पानीपत सचिवालय के बाहर रातभर डटे किसान, मुआवजे की नीति पर नाराजगी; आज शाम 5 बजे होगा बड़ा फैसला
पानीपत सचिवालय के बाहर हाईटेंशन बिजली लाइनों के उचित मुआवजे की मांग को लेकर किसान रातभर धरने पर डटे रहे। शाम पांच बजे आंदोलन की अगली रणनीति तय होगी।
➤ हाईटेंशन बिजली लाइनों के उचित मुआवजे की मांग को लेकर सचिवालय के बाहर डटे किसान
➤ ठंड में खुले आसमान के नीचे गुजारी रात, धरनास्थल पर ही लंगर और बैठक
➤ शाम 5 बजे बैठक में तय होगा धरना जारी रखना है या आंदोलन की अगली रणनीति बनेगी
पानीपत। हाईटेंशन बिजली लाइनों के लिए उचित मुआवजे की मांग को लेकर पानीपत में किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। मंगलवार सुबह से सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे किसानों ने दिनभर प्रदर्शन करने के बाद रात भी खुले आसमान के नीचे गुजारी। ठंड के बीच कुछ किसान दरी और गद्दे बिछाकर सोए, जबकि कई किसान रातभर धरनास्थल पर बैठे रहे और आपस में चर्चा करते हुए आंदोलन की आगामी रणनीति पर विचार करते रहे। किसानों ने सचिवालय परिसर के बाहर ही लंगर खाया और रात के समय हुक्का गुड़गुड़ाते हुए अपनी मांगों को लेकर चर्चा की। किसानों ने बुधवार को भी शाम 5 बजे तक धरना जारी रखने का फैसला किया है। इसके बाद बैठक में तय किया जाएगा कि सचिवालय के बाहर धरना आगे भी जारी रखा जाए या आंदोलन को दूसरे तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ ने कहा कि हाईटेंशन बिजली लाइनों के लिए उचित मुआवजे की मांग को लेकर प्रदेशभर के किसान लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं। उनके अनुसार सरकार की ओर से नीति में बदलाव किए जाने के बावजूद किसानों को अब तक उनकी मांग के मुताबिक उचित मुआवजा नहीं मिल पाया है। इसी मुद्दे को लेकर किसान पानीपत सचिवालय पहुंचे हैं और उन्होंने साफ किया है कि समस्या का समाधान होने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
2022 से उठ रहा मुआवजे का मुद्दा
अभिमन्यु कुहाड़ के अनुसार हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे का मुद्दा वर्ष 2022 से प्रदेशभर में उठाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में प्रदेश सरकार ने इस संबंध में कानून बनाया था, लेकिन किसानों के अनुसार उसमें कुछ कमियां रह गई थीं। इसके बाद कानून में संशोधन किया गया। किसान नेता के मुताबिक 30 जनवरी 2026 को सरकार ने फिर कानून बनाया, लेकिन करीब तीन महीने बाद इसमें बदलाव कर दिया गया। किसानों की नाराजगी इसी नीति में हुए बदलाव को लेकर है।
किसानों का कहना है कि नए बदलाव में जमीन की बाजार कीमत के आधार पर मुआवजा तय करने के लिए लॉटरी सिस्टम लागू कर दिया गया है। किसान इसे अपने हितों के खिलाफ बता रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर किसान पहले भी धरने-प्रदर्शन कर चुके हैं और बिजली निगम के कार्यालयों का घेराव भी किया जा चुका है।
किसान नेताओं के अनुसार प्रदेश के जींद, सोनीपत, पानीपत, कैथल, हांसी, हिसार और भिवानी में किसानों ने बिजली लाइनों को बिछाने का काम भी रुकवाया है। किसानों का कहना है कि मुआवजे की नीति को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने के कारण प्रभावित किसानों की परेशानी लगातार बनी हुई है।
करीब 10 हजार किसान प्रभावित होने का दावा
किसान नेता अभिमन्यु कुहाड़ ने दावा किया कि प्रदेश में करीब 10 हजार किसान मुआवजे की समस्या से प्रभावित हैं। किसानों की मांग है कि सरकार नीति को स्पष्ट करे और जमीन की बाजार कीमत के आधार पर उचित मुआवजा देने की व्यवस्था लागू करे। किसानों का कहना है कि बिजली लाइनों से प्रभावित होने वाली जमीन और उससे जुड़ी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें उचित राहत मिलनी चाहिए।
केंद्रीय ऊर्जा मंत्री तक मांग पहुंचाने की कोशिश
किसान नेता के अनुसार आंदोलनकारी किसान अपनी मांग केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल तक पहुंचाना चाहते हैं। इसी उद्देश्य से किसान एकजुट होकर सचिवालय पहुंचे हैं। अभिमन्यु कुहाड़ ने बताया कि 3 सितंबर को मनोहर लाल के साथ बैठक हुई थी। इसके तीन दिन बाद केंद्र सरकार की ओर से नई नीति भी लाई गई थी।
किसानों के अनुसार नई नीति आने के बावजूद 21 दिन बाद भी उसका गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ था। किसानों का कहना है कि इससे स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी और उनकी परेशानी बनी रही। इसी वजह से उन्होंने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज किया है।
हाईटेंशन लाइनों के साथ धान का मुद्दा भी उठा
सचिवालय के बाहर धरने में किसानों ने हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे के साथ-साथ पीआर धान की खरीद, उठान और भुगतान का मुद्दा भी उठाया। किसान नेता मनोज ने आरोप लगाया कि पीआर धान के भुगतान में कटौती की जाती है और मंडियों से समय पर धान का उठान नहीं होता।
उन्होंने कहा कि धान का उठान कराने के लिए किसानों को 200 से 300 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। किसानों का कहना है कि फसल बेचने के बाद मंडियों से समय पर उठान नहीं होने के कारण उन्हें अतिरिक्त परेशानी और खर्च का सामना करना पड़ता है।
किसान नेता दिलबाग बिंझौल ने मांग की कि मंडियों से धान का उठान तेजी से कराया जाए और किसानों को उनकी उपज का भुगतान समय पर मिले। उनका कहना है कि फसल बेचने के बाद भी भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है, जिससे किसानों की आर्थिक परेशानियां बढ़ती हैं।
ठंड में भी जारी रहा किसानों का धरना
मंगलवार रात सचिवालय के बाहर किसानों ने खुले आसमान के नीचे ही समय बिताया। कुछ किसान ठंड से बचने के लिए हुक्का गुड़गुड़ाते हुए चर्चा करते रहे, जबकि कुछ किसान ताश खेलते नजर आए। कई किसानों ने दरी और गद्दे बिछाकर रात गुजारी। धरनास्थल पर ही किसानों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई और उन्होंने लंगर खाया।
रातभर चले इस धरने के दौरान किसानों ने अपनी मांगों और आंदोलन की आगे की दिशा पर चर्चा की। किसानों का कहना है कि मुआवजे की नीति और धान से जुड़ी समस्याओं का समाधान होने तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
शाम 5 बजे तय होगी आंदोलन की अगली दिशा
किसानों ने बुधवार को भी सचिवालय के बाहर धरना जारी रखने का निर्णय लिया है। शाम 5 बजे किसानों की बैठक होगी, जिसमें आंदोलन की आगामी रणनीति पर फैसला लिया जाएगा। बैठक में यह तय किया जाएगा कि सचिवालय के बाहर धरना आगे भी जारी रखना है या आंदोलन को दूसरे तरीके से आगे बढ़ाया जाए।
फिलहाल किसानों ने स्पष्ट किया है कि हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे की नीति में बदलाव और पीआर धान की खरीद, उठान तथा भुगतान से जुड़ी समस्याओं को लेकर उनकी मांगें जारी रहेंगी। अब सभी की नजर बुधवार शाम 5 बजे होने वाली बैठक पर है, जिसमें किसान आंदोलन की अगली दिशा तय करेंगे।
Akhil Mahajan