव और डीजीपी को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भेजा नोटिस, आईपीएस वाई पूरन कुमार मामले में लिया स्वत:संज्ञान

आईपीएस वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने स्वत: संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने सात दिन में रिपोर्ट मांगी है, वहीं आईएएस और एचसीएस अधिकारी एकजुट होकर न्याय की मांग कर रहे हैं।

मुख्य सचिव और डीजीपी को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने भेजा नोटिस, आईपीएस वाई पूरन कुमार मामले में लिया स्वत:संज्ञान

राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने आईपीएस वाई पूरन कुमार सुसाइड केस में लिया स्वत: संज्ञान
मुख्य सचिव और चंडीगढ़ डीजीपी को सात दिन में रिपोर्ट देने का नोटिस
आईएएस और एचसीएस अधिकारी एकजुट, आरोपियों को पद से हटाने की मांग


आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार की आत्महत्या के मामले ने अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का भी ध्यान खींच लिया है। आयोग ने इस संवेदनशील मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए चंडीगढ़ के मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस जारी किया है। आयोग ने दोनों वरिष्ठ अधिकारियों से सात दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें एफआईआर की जानकारी, आरोपियों के नाम, धाराएं, गिरफ्तारी की स्थिति और पीड़ित परिवार को दी गई मुआवजा राशि शामिल होनी चाहिए।

आयोग ने यह कार्रवाई भारत के संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए की है। आयोग ने अपने नोटिस में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय में रिपोर्ट प्राप्त नहीं होती, तो वह सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का प्रयोग करते हुए संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से समन जारी कर सकता है।

यह नोटिस हरियाणा कैडर के आईपीएस अधिकारी वाई पूरन कुमार द्वारा आत्महत्या किए जाने के दो दिन बाद जारी किया गया है। वाई पूरन कुमार ने अपने सुसाइड नोट में कथित तौर पर वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मानसिक उत्पीड़न का उल्लेख किया था।

अफसरों में गहरा रोष, न्याय की मांग तेज
वाई पूरन कुमार की आत्महत्या ने न केवल हरियाणा पुलिस महकमे बल्कि आईएएस और एचसीएस समुदाय में भी गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। दलित वर्ग के अधिकारी खुलकर इस केस में न्याय की मांग कर रहे हैं।

हरियाणा सिविल सर्विस (ईबी) ऑफिसर्स एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि इस मामले को अत्यंत गंभीरता और निष्पक्षता से निपटाया जाए। एसोसिएशन ने मांग की है कि आरोपियों के खिलाफ बिना किसी देरी के एफआईआर दर्ज की जाए और जांच को पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए। साथ ही, सभी आरोपी अफसरों को अस्थायी रूप से पद से हटाने की सिफारिश भी की गई है ताकि जांच प्रभावित न हो।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि रोहतक एसपी द्वारा वाई पूरन का नाम लेना यह दर्शाता है कि यह किसी उच्च स्तर के निर्देशों पर की गई कार्रवाई थी। उन्होंने इसे एक “सोची-समझी साजिश” बताया और कहा कि सरकार को जल्द सख्त कदम उठाने चाहिए।

हरियाणा सिविल सर्विस एसोसिएशन के अध्यक्ष एचसीएस शंभू ने कहा कि संगठन के सभी अधिकारी इस दुख की घड़ी में आईएएस अमनीत पी. कुमार (वाई पूरन कुमार की पत्नी) के साथ हैं और न्याय की मांग करते हैं। उन्होंने कहा कि “यह केवल एक अधिकारी की नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनशीलता की परीक्षा है।”

इस बीच, वाई पूरन कुमार के परिवार ने भी अपने घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर कहा है कि जब तक मुख्य आरोपी अफसरों को पद से नहीं हटाया जाता और गिरफ्तार नहीं किया जाता, वे पोस्टमॉर्टम नहीं कराएंगे