विराट कोहली बोले- 5 करोड़ लेकर प्रेमानंद महाराज के पास नहीं गया, श्रद्धा-सम्मान की वजह से जाता हूं

विराट कोहली ने प्रेमानंद महाराज के आश्रम जाने के लिए 5 करोड़ लेने के आरोपों को खारिज किया। प्रवक्ता ने इसे झूठा बताया, जबकि फलाहारी महाराज ने पलटवार किया।

विराट कोहली बोले- 5 करोड़ लेकर प्रेमानंद महाराज के पास नहीं गया, श्रद्धा-सम्मान की वजह से जाता हूं

➤ कोहली के प्रवक्ता ने 5 करोड़ लेने के आरोपों को बताया झूठा और निराधार
➤ फलाहारी महाराज ने दावे पर पलटवार करते हुए सबूत होने की बात कही
➤ कोहली- अनुष्का 2023 से 2026 तक 8 बार प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे


क्रिकेटर विराट कोहली ने प्रेमानंद महाराज के आश्रम में दर्शन के लिए 5 करोड़ रुपए लेने के आरोपों को खारिज कर दिया है। कोहली के प्रवक्ता ने बुधवार को बयान जारी कर इन आरोपों को झूठा, निराधार और तथ्यहीन बताया। प्रवक्ता के मुताबिक, विराट कोहली प्रेमानंद महाराज के आश्रम में केवल अपनी गहरी आस्था और श्रद्धा के कारण जाते हैं।

विराट कोहली के प्रवक्ता ने यह बयान सोशल मीडिया पर जारी किया।

 उन्होंने मीडिया से भी अपील की कि किसी भी दावे को प्रसारित करने से पहले तथ्यों की जांच की जाए। यह विवाद तब सामने आया जब श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने दावा किया कि विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा को प्रेमानंद महाराज के आश्रम बुलाने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए गए थे।

तस्वीर 22 जुलाई की है। विराट अनुष्का का हाथ थामकर कीचड़ में चलते नजर आए थे।

विराट कोहली के प्रवक्ता की ओर से जारी बयान में कहा गया कि फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा की ओर से विराट कोहली को लेकर किए गए दावे पूरी तरह गलत और तथ्यहीन हैं। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि कोहली प्रेमानंद महाराज के दर्शन गहरी श्रद्धा और सम्मान की वजह से करते हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि किसी भी दावे को आगे बढ़ाने से पहले उसका तथ्यात्मक सत्यापन किया जाना चाहिए।

विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा वर्ष 2023 से 2026 के बीच प्रेमानंद महाराज के आश्रम में कई बार पहुंचे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, दोनों 8 बार प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे थे। इसी लगातार जुड़ाव को लेकर अब 5 करोड़ रुपए के कथित भुगतान का दावा चर्चा में आया है।

 फलाहारी महाराज ने लगाए थे आरोप

फलाहारी महाराज दिनेश शर्मा ने प्रेमानंद महाराज को एक चिट्ठी लिखकर विराट कोहली के आश्रम आने को लेकर कई दावे किए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि संत की टीम के एक साधु गुट ने विराट कोहली को 5 करोड़ रुपए देकर प्रेमानंद महाराज के दरबार में दर्शन के लिए बुलाया था। उनके मुताबिक, इसका उद्देश्य प्रेमानंद महाराज को सेलिब्रिटी के तौर पर लोकप्रिय बनाना था।

फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज की टीम को लेकर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि टीम में साधु के भेष में भू-माफिया घुस चुके हैं, जो यमुना के डूब क्षेत्र की जमीनें बेच रहे हैं। उन्होंने बच्चों की किडनी चोरी जैसे गंभीर अपराधों में शामिल होने के आरोप भी लगाए। हालांकि, ये सभी दावे फलाहारी महाराज की ओर से लगाए गए आरोप हैं।

फलाहारी महाराज ने प्रेमानंद महाराज से गोवर्धन आने और मामले की CBI जांच की मांग करने की अपील भी की थी। उन्होंने कहा था कि महाराज वहां सुरक्षित नहीं हैं और सरकार को उन्हें जेड प्लस सुरक्षा देनी चाहिए।

➤ कोहली के बयान पर फलाहारी महाराज का पलटवार

विराट कोहली के प्रवक्ता के बयान के बाद फलाहारी महाराज ने अपने दावे को दोहराते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि शुरुआत में न तो महाराज जी विराट कोहली को जानते थे और न ही विराट कोहली महाराज जी को जानते थे। उनके अनुसार, बीच के लोगों यानी PR कंपनी और प्रॉपर्टी ग्रुप से जुड़े लोगों ने विराट कोहली को प्रेमानंद महाराज के पास लाया और महाराज की लोकप्रियता बढ़ाने के लिए 5 करोड़ रुपए दिए।

फलाहारी महाराज ने दावा किया कि इस कथित लेन-देन से जुड़े सबूत मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि विराट कोहली को अपनी कंपनी के अकाउंट्स की जांच करवानी चाहिए और PR कंपनी से जुड़े महाराज जी के सेवक के अकाउंट की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि अकाउंट की जांच से यह स्पष्ट हो जाएगा कि पैसों का लेन-देन हुआ था या नहीं।

फलाहारी महाराज ने यह भी दावा किया कि बाद में जब विराट कोहली दोबारा आश्रम पहुंचे तो उनके मन में भक्ति जागी और वह महाराज के भक्त और सेवक बन गए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद विराट कोहली ने आश्रम में पहले से कई गुना ज्यादा धन लगाया और बड़े-बड़े आश्रमों के निर्माण में भी उनका पैसा लगा है।

वहीं, विराट कोहली के प्रवक्ता ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज किया है। दोनों पक्षों के बयानों के बाद 5 करोड़ रुपए से जुड़े दावे को लेकर विवाद बढ़ गया है। फिलहाल कोहली पक्ष का स्पष्ट कहना है कि उनके आश्रम जाने के पीछे किसी आर्थिक भुगतान की वजह नहीं, बल्कि प्रेमानंद महाराज के प्रति उनकी गहरी आस्था और श्रद्धा है।