हिमाचल राजनीति: वीरभद्र के नाम से नई पार्टी! प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग से मांगी रोक

वीरभद्र सिंह के नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाने की चर्चाओं के बीच प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग से ऐसे नामों के पंजीकरण पर रोक और सुनवाई का अवसर मांगा।

हिमाचल राजनीति: वीरभद्र के नाम से नई पार्टी! प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग से मांगी रोक

➤ वीरभद्र के नाम से पार्टी गठन की कोशिश पर आपत्ति
➤ ‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस’ और ‘वीर कांग्रेस’ का पत्र में जिक्र
➤ प्रतिभा सिंह ने कहा, निर्णय से पहले उन्हें सुनने का मिले मौका


हिमाचल प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नाम और राजनीतिक विरासत को लेकर सियासी हलचल तेज होती नजर आ रही है। उनकी पत्नी और पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह ने भारत निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया है कि वीरभद्र सिंह के नाम या उनकी विरासत से जुड़े नामों का इस्तेमाल कर किसी नई राजनीतिक पार्टी के गठन या पंजीकरण को मंजूरी न दी जाए। प्रतिभा सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजे पत्र में कहा है कि कुछ लोग ‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस’ और ‘वीर कांग्रेस’ जैसे नामों से राजनीतिक दल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें ऐसे प्रयासों की जानकारी समाचार पत्रों और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली है।

प्रतिभा सिंह ने पत्र में स्पष्ट किया है कि उन्हें किसी व्यक्ति के नई राजनीतिक पार्टी बनाने के अधिकार पर कोई आपत्ति नहीं है। उनकी आपत्ति वीरभद्र सिंह के नाम और साख के इस्तेमाल को लेकर है। उन्होंने कहा है कि न तो उन्होंने और न ही उनके परिवार के किसी सदस्य ने वीरभद्र सिंह के नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक दल बनाने की कोई अनुमति दी है।

‘वीरभद्र’ नाम से पार्टी बनाने की कोशिश पर आपत्ति

प्रतिभा सिंह के अनुसार, कुछ लोग वीरभद्र सिंह के नाम और उनकी राजनीतिक साख का इस्तेमाल कर हिमाचल प्रदेश की जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के सामने ‘राष्ट्रवादी वीरभद्र कांग्रेस’ और ‘वीर कांग्रेस’ नामों का उल्लेख करते हुए इन नामों से नए राजनीतिक दल बनाने की कोशिश पर आपत्ति जताई है।

उन्होंने अपने पत्र में यह भी साफ किया है कि उनकी आपत्ति राजनीतिक दल बनाने के अधिकार को लेकर नहीं, बल्कि दिवंगत वीरभद्र सिंह के नाम और साख के कथित इस्तेमाल को लेकर है। प्रतिभा सिंह ने आयोग से इस मामले में हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।

‘राजा’, ‘बुशहर’ और ‘राजा बुशहर’ नाम भी उठाए

प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग को भेजे पत्र में कुछ अन्य नामों का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि ‘राजा’, ‘बुशहर’ और ‘राजा बुशहर’ जैसे नामों का इस्तेमाल कर भी राजनीतिक दल बनाने के प्रयास उनके संज्ञान में आए हैं।

पत्र में उन्होंने कहा है कि ये नाम वीरभद्र सिंह के नाम और विरासत से सीधे जुड़े हुए हैं। इसी वजह से उन्होंने इन नामों के इस्तेमाल को लेकर भी चुनाव आयोग से हस्तक्षेप का अनुरोध किया है।

2027 के चुनाव से पहले नाम के प्रभाव का हवाला

प्रतिभा सिंह ने अपने पत्र में वर्ष 2027 में होने वाले हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा है कि वीरभद्र सिंह छह बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे और केंद्र सरकार में भी मंत्री रहे। प्रदेश के लोगों के बीच उनका नाम आज भी सम्मान और प्रभाव से जुड़ा हुआ है।

इसी आधार पर प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग से अनुरोध किया है कि वीरभद्र सिंह के नाम या उनसे मिलते-जुलते नाम का इस्तेमाल करने वाले किसी राजनीतिक दल को अभी या भविष्य में पंजीकरण की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, यदि उसमें उनके दिवंगत पति के नाम और साख का दुरुपयोग होता हो।

आयोग से कहा, निर्णय से पहले मुझे सुनें

प्रतिभा सिंह ने चुनाव आयोग से इस मामले में कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे किसी नाम से राजनीतिक दल के गठन या पंजीकरण की अनुमति नहीं दी जाए, जो वीरभद्र सिंह के नाम का दुरुपयोग करता हो।

इसके साथ ही उन्होंने आयोग से यह भी अनुरोध किया है कि यदि भविष्य में ऐसे किसी राजनीतिक दल के पंजीकरण का आवेदन आता है, तो उस पर निर्णय लेने से पहले उन्हें अपनी बात रखने का अवसर दिया जाए।

वीरभद्र की राजनीतिक विरासत पर फिर चर्चा

प्रतिभा सिंह की यह पहल ऐसे समय सामने आई है, जब वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत को लेकर हिमाचल कांग्रेस में भी चर्चा बनी हुई है। हाल में रोहड़ू में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के कार्यक्रम में वीरभद्र सिंह की तस्वीर और उनके योगदान का उल्लेख नहीं होने पर प्रतिभा सिंह ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी।

वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के छह बार मुख्यमंत्री रहे। उनकी लंबे समय तक मजबूत राजनीतिक पहचान रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र से रही। रोहड़ू विधानसभा क्षेत्र के आरक्षित होने के बाद वर्ष 2012 में उन्होंने शिमला ग्रामीण से चुनाव लड़ा था।

वीरभद्र सिंह मूल रूप से शिमला जिले के रामपुर क्षेत्र के सराहन से संबंध रखते थे और पूर्व बुशहर रियासत के राजा थे। उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह वर्तमान में हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।