हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अनुबंध सेवा से वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और पेंशन लाभ का रास्ता साफ
हिमाचल हाईकोर्ट ने 2024 का सरकारी कर्मचारी अधिनियम रद्द किया। अनुबंध सेवा से वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और पेंशन लाभ के दावों पर राहत का रास्ता खुला।
हाईकोर्ट ने हिमाचल के सरकारी कर्मचारियों की अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और वेतन वृद्धि से जोड़ने का रास्ता साफ किया
➤ हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी अधिनियम, 2024 को हाईकोर्ट ने असंवैधानिक करार देकर रद्द किया
➤ सरकार को पात्र कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा कर तीन महीने में देय लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश
हिमाचल प्रदेश के हजारों सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों से जुड़े मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 को असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अनुबंध आधार पर नियुक्त होकर बाद में नियमित हुए कर्मचारियों के पुराने सेवा काल से जुड़े विभिन्न लाभों पर लगी वैधानिक रोक हट गई है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पात्र मामलों में नियमितीकरण से पहले की अनुबंध सेवा को सेवा लाभों के लिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत के फैसले में अनुबंध सेवा के आधार पर वरिष्ठता, वार्षिक वेतन वृद्धि और पेंशन/सेवानिवृत्ति लाभ से जुड़े दावों पर पहले से तय न्यायिक सिद्धांतों को लागू करने का रास्ता साफ किया गया है। हालांकि, यह लाभ नियुक्ति और नियमितीकरण की परिस्थितियों तथा संबंधित कर्मचारी के मामले में लागू न्यायिक सिद्धांतों के आधार पर तय होंगे।
2024 का अधिनियम हाईकोर्ट ने किया रद्द
हाईकोर्ट के सामने मुख्य विवाद हिमाचल प्रदेश भर्ती एवं सरकारी कर्मचारियों की सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 की संवैधानिक वैधता से जुड़ा था। अदालत ने 25 अप्रैल 2026 के फैसले में इस अधिनियम को रद्द करते हुए इसके आधार पर की गई परिणामी कार्रवाइयों को भी अवैध और असंवैधानिक माना। अदालत ने कहा कि अधिनियम के आधार पर कर्मचारियों को लाभ से वंचित करने या पहले दिए गए लाभों की वापसी जैसी कार्रवाई भी कायम नहीं रह सकती।
अदालत ने राज्य और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि अधिनियम के आधार पर प्रभावित कर्मचारियों के मामलों पर दोबारा विचार किया जाए और अदालत के पहले से तय सिद्धांतों के अनुसार पात्र कर्मचारियों को लाभ दिया जाए। फैसले में सक्षम अधिकारियों को आवश्यक आदेश जारी करने के लिए तीन महीने की समयसीमा दी गई है।
किन कर्मचारियों को मिल सकता है लाभ?
हाईकोर्ट के फैसलों में अनुबंध सेवा के लाभ के लिए नियुक्ति की प्रकृति और बाद में हुई नियमित नियुक्ति की परिस्थितियों को महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसे मामलों में जहां कर्मचारी की अनुबंध नियुक्ति के बाद बिना किसी अंतराल के उसी पद पर नियमितीकरण हुआ है, अदालत ने अनुबंध सेवा को पेंशन और वार्षिक वेतन वृद्धि जैसे सेवा लाभों के लिए गिने जाने की बात कही है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी अनुबंध नियुक्तियां एक जैसी नहीं होतीं। यदि नियुक्ति निर्धारित भर्ती प्रक्रिया के अनुरूप हुई है और बाद में कर्मचारी की नियमित सेवा उसी पद पर बिना रुकावट जारी रहती है, तो ऐसे मामलों में अनुबंध अवधि के सेवा लाभों पर अलग-अलग मामलों में लागू न्यायिक सिद्धांतों के अनुसार विचार किया जाएगा। वहीं कुछ श्रेणियों में वरिष्ठता का लाभ परिस्थितियों के आधार पर अलग हो सकता है।
पेंशन और वार्षिक वेतन वृद्धि को लेकर पहले भी आ चुके हैं फैसले
अनुबंध सेवा को पेंशन और वार्षिक वेतन वृद्धि के लिए गिने जाने का मुद्दा हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के सामने पहले भी आ चुका है। अदालत ने अपने विभिन्न फैसलों में कहा है कि नियमितीकरण के बाद पात्र कर्मचारियों की अनुबंध सेवा को पेंशन संबंधी लाभों के लिए गिना जा सकता है। Sheela Devi मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से SLP खारिज होने के बाद अनुबंध सेवा को पेंशन के लिए गिने जाने से जुड़ा सिद्धांत अंतिम रूप ले चुका है।
बाद के मामलों में हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जब अनुबंध सेवा को पेंशन लाभ के लिए सेवा अवधि में शामिल किया जाता है तो संबंधित परिस्थितियों में उस अवधि की वार्षिक वेतन वृद्धि को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। हालांकि, अनुबंध अवधि की वेतन वृद्धि के वास्तविक बकाये और उसके भुगतान का सवाल संबंधित मामले और लागू आदेशों के आधार पर तय होगा।
कर्मचारियों को तीन महीने में राहत देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को अधिनियम के आधार पर प्रभावित कर्मचारियों के मामलों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं। अदालत के अनुसार, जहां न्यायालय के फैसलों के आधार पर कर्मचारी किसी लाभ के हकदार हैं, वहां उन लाभों को लागू किया जाना चाहिए।
फैसले में संबंधित अधिकारियों को तीन महीने के भीतर आवश्यक कार्रवाई पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत पात्र कर्मचारियों के मामलों में सेवा लाभों से जुड़े आदेश जारी करने और देय वित्तीय लाभों को सुनिश्चित करने की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
यदि निर्धारित समय में अदालत के निर्देशों के अनुरूप कार्रवाई नहीं की जाती है तो संबंधित पक्षों पर आदेश के अनुसार अतिरिक्त वित्तीय दायित्व भी आ सकता है। इस फैसले से उन कर्मचारियों के लिए रास्ता खुला है जो लंबे समय से अपनी अनुबंध सेवा को नियमित सेवा के साथ जोड़कर सेवा लाभ देने की मांग कर रहे थे।
हजारों कर्मचारियों के लिए अहम माना जा रहा फैसला
हाईकोर्ट के इस फैसले का असर उन सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों पर पड़ सकता है जिनकी अनुबंध सेवा के बाद नियमित नियुक्ति या नियमितीकरण हुआ और जिनके सेवा लाभों को 2024 के अधिनियम के आधार पर रोका गया था। अब संबंधित विभागों को प्रत्येक पात्र मामले की परिस्थितियों और अदालत द्वारा तय सिद्धांतों के आधार पर कार्रवाई करनी होगी।
इस फैसले के बाद कर्मचारियों की अनुबंध अवधि को वरिष्ठता, वार्षिक वेतन वृद्धि और पेंशन जैसे सेवा लाभों से जोड़ने को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद एक महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। हालांकि, अंतिम लाभ प्रत्येक कर्मचारी की नियुक्ति, नियमितीकरण और लागू न्यायिक आदेशों के आधार पर तय होंगे।
Akhil Mahajan