पानीपत ESI घोटाले में बड़ा एक्शन, 6 अस्पतालों को डी-पैनल नोटिस 3 कर्मचारी सस्पेंड, 5 सुपरिटेंडेंट पर कार्रवाई शुरू

हरियाणा में ESI अस्पतालों में अनियमितताओं पर बड़ा एक्शन लेते हुए 6 अस्पतालों को डी-पैनल नोटिस, 3 कर्मचारी सस्पेंड और ACB जांच के आदेश दिए गए हैं।

पानीपत ESI घोटाले में बड़ा एक्शन, 6 अस्पतालों को डी-पैनल नोटिस 3 कर्मचारी सस्पेंड, 5 सुपरिटेंडेंट पर कार्रवाई शुरू

पानीपत ESI मामले में 6 निजी अस्पतालों को डी-पैनल करने के नोटिस
3 कर्मचारी सस्पेंड, 5 मेडिकल सुपरिटेंडेंट पर कार्रवाई शुरू
CM नायब सिंह सैनी ने ACB जांच के दिए आदेश


पानीपत। हरियाणा में ESI अस्पतालों में अनियमितताओं को लेकर सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है। पानीपत ESI अस्पताल से जुड़े मामलों में 6 निजी अस्पतालों को डी-पैनल करने के नोटिस जारी किए गए हैं। इसके साथ ही 3 कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है और 5 चिकित्सा अधीक्षकों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि लापरवाही और भ्रष्टाचार करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंपने के निर्देश दिए हैं।

जांच में सामने आया है कि वर्ष 2020-21 से 2023-24 के बीच इन अस्पतालों ने अत्यधिक केस रेफरल किए। साथ ही, रेफरल प्रपत्रों पर चिकित्सकों के हस्ताक्षरों में गड़बड़ी भी पाई गई। इन अनियमितताओं को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं।

इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने राज्य के 133 अन्य पैनल अस्पतालों के रिकॉर्ड की भी जांच के आदेश दिए हैं, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।

सरकार ने स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए भी अहम फैसले लिए हैं। पानीपत ESI अस्पताल की क्षमता को 75 से बढ़ाकर 100 बेड करने और वहां ऑपरेशन थिएटर का विस्तार करने के निर्देश दिए गए हैं। इसी तरह जगाधरी ESI अस्पताल को 80 से 100 बेड और हिसार ESI डिस्पेंसरी को 12 से बढ़ाकर 50 बेड करने का निर्णय लिया गया है।

मुख्यमंत्री ने बावल और बहादुरगढ़ में निर्माणाधीन 100-100 बेड के ESI अस्पतालों का काम जल्द पूरा करने के निर्देश भी दिए हैं, ताकि श्रमिकों और आम नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।

साथ ही, उन्होंने कहा कि ESI हेल्थ केयर में डॉक्टरों और पैरा-मेडिकल स्टाफ की कमी नहीं रहने दी जाएगी और आवश्यकतानुसार भर्ती प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।

सरकार के इस एक्शन से साफ संदेश गया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और भ्रष्टाचार पर अब जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी।