MLC चुनाव में कांग्रेस का खाता नहीं खुला, अमित शाह का तंज- ‘बैलेट बॉक्स इस्तीफा दो’
MLC चुनाव में कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन पर अमित शाह ने बैलेट पेपर का हवाला देते हुए तंज कसा और बीजेपी-कांग्रेस के बीच सियासी बहस तेज हो गई।
➤ 28 सीटों के MLC चुनाव में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी
➤ अमित शाह ने बैलेट पेपर चुनाव का हवाला देकर कांग्रेस पर कसा तंज
➤ कर्नाटक में NDA ने चारों सीटें जीतीं, चुनावी नतीजों से गरमाई सियासत
नई दिल्ली। चार राज्यों की 28 विधान परिषद सीटों के चुनाव नतीजों ने कांग्रेस को लेकर बीजेपी को हमला करने का नया मौका दे दिया है। बैलेट पेपर से हुए MLC चुनाव में कांग्रेस के खाते में एक भी सीट नहीं आने पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक तंज कसा। उन्होंने 28 सीटों के चुनाव परिणाम का जिक्र करते हुए पूछा कि कांग्रेस ने कितनी सीटें जीतीं और जवाब में ‘0’ लिखते हुए कहा- “बैलेट बॉक्स इस्तीफा दो।” अमित शाह का यह तंज ऐसे समय आया है, जब चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक बहस लगातार जारी है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुल 28 MLC सीटों के लिए चुनाव हुए थे। इन चुनावों में मतदान बैलेट पेपर के जरिए हुआ। अमित शाह ने इसी तथ्य को अपने राजनीतिक हमले का आधार बनाया और कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल खड़ा किया।
28 सीटों का चुनाव बना सियासी हथियार
MLC चुनाव के नतीजों को बीजेपी ने कांग्रेस के खिलाफ बड़े राजनीतिक मुद्दे के तौर पर उठाया है। खासतौर पर बैलेट पेपर से हुए चुनाव में कांग्रेस के शून्य पर रहने को लेकर बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस की चुनावी रणनीति और उसके लगातार उठाए जाने वाले चुनावी प्रक्रिया संबंधी सवालों पर निशाना साधा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी MLC चुनाव के नतीजों पर कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर तंज कसा था। इसके बाद अमित शाह की टिप्पणी ने इस मुद्दे को और धार दे दी।
कर्नाटक में कांग्रेस को बड़ा झटका
कर्नाटक के चार MLC सीटों पर हुए चुनाव में बीजेपी-जेडीएस गठबंधन ने सभी चार सीटें जीत लीं। इनमें बीजेपी ने तीन और जेडीएस ने एक सीट पर जीत दर्ज की। कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार है, इसलिए इन नतीजों को सत्तारूढ़ दल के लिए राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है।
इन परिणामों का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि बीजेपी-जेडीएस गठबंधन ने बेहतर तालमेल के साथ चुनाव लड़ा और कांग्रेस को चारों सीटों पर पीछे छोड़ दिया।
उत्तर प्रदेश में तस्वीर अलग रही
उत्तर प्रदेश की 11 MLC सीटों के चुनाव में बीजेपी ने कई सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी ने भी कुछ सीटों पर अपना प्रभाव कायम रखा। वाराणसी की शिक्षक सीट समेत कुछ क्षेत्रों में सपा को सफलता मिली।
इससे साफ है कि चारों राज्यों में चुनाव परिणाम एक जैसे नहीं रहे और अलग-अलग राज्यों में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों का भी असर दिखाई दिया।
बिहार में भी कांग्रेस को झटका
बिहार की MLC सीटों के परिणामों में भी कांग्रेस के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण रही। दरभंगा शिक्षक सीट पर जन सुराज के उम्मीदवार सुरेश प्रसाद राय ने कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मौजूदा MLC मदन मोहन झा को हराया। इस जीत के साथ जन सुराज ने विधान परिषद में अपनी पहली सीट हासिल की।
बिहार के नतीजों ने भी कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ाई है, क्योंकि पार्टी को यहां भी अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
अमित शाह के बयान का राजनीतिक संदेश
अमित शाह के “बैलेट बॉक्स इस्तीफा दो” वाले बयान का सीधा राजनीतिक निशाना कांग्रेस पर है। बीजेपी लंबे समय से कांग्रेस के चुनावी दावों और चुनाव प्रक्रिया पर उठाए जाने वाले सवालों को लेकर पलटवार करती रही है।
शाह ने अपने बयान के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि जब चुनाव बैलेट पेपर से हुआ, तब भी कांग्रेस को अपेक्षित सफलता नहीं मिली। इसलिए केवल चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने से पार्टी के प्रदर्शन की जिम्मेदारी खत्म नहीं हो सकती।
हालांकि, MLC चुनाव सामान्य विधानसभा या लोकसभा चुनाव से अलग होते हैं। इनके मतदाता समूह, निर्वाचन क्षेत्र और चुनाव की प्रक्रिया अलग होती है। इसलिए इन नतीजों को सीधे तौर पर किसी बड़े आम चुनाव के जनादेश के रूप में देखना उचित नहीं होगा।
कांग्रेस के सामने अब राजनीतिक चुनौती
इन परिणामों के बाद कांग्रेस के सामने संगठन और चुनावी रणनीति को लेकर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। खासकर कर्नाटक जैसे कांग्रेस शासित राज्य में चारों MLC सीटों पर NDA की जीत पार्टी के लिए गंभीर राजनीतिक संकेत मानी जा रही है।
दूसरी ओर बीजेपी इन नतीजों को कांग्रेस के खिलाफ अपने राजनीतिक अभियान में इस्तेमाल कर रही है। बैलेट पेपर, MLC चुनाव और कांग्रेस का शून्य प्रदर्शन अब राजनीतिक बयानबाजी का नया मुद्दा बन चुका है।
आने वाले दिनों में कांग्रेस इन परिणामों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या बीजेपी के हमले का जवाब चुनावी प्रक्रिया के बजाय संगठनात्मक प्रदर्शन के मुद्दे पर देती है, इस पर भी राजनीतिक नजरें रहेंगी।
Akhil Mahajan