पानीपत के रिपक कंसल SCBA के कोषाध्यक्ष चुने, 61 वोटों से दर्ज की शानदार जीत

पानीपत के सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता रिपक कंसल SCBA कोषाध्यक्ष चुने गए। 61 वोटों से जीत के बाद CJI ने बधाई दी, VIP कल्चर के खिलाफ आवाज उठाई थी।

पानीपत के रिपक कंसल SCBA के कोषाध्यक्ष चुने, 61 वोटों से दर्ज की शानदार जीत

रिपक कंसल ने SCBA चुनाव में 61 वोटों से दर्ज की जीत
CJI ने बधाई देकर सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं दीं
VIP कल्चर के खिलाफ आवाज उठाकर देशभर में चर्चा में आए थे कंसल

पानीपत। पानीपत के मूल निवासी और सुप्रीम कोर्ट के सीनियर अधिवक्ता रिपक कंसल ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के चुनाव 2026-2027 में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने कड़े मुकाबले में अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 61 मतों के अंतर से हराकर कोषाध्यक्ष का पद हासिल किया। उनकी इस जीत से पानीपत के साथ-साथ दिल्ली के विधिक गलियारों में भी खुशी का माहौल है।

रिपक कंसल की जीत पर सुप्रीम कोर्ट में आयोजित गरिमामय कार्यक्रम के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने उन्हें बधाई दी। CJI ने उनके सफल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं भी प्रेषित कीं। SCBA के चुनाव में मिली यह जीत उनके लंबे कानूनी सफर और अधिवक्ताओं के बीच उनकी सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।

VIP कल्चर के खिलाफ उठाई थी आवाज

रिपक कंसल उस समय देशभर की सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बड़े और प्रभावशाली लोगों के मुकदमों को मिलने वाली प्राथमिकता और आम गरीबों के केसों की अनदेखी के खिलाफ जोरदार तरीके से आवाज उठाई थी। उन्होंने इस मुद्दे को मजबूती से उठाते हुए आम लोगों को न्याय मिलने में किसी तरह का भेदभाव नहीं होने की बात रखी थी।

इस मामले पर कोर्ट द्वारा उन पर 100 रुपए का सांकेतिक जुर्माना लगाया गया था। इसके विरोध और रिपक कंसल के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के साथी अधिवक्ताओं ने एकजुटता दिखाई। अधिवक्ताओं ने एक-एक कर 50-50 पैसे के सिक्के एकत्र किए और कोर्ट में जुर्माना भरकर रिपक कंसल के प्रति अपनी अटूट एकजुटता का संदेश दिया था।

यह मामला उस समय देशभर की मीडिया और सोशल मीडिया पर काफी चर्चित रहा था। रिपक कंसल की ओर से उठाए गए इस मुद्दे ने सुप्रीम कोर्ट में आम लोगों और प्रभावशाली लोगों के मुकदमों के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया था।

पानीपत बार से की थी वकालत की शुरुआत

रिपक कंसल का परिवार जनसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में काफी सक्रिय रहा है। उनकी पत्नी गीता रानी पानीपत के वार्ड नंबर 17 से नगर पार्षद रह चुकी हैं। उनकी सुपुत्री अंशिका कंसल चार्टर्ड अकाउंटेंसी (CA) के चौथे वर्ष की छात्रा हैं। वहीं उनके सुपुत्र आदी कंसल बीटेक के तीसरे वर्ष के छात्र हैं।

रिपक कंसल ने अपनी वकालत की शुरुआत जिला बार एसोसिएशन पानीपत से की थी। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता यशपाल सिंह अग्रवाल के मार्गदर्शन में कानूनी क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद वे दिल्ली स्थानांतरित हो गए और सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने लगे।

वर्तमान में वे सुप्रीम कोर्ट परिसर में मूर्तिहंस लॉ फर्म चला रहे हैं। वे इससे पहले वर्ष 2022-23 में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। SCBA में पहले जिम्मेदारी संभालने के बाद अब कोषाध्यक्ष के पद पर मिली जीत उनके कानूनी और संगठनात्मक सफर में एक और महत्वपूर्ण पड़ाव है।

ऐतिहासिक PIL के लिए जाने जाते हैं कंसल

रिपक कंसल कई महत्वपूर्ण जनहित याचिकाओं (PIL) के लिए भी जाने जाते हैं। कोविड महामारी के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवारों को वित्तीय सहायता दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई लड़ी। इस पहल की राष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई।

इसी तरह वन नेशन वन राशन कार्ड के मामले में भी उनकी अहम भूमिका रही। उन्होंने प्रवासी मजदूरों को देश में कहीं भी राशन की सुविधा दिलाने के मुद्दे को मजबूती से उठाया। इसके अलावा देश में सस्ती जेनेरिक दवाओं की उपलब्धता और थैलेसीमिया पीड़ितों के इलाज के लिए राष्ट्रीय नीति बनवाने के लिए भी उन्होंने कानूनी पैरवी की।

रिपक कंसल के इन प्रयासों में कोविड मुआवजा, वन नेशन वन राशन कार्ड, थैलेसीमिया नीति और जन औषधि केंद्र जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे शामिल रहे हैं। इन मामलों में उनकी कानूनी सक्रियता ने उन्हें जनहित से जुड़े मुद्दों पर काम करने वाले अधिवक्ता के तौर पर पहचान दिलाई।

SCBA चुनाव में कोषाध्यक्ष चुने जाने के बाद पानीपत और दिल्ली के विधिक गलियारों में खुशी की लहर है। पानीपत बार से चुनाव अधिकारी एवं सीनियर अधिवक्ता करन सिंह पानू सहित तमाम अधिवक्ताओं ने रिपक कंसल को उनकी जीत पर बधाई दी है।