PIET संस्कृति किडो स्कूल में SHO किरण का बच्चों से संवाद, पुलिस के प्रति बढ़ाया विश्वास

PIET संस्कृति किडो स्कूल में SHO किरण ने बच्चों से संवाद कर पुलिस, सुरक्षा और आपात स्थिति में सहायता लेने के बारे में जागरूक किया। महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए बच्चों को पुलिस के प्रति विश्वास रखने की सीख दी।

PIET संस्कृति किडो स्कूल में SHO किरण का बच्चों से संवाद, पुलिस के प्रति बढ़ाया विश्वास

SHO किरण ने बच्चों को समझाया- पुलिस से डरें नहीं, जरूरत पड़ने पर मदद लें
महिलाओं की सुरक्षा को बताया पुलिस की प्राथमिकता, संदिग्ध स्थिति में मदद लेने की दी सीख
चॉकलेट बांटकर बच्चों से किया संवाद, प्रिंसिपल जैस्मीन गुलाटी ने स्मृति चिह्न देकर किया सम्मान


पानीपत। पुलिस की वर्दी देखकर अक्सर छोटे बच्चों के मन में डर या झिझक पैदा हो जाती है, लेकिन PIET संस्कृति किडो स्कूल में माहौल कुछ अलग ही नजर आया। यहां बच्चों से बातचीत करने पहुंचीं SHO किरण ने पुलिस को डर का नहीं, बल्कि मदद और सुरक्षा का साथी बताते हुए बच्चों के साथ बेहद सहज अंदाज में संवाद किया। उन्होंने बच्चों को समझाया कि पुलिस का काम केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि जरूरत के समय लोगों की सहायता करना भी है।

विशेष संवाद कार्यक्रम के दौरान SHO किरण ने बच्चों के साथ काफी समय बिताया और उनकी बातों को ध्यान से सुना। उन्होंने बच्चों को सरल भाषा में बताया कि अगर कभी उन्हें किसी तरह की परेशानी, डर या असुरक्षित स्थिति का सामना करना पड़े तो घबराने के बजाय किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को बताएं और जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लें।

उन्होंने बच्चों के साथ पुलिस का मूल संदेश “सेवा, सुरक्षा और सहयोग” भी साझा किया। उनका कहना था कि समाज में सुरक्षा का माहौल तभी मजबूत हो सकता है, जब पुलिस और आम लोगों के बीच भरोसे और सहयोग का रिश्ता हो।

बच्चों ने भी बेझिझक पूछे पुलिस से जुड़े सवाल

कार्यक्रम केवल पुलिस अधिकारी के संबोधन तक सीमित नहीं रहा। बच्चों ने भी पूरे उत्साह के साथ SHO किरण से पुलिस और सुरक्षा से जुड़े सवाल पूछे। बच्चों की जिज्ञासा को देखते हुए उन्होंने हर सवाल का जवाब बेहद सरल और सहज भाषा में दिया।

इस दौरान बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि किसी परेशानी के समय चुप रहने या डरने के बजाय सही व्यक्ति तक अपनी बात पहुंचाना जरूरी है। बच्चों के लिए यह संवाद इसलिए भी खास रहा क्योंकि उन्हें पुलिस अधिकारी से सीधे बातचीत करने और अपनी जिज्ञासाएं सामने रखने का अवसर मिला।

महिलाओं की सुरक्षा को बताया प्राथमिकता

संवाद के दौरान महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी SHO किरण ने पुलिस की प्राथमिकता स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस पूरी तरह सजग और तत्पर है।

उन्होंने बच्चों को यह भी समझाया कि अपने आसपास अगर कोई संदिग्ध या असुरक्षित स्थिति दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में तुरंत किसी विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को जानकारी देने और आवश्यकता पड़ने पर पुलिस की सहायता लेने के लिए उन्होंने बच्चों को प्रेरित किया।

चॉकलेट मिली तो बच्चों के चेहरों पर दिखी खुशी

कार्यक्रम का सबसे आत्मीय हिस्सा वह रहा, जब SHO किरण ने बच्चों के साथ खुलकर बातचीत की और उन्हें प्यार से चॉकलेट भी वितरित कीं। पुलिस अधिकारी को अपने बीच इस तरह सहज देखकर बच्चे भी काफी उत्साहित नजर आए।

इस मुलाकात ने पुलिस और बच्चों के बीच औपचारिक दूरी को कम करने का काम किया। बच्चों के लिए यह सिर्फ एक जागरूकता कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि पुलिस अधिकारी के साथ सीधे बातचीत करने का यादगार अनुभव भी बन गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को पुलिस की कार्यप्रणाली से परिचित कराने के साथ-साथ उनके मन में पुलिस के प्रति विश्वास, सम्मान और सकारात्मक सोच विकसित करना था।

प्रिंसिपल जैस्मीन गुलाटी ने SHO किरण को किया सम्मानित

कार्यक्रम के समापन पर PIET संस्कृति किडो स्कूल की प्रिंसिपल जैस्मीन गुलाटी ने SHO किरण को स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने बच्चों के बीच सुरक्षा और जागरूकता को लेकर आयोजित इस पहल के लिए SHO किरण का आभार जताया।

स्कूल प्रबंधन की ओर से कहा गया कि बच्चों को कम उम्र से ही सुरक्षा के प्रति जागरूक करना और उनके मन से पुलिस को लेकर अनावश्यक डर दूर करना महत्वपूर्ण है। ऐसे संवाद बच्चों को यह समझने में मदद करते हैं कि जरूरत के समय पुलिस से सहायता लेना उनके अधिकार और सुरक्षा का हिस्सा है।

“सेवा, सुरक्षा और सहयोग” का संदेश लेकर खत्म हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम के दौरान स्कूल के स्टाफ, बच्चे और अन्य सदस्य मौजूद रहे। बच्चों और SHO किरण के बीच हुए इस आत्मीय संवाद ने “सेवा, सुरक्षा और सहयोग” के संदेश को और मजबूत किया।

PIET संस्कृति किडो स्कूल में आयोजित यह कार्यक्रम बच्चों के लिए एक अलग अनुभव लेकर आया, जहां पुलिस की वर्दी से जुड़ी औपचारिकता की जगह बातचीत, सवाल-जवाब और अपनापन दिखाई दिया। बच्चों को सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ाने की दिशा में यह संवाद महत्वपूर्ण पहल के रूप में सामने आया।