3 लाख की रिश्वत लेते वक्फ बोर्ड के 3 गिरफ्तार, सोनीपत में एंटी करप्शन ब्यूरो की कार्रवाई
सोनीपत वक्फ बोर्ड कार्यालय में एसीबी ने 3 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते एस्टेट ऑफिसर, रेंट क्लर्क और निजी चपरासी को गिरफ्तार किया।
➤ वक्फ बोर्ड कार्यालय में 3 लाख रुपये लेते एस्टेट ऑफिसर, रेंट क्लर्क और निजी चपरासी गिरफ्तार
➤ गोहाना में दुकानों के प्लॉट की लीज और रसीद जारी करने के बदले रकम मांगने का आरोप
➤ एसीबी ने 28 अक्टूबर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज किया मामला
सोनीपत। हरियाणा के सोनीपत में भ्रष्टाचार के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वक्फ बोर्ड कार्यालय में तैनात एस्टेट ऑफिसर, रेंट क्लर्क और निजी तौर पर चपरासी का काम करने वाले व्यक्ति को 3 लाख रुपये की कथित रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गोहाना में दुकानों के प्लॉट की लीज से जुड़ी फाइलों और भुगतान की रसीद जारी करने के बदले शिकायतकर्ता से रकम मांगी गई थी। एसीबी की कार्रवाई के बाद मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में वक्फ बोर्ड कार्यालय, सोनीपत में तैनात एस्टेट ऑफिसर मोहम्मद सलीम, रेंट क्लर्क मोहम्मद ताहिर और निजी व्यक्ति सलीम शामिल हैं। बताया गया है कि तीसरा आरोपी कार्यालय में निजी तौर पर चपरासी का काम करता था। एसीबी ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीनों को 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
गोहाना में दुकानों के प्लॉट की लीज से जुड़ा है मामला
शिकायतकर्ता सतीश निवासी किशन कॉलोनी, गोहाना ने राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को शिकायत दी थी। शिकायत के अनुसार, सतीश और उसके तीन सहयोगियों ने पिछले वर्ष गोहाना में दुकानों के प्लॉट की लीज के लिए हरियाणा वक्फ बोर्ड में आवेदन किया था।
शिकायत में आरोप लगाया गया कि आवेदन प्रक्रिया के दौरान अग्रिम राशि और अन्य भुगतान के नाम पर करीब 3 लाख रुपये लिए गए थे। इनमें 1 लाख रुपये अग्रिम और 2 लाख 2 हजार रुपये अन्य भुगतान के रूप में लिए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ता का आरोप था कि रकम देने के बावजूद उन्हें संबंधित भुगतान की रसीद नहीं दी गई।
फाइलों और रसीद को लेकर सामने आया रिश्वत का आरोप
शिकायत के मुताबिक, करीब एक महीने पहले निजी तौर पर चपरासी का काम करने वाले सलीम ने शिकायतकर्ता को बताया कि उसकी और उसके सहयोगियों की फाइलों में संशोधन कर दिया गया है। इसके बाद उसे 3 लाख रुपये लेकर सोनीपत स्थित वक्फ बोर्ड कार्यालय आने के लिए कहा गया।
शिकायतकर्ता को कथित तौर पर बताया गया कि कार्यालय में तैनात एस्टेट ऑफिसर मोहम्मद सलीम रसीद जारी करेंगे और पट्टा अनुबंध से संबंधित हलफनामा भी दिया जाएगा। जब शिकायतकर्ता ने यह जानना चाहा कि 3 लाख रुपये के बदले कितनी राशि की रसीद जारी होगी, तो शिकायत के अनुसार आरोपी ने इसका स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित कर्मचारियों की आपसी मिलीभगत थी और भुगतान की वास्तविक राशि की तुलना में कम राशि की रसीद जारी किए जाने की बात कही गई थी। इन आरोपों की जांच अब संबंधित एजेंसी की कार्रवाई का हिस्सा है।
शिकायत के बाद एसीबी ने तैयार किया ट्रैप
शिकायत मिलने के बाद राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने मामले में कार्रवाई की योजना बनाई। ब्यूरो की रोहतक इकाई में 28 अक्टूबर 2026 को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत मामला दर्ज किया गया।
इसके बाद निरीक्षक मोहिन्द्र सिंह के नेतृत्व में रेडिंग पार्टी तैयार की गई। कार्रवाई के दौरान वक्फ बोर्ड कार्यालय, सोनीपत में तीनों आरोपियों को कथित तौर पर 3 लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में दो वक्फ बोर्ड कर्मचारी
एसीबी के अनुसार मोहम्मद सलीम निवासी सिविल लाइन कॉलोनी, थाना नूंह और मोहम्मद ताहिर निवासी पटौदी, जिला गुरुग्राम वक्फ बोर्ड कार्यालय, सोनीपत में ग्रुप-सी कर्मचारी हैं। तीसरा आरोपी सलीम निजी व्यक्ति बताया गया है, जो कार्यालय में चपरासी के तौर पर काम कर रहा था।
एसीबी की कार्रवाई के बाद मामले में नियमानुसार आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। मामले में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी।
भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का दावा
राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, हरियाणा के निदेशक डॉ. अर्शिन्दर सिंह चावला, आईपीएस ने कहा कि भ्रष्टाचार में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि ब्यूरो की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ब्यूरो की इस कार्रवाई से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकारी कार्यालयों में काम करवाने के नाम पर रिश्वत मांगने की शिकायतों पर एजेंसी कार्रवाई कर रही है। सोनीपत के इस मामले में अब जांच के दौरान यह स्पष्ट होगा कि कथित रिश्वत की मांग और रकम से जुड़े आरोपों में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं।
Akhil Mahajan