आर्मेनिया में करनाल के युवक की संदिग्ध मौत, बेड पर मिला शव; परिवार ने लगाई बेटे का पार्थिव शरीर भारत लाने की गुहार

करनाल के बस्तली गांव के 26 वर्षीय राजीव की आर्मेनिया में संदिग्ध मौत हुई। परिवार ने सरकार से पार्थिव शरीर भारत लाने में मदद की गुहार लगाई।

आर्मेनिया में करनाल के युवक की संदिग्ध मौत, बेड पर मिला शव; परिवार ने लगाई बेटे का पार्थिव शरीर भारत लाने की गुहार

➤ करनाल के बस्तली गांव के 26 वर्षीय राजीव की आर्मेनिया में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत

➤ काम से लौटे दोस्त ने बेड पर पड़ा देखा, पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मृत घोषित किया

➤ कर्ज लेकर विदेश भेजा था बेटा, मां बोलीं- कुछ नहीं चाहिए, बस आखिरी बार चेहरा दिखा दो


करनाल के बस्तली गांव के रहने वाले 26 वर्षीय राजीव की आर्मेनिया में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। युवक की मौत की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है। बेटे की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। मां कमलेश का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार अब सरकार और प्रशासन से राजीव का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाने की गुहार लगा रहा है, ताकि वह बेटे को आखिरी बार देख सके।

राजीव पिछले कुछ वर्षों से आर्मेनिया में रहकर काम कर रहा था। परिवार के मुताबिक, वह रोजाना घरवालों से फोन पर बात करता था और अपने परिवार के संपर्क में लगातार रहता था। दिन में भी परिवार से उसकी बातचीत हुई थी। ऐसे में अचानक उसकी मौत की खबर ने सभी को सदमे में डाल दिया।

काम से लौटे दोस्त ने बेड पर पड़ा देखा

राजीव के भाई अभिषेक ने बताया कि आर्मेनिया में उसके साथ रहने वाले रूममेट ने परिवार को फोन कर मौत की जानकारी दी। अभिषेक के मुताबिक, काम खत्म करने के बाद राजीव का दोस्त कमरे पर पहुंचा तो उसका भाई बेड पर लेटा हुआ था।

कुछ समय बाद दोस्त ने राजीव को हिलाकर देखा, लेकिन उसकी सांस नहीं चल रही थी। इसके बाद घटना की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और राजीव को मृत घोषित कर दिया।

परिवार के मुताबिक, अभी तक राजीव की मौत के कारणों का पता नहीं चल पाया है। अचानक हुई मौत को लेकर परिजन भी असमंजस में हैं।

परिवार से रोज बात करता था राजीव

अभिषेक ने बताया कि राजीव बिल्कुल खुश था और परिवार से लगातार संपर्क में रहता था। वह रोजाना घरवालों से फोन पर बात करता था। घर में बन रहे मकान के काम की जानकारी भी लेता रहता था।

राजीव अपने छोटे भाई को निर्माणाधीन मकान की तस्वीरें भी रोज भेजता था। परिवार ने कुछ समय पहले ही मकान बनाने का काम शुरू किया था। विदेश में काम करके राजीव परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर करने का सपना देख रहा था।

लेकिन बेटे की अचानक मौत से परिवार के सारे सपने टूट गए हैं।

कर्ज लेकर बेटे को भेजा था आर्मेनिया

अभिषेक के अनुसार, परिवार ने कर्ज लेकर राजीव को आर्मेनिया भेजा था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में काम करने के बाद राजीव आर्थिक स्थिति सुधारने में मदद करेगा।

राजीव वर्ष 2022 में काम की तलाश में आर्मेनिया गया था। वह परिवार के लिए कमाने और घर की स्थिति बेहतर करने की कोशिश कर रहा था।

अभिषेक ने बताया कि उनके पिता की भी मौत हो चुकी है। परिवार में अब सिर्फ दो भाई हैं। राजीव छोटा बेटा था, जबकि अभिषेक बड़ा है।

मकान बनाने का सपना भी अधूरा रह गया

परिवार ने राजीव की कमाई से बेहतर भविष्य की उम्मीद लगा रखी थी। कुछ समय पहले घर बनाने का काम शुरू किया गया था। राजीव भी मकान के निर्माण को लेकर लगातार जानकारी लेता रहता था।

वह अपने छोटे भाई को मकान के काम की फोटो भेजता था। परिवार को उम्मीद थी कि विदेश में काम करके वह घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करेगा और निर्माणाधीन मकान को पूरा कराने में मदद करेगा।

राजीव की मौत के बाद अब परिवार के सामने बेटे को खोने का दुख तो है ही, साथ ही उसका पार्थिव शरीर भारत लाने की चिंता भी खड़ी हो गई है।

मां बोलीं- कुछ नहीं चाहिए, बस बेटे का चेहरा दिखा दो

राजीव की मां कमलेश ने रोते हुए सरकार और प्रशासन से मदद की अपील की है। उन्होंने कहा कि बेटे को उन्होंने कर्ज लेकर विदेश भेजा था, ताकि परिवार की आर्थिक स्थिति सुधर सके।

कमलेश के मुताबिक, राजीव रोज फोन करता था। लेकिन घटना से पहले जब उन्होंने बार-बार फोन किया तो उससे बात नहीं हो सकी। इसके बाद बेटे की मौत की खबर मिली तो परिवार पूरी तरह टूट गया।

मां का कहना है कि उन्हें अब किसी चीज की जरूरत नहीं है। उनकी सिर्फ एक इच्छा है कि बेटे का पार्थिव शरीर जल्द भारत लाया जाए, ताकि वह उसे आखिरी बार देख सकें।

बोलीं- ऐसा दिन देखूंगी, कभी सोचा नहीं था

कमलेश ने कहा कि उन्होंने जिंदगी में कभी नहीं सोचा था कि उन्हें ऐसा दिन देखना पड़ेगा। जिस बेटे को बेहतर भविष्य की उम्मीद में विदेश भेजा था, अब उसकी मौत की खबर सामने है।

परिवार की मांग है कि सरकार और प्रशासन इस मामले में मदद करें और राजीव का पार्थिव शरीर आर्मेनिया से भारत लाने की प्रक्रिया में सहयोग करें।

परिजन चाहते हैं कि बेटे का शव जल्द से जल्द गांव पहुंचे, ताकि उसका अंतिम संस्कार किया जा सके और मां अपने बेटे को आखिरी बार देख सके।