70 हजार रुपये की रिश्वत लेते रजिस्ट्री क्लर्क गिरफ्तार, नायब तहसीलदार का नाम भी आया सामने

पंचकूला की रायपुररानी तहसील में ACB ने 70 हजार रुपये की कथित रिश्वत के मामले में क्लर्क अमित को गिरफ्तार किया। नायब तहसीलदार की भूमिका जांच के दायरे में है।

70 हजार रुपये की रिश्वत लेते रजिस्ट्री क्लर्क गिरफ्तार, नायब तहसीलदार का नाम भी आया सामने

➤ पंचकूला की रायपुररानी तहसील में ACB ने रजिस्ट्री क्लर्क अमित को गिरफ्तार किया

➤ शिकायतकर्ता के अनुसार, 1.20 लाख रुपये में तय हुआ था सौदा, 50 हजार रुपये पहले दिए जा चुके थे

➤ रिश्वत की रकम में नायब तहसीलदार को हिस्सा देने का आरोप, जांच में भूमिका अभी स्पष्ट नहीं


पंचकूला। हरियाणा के पंचकूला जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की टीम ने शुक्रवार को रायपुररानी तहसील में तैनात एक रजिस्ट्री क्लर्क को कथित तौर पर 70 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में गिरफ्तार किया। शिकायत के अनुसार, आरोपी ने एक प्रॉपर्टी डीलर से शोरूम और जमीन की रजिस्ट्री से संबंधित काम करवाने के बदले कुल 1.20 लाख रुपये मांगे थे। इसमें से 50 हजार रुपये पहले ही दिए जा चुके थे, जबकि बाकी 70 हजार रुपये शुक्रवार को दिए जाने थे। शिकायतकर्ता का आरोप है कि क्लर्क ने रकम का हिस्सा नायब तहसीलदार को भी देने की बात कही थी। हालांकि, इस मामले में नायब तहसीलदार की भूमिका को लेकर जांच अभी जारी है और उनकी संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई है।

गिरफ्तार क्लर्क की पहचान अमित के रूप में हुई है, जो सोनीपत का रहने वाला बताया गया है। वह वर्ष 2020 में राजस्व विभाग में क्लर्क के पद पर भर्ती हुआ था। पिछले करीब तीन महीने से उसकी तैनाती रायपुररानी तहसील में थी। शिकायत मिलने के बाद ACB की टीम ने मामले में कार्रवाई की योजना बनाई और शिकायतकर्ता के माध्यम से कथित रिश्वत की रकम आरोपी तक पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई।

1.20 लाख रुपये में तय हुआ था सौदा

मामले में शिकायतकर्ता हरयोली गांव निवासी अनवर खान ने बताया कि वह अपने प्रॉपर्टी डीलर दोस्त कर्म सिंह के साथ रजिस्ट्री से जुड़े काम के सिलसिले में अमित से मिले थे। उन्हें एक शोरूम और दो कनाल जमीन की रजिस्ट्री करवानी थी। आरोप है कि इस काम के बदले क्लर्क ने शुरुआत में करीब डेढ़ लाख रुपये की मांग की थी। बातचीत के बाद कथित तौर पर 1.20 लाख रुपये में सौदा तय हुआ।

शिकायतकर्ता के अनुसार, तय रकम में से 50 हजार रुपये एडवांस के तौर पर दिए जा चुके थे। शेष 70 हजार रुपये शुक्रवार को दिए जाने थे। अनवर खान ने इस मांग को लेकर ACB के समक्ष शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद टीम ने मामले में कार्रवाई की तैयारी की। शिकायत के आधार पर टीम ने आरोपी को कथित रिश्वत की रकम लेते हुए पकड़ने की योजना बनाई।

कार में रकम रखने के लिए कहा

ACB की टीम ने कार्रवाई के दौरान अनवर खान को 70 हजार रुपये देकर अमित के पास भेजा। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब उसने अमित से रकम देने के बारे में पूछा तो आरोपी ने तहसील परिसर की पार्किंग में खड़ी एक कार में पैसे रखने को कहा। बताया गया कि अमित उसके साथ कुछ दूरी तक बाहर आया और रिमोट का बटन दबाकर कार खोल दी।

इसके बाद अनवर खान ने कथित तौर पर 70 हजार रुपये कार की सीट पर रख दिए। जैसे ही अमित वहां से अपने कार्यालय की ओर जाने लगा, शिकायतकर्ता ने ACB की टीम को इशारा कर दिया। संकेत मिलते ही टीम सक्रिय हुई और अमित के कार्यालय तक पहुंचकर उसे काबू कर लिया।

कार की सीट से बरामद किए 70 हजार रुपये

कार्रवाई के बाद ACB की टीम आरोपी को अपने साथ लेकर पार्किंग में खड़ी कार तक पहुंची। वहां सीट पर रखी 70 हजार रुपये की रकम बरामद की गई। इस तरह शिकायतकर्ता की ओर से बताए गए घटनाक्रम के आधार पर टीम ने आरोपी क्लर्क को हिरासत में लिया और मामले से संबंधित कार्रवाई शुरू की।

इस कार्रवाई में शिकायतकर्ता की भूमिका अहम रही, क्योंकि उसने कथित रिश्वत की मांग के संबंध में पहले ही ACB को जानकारी दी थी। इसके बाद टीम ने रकम सौंपने की प्रक्रिया पर नजर रखी और शिकायतकर्ता के संकेत के बाद कार्रवाई की। मामले में आगे की जांच के दौरान रिश्वत की मांग, रकम के लेन-देन और अन्य संबंधित पहलुओं की पड़ताल की जानी है।

नायब तहसीलदार शिवराज सिंह के नाम पर हिस्सा मांगने का आरोप

शिकायतकर्ता अनवर खान ने आरोप लगाया कि अमित ने कथित रिश्वत की रकम में से एक बड़ा हिस्सा नायब तहसीलदार शिवराज सिंह को देने की बात कही थी। उनके मुताबिक, रकम को लेकर बातचीत के दौरान आरोपी ने यह कहा था कि इसमें नायब तहसीलदार का भी हिस्सा शामिल है।

हालांकि, किसी अधिकारी का नाम सामने आने और उसके खिलाफ आरोप लगाए जाने मात्र से उसकी संलिप्तता साबित नहीं होती। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ACB की जांच में नायब तहसीलदार की भूमिका अभी स्पष्ट नहीं हुई है। ऐसे में मामले की जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

रायपुररानी तहसील में हुई इस कार्रवाई ने राजस्व विभाग में सरकारी कामकाज के बदले कथित तौर पर पैसे मांगने के आरोपों को लेकर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल, मामले में आरोपी क्लर्क की गिरफ्तारी और कार से रकम की बरामदगी प्रमुख तथ्य हैं, जबकि अन्य आरोपों की पुष्टि जांच के आधार पर होनी बाकी है।