मोबाइल खरीदने वालों के टैक्स से सरकार को मिले 3 लाख करोड़, जानें

भारत में मोबाइल विनिर्माण को मिली पीएलआई योजना से सरकार ने 3.25 लाख करोड़ रुपये कर संग्रह का दावा किया, जबकि मोबाइल उत्पादन और रोजगार में बड़ा इजाफा हुआ।

मोबाइल खरीदने वालों के टैक्स से सरकार को मिले 3 लाख करोड़, जानें

➤ मोबाइल उद्योग को 19,000 करोड़ रुपये का PLI प्रोत्साहन, बदले में 3.25 लाख करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आने का दावा

➤ मोबाइल विनिर्माण में 12 लाख लोगों को रोजगार, देश में बिकने वाले फोन का आयात घटकर सिर्फ 0.02 प्रतिशत

➤ 10 साल में मोबाइल उत्पादन 0.18 लाख करोड़ से बढ़कर 5.5 लाख करोड़ रुपये, अक्टूबर 2028 तक भारतीय स्मार्टफोन का लक्ष्य


नई दिल्ली। आपके हाथ में मौजूद मोबाइल फोन सिर्फ बातचीत, इंटरनेट और मनोरंजन का साधन नहीं रह गया है, बल्कि इसके साथ चुकाया गया टैक्स अब देश की मोबाइल विनिर्माण नीति की सफलता का बड़ा आंकड़ा बनकर सामने आया है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को सोशल मीडिया पर ऐसे आंकड़े साझा किए, जिनके मुताबिक सरकार ने मोबाइल उद्योग को पीएलआई योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया, लेकिन इसके बदले लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर और करीब 3 लाख करोड़ रुपये जीएसटी के रूप में मिले। इस हिसाब से सरकार के मुताबिक कुल 3.25 लाख करोड़ रुपये सरकारी खजाने में आए। यानी सरकार की ओर से दिए गए 19,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन के मुकाबले कर संग्रह की रकम कई गुना अधिक रही।

इस आंकड़े में सबसे बड़ी रकम 3 लाख करोड़ रुपये के जीएसटी की है। यह वह कर है जो मोबाइल फोन समेत वस्तुओं और सेवाओं की खरीद पर लिया जाता है। मोबाइल फोन खरीदने वाले उपभोक्ताओं की ओर से चुकाया गया यह टैक्स सरकार के पक्ष में मोबाइल विनिर्माण को बढ़ावा देने वाली नीति के आर्थिक प्रभाव को बताने वाले प्रमुख आंकड़ों में शामिल किया गया है।

19 हजार करोड़ के प्रोत्साहन के बदले 3.25 लाख करोड़ की वसूली का दावा

अश्विनी वैष्णव ने मोबाइल विनिर्माण से जुड़े आंकड़े साझा करते हुए पीएलआई योजना के तहत दिए गए प्रोत्साहन और उससे जुड़े कर संग्रह को सामने रखा। सरकार के अनुसार मोबाइल उद्योग को योजना के तहत 19,000 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन दिया गया। इसके बदले लाभार्थियों से 25,000 करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर और 3 लाख करोड़ रुपये जीएसटी प्राप्त हुआ।

इस तरह सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार कुल कर संग्रह 3.25 लाख करोड़ रुपये रहा। इन आंकड़ों को सरकार मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में किए गए नीतिगत प्रयासों के आर्थिक असर के तौर पर पेश कर रही है।

हालांकि, साझा किए गए आंकड़े कर, रोजगार, उत्पादन और निर्यात से संबंधित हैं। मोबाइल विनिर्माण में इस्तेमाल होने वाले कलपुर्जों के आयात पर होने वाले खर्च का अलग से ब्योरा इन आंकड़ों में नहीं दिया गया है।

मोबाइल उद्योग में 12 लाख लोगों को रोजगार

मंत्री ने केवल टैक्स संग्रह को ही आधार नहीं बनाया, बल्कि रोजगार के आंकड़े भी साझा किए। उनके अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में करीब 25 लाख लोगों को रोजगार मिला है। इनमें अकेले मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में करीब 12 लाख लोग काम कर रहे हैं।

वैष्णव की यह पोस्ट एक मीडिया ओपिनियन वीडियो के जवाब में आई थी। उस वीडियो में भारत की ओर से सब्सिडी के जरिये इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने की कोशिशों की कुछ कमियों को गिनाया गया था और इसकी तुलना चीन के इकोसिस्टम से की गई थी। जवाब में मंत्री ने अपने आंकड़े सामने रखते हुए अपनी पोस्ट में “Cope harder” भी लिखा।

चीन से तुलना और कलपुर्जों के आयात पर सवाल

जिस वीडियो का मंत्री ने जवाब दिया, उसमें दावा किया गया था कि करदाताओं के पैसे से सब्सिडी पाने वाले तैयार मोबाइल फोन के निर्यात से होने वाली कमाई की तुलना में कलपुर्जों के आयात पर ज्यादा खर्च हो जाता है।

यह सवाल भारत के मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर कलपुर्जों के उत्पादन और पूरी सप्लाई चेन विकसित करने से जुड़ा है। हालांकि, मंत्री की ओर से साझा किए गए आंकड़ों में इस दावे के संदर्भ में कलपुर्जों के आयात पर होने वाले खर्च का अलग आंकड़ा नहीं दिया गया है।

75 प्रतिशत से घटकर 0.02 प्रतिशत हुआ मोबाइल आयात

सरकार की ओर से मार्च में साझा किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक देश में बिकने वाले मोबाइल फोन अब लगभग पूरी तरह घरेलू स्तर पर बनाए जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में घरेलू मांग के मुकाबले मोबाइल फोन का आयात करीब 0.02 प्रतिशत रह गया।

यह आंकड़ा 10 साल पहले की स्थिति से तुलना करने पर बड़ा बदलाव दिखाता है। उस समय घरेलू मांग के मुकाबले मोबाइल फोन का आयात 75 प्रतिशत था। यानी सरकार की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार इस अवधि में भारत की घरेलू मोबाइल विनिर्माण क्षमता में बड़ा विस्तार हुआ है।

भारत ने वित्त वर्ष 2025 में 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का निर्यात भी किया। इससे मोबाइल फोन को घरेलू बाजार तक सीमित रखने के बजाय निर्यात के लिए भी उत्पादन बढ़ने का संकेत मिलता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन छह गुना बढ़ा

मोबाइल फोन के साथ-साथ पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में भी उत्पादन बढ़ने के आंकड़े सरकार ने साझा किए हैं। 2014-15 में इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का उत्पादन करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो बढ़कर 2024-25 में लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।

इस अवधि में मोबाइल फोन उत्पादन में भी बड़ा उछाल दर्ज किया गया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार मोबाइल फोन का उत्पादन 0.18 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये हो गया।

इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के निर्यात में भी इसी अवधि में वृद्धि हुई। 10 साल पहले करीब 0.38 लाख करोड़ रुपये का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात था, जो बढ़कर लगभग 3.3 लाख करोड़ रुपये हो गया। यानी इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का निर्यात करीब आठ गुना बढ़ा है।

अब 62,500 करोड़ रुपये की नई योजना

मोबाइल विनिर्माण को अगले चरण में ले जाने के लिए सरकार ने अब मोबाइल फोन विनिर्माण योजना यानी एमपीएमएस शुरू की है। इसके तहत कुल 62,500 करोड़ रुपये का प्रोत्साहन तय किया गया है।

इस योजना का लक्ष्य ऐसे भारतीय स्मार्टफोन विकसित करना है, जिनका डिजाइन और निर्माण देश में ही हो। सरकार की कोशिश केवल मोबाइल फोन की असेंबली तक सीमित रहने के बजाय देश में डिजाइन और विनिर्माण की पूरी क्षमता विकसित करने की है।

अक्टूबर 2028 तक भारतीय स्मार्टफोन का लक्ष्य

अश्विनी वैष्णव ने भारतीय स्मार्टफोन ब्रांड के लक्ष्य को लेकर अक्टूबर 2028 की समयसीमा तय की है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में सरकार घरेलू मोबाइल कंपनियों और विनिर्माण क्षमता को इस स्तर तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है, जहां भारत में डिजाइन और निर्मित स्मार्टफोन को वैश्विक बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके।

सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़ों में एक तरफ पीएलआई के तहत दिए गए 19,000 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन और उसके मुकाबले 3.25 लाख करोड़ रुपये के कर संग्रह का दावा है, तो दूसरी तरफ मोबाइल उत्पादन, रोजगार, निर्यात और आयात में बदलाव के आंकड़े हैं।

फिलहाल तस्वीर यह है कि भारत में मोबाइल विनिर्माण पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। देश में बिकने वाले मोबाइल फोन के आयात का हिस्सा 75 प्रतिशत से घटकर करीब 0.02 प्रतिशत रह गया है और मोबाइल उत्पादन करीब 5.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। अब सरकार का अगला लक्ष्य केवल मोबाइल बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय डिजाइन वाले स्मार्टफोन को भी बाजार में स्थापित करना है।