पाकिस्तान में आतंकियों से मुठभेड़, 19 सैनिकों की मौत और 45 आतंकी ढेर
पाकिस्तान में TTP आतंकियों के साथ चार दिन तक चली मुठभेड़ों में 19 पाक सैनिक और 45 आतंकी मारे गए। सरकार ने अफगान आतंकियों की भूमिका बताई और शरणार्थियों को वापस भेजने पर जोर दिया।
• पाकिस्तान में TTP आतंकियों के साथ मुठभेड़ों में 19 पाक सैनिक और 45 आतंकी मारे गए
• सेना और सरकार का आरोप, हमलों में अफगान नागरिकों की सीधी भूमिका
• प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आतंकवाद के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ने की बात कही
इस्लामाबाद। पाकिस्तान जिस आतंकवाद को सालों तक पालता-पोसता और पड़ोसी देशों के खिलाफ इस्तेमाल करता रहा, वही अब उसके लिए मुसीबत बन गया है। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में सुरक्षा बलों और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों के बीच चार दिन तक चली मुठभेड़ों में 19 पाकिस्तानी सैनिकों और 45 आतंकियों की मौत हो गई। इन अभियानों में सेना ने भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद भी बरामद किए हैं।
सेना की रिपोर्ट के अनुसार, बाजौर जिले में 22 आतंकी मारे गए, जबकि दक्षिण वजीरिस्तान में 13 आतंकियों को ढेर किया गया। हालांकि, इस दौरान 12 पाकिस्तानी सैनिकों की भी जान गई। वहीं लोअर दीर जिले के लाल किला मैदान इलाके में हुई मुठभेड़ में 7 सैनिक और 10 आतंकी मारे गए।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने हालात का जायजा लेने के लिए बन्नू का दौरा किया, घायल जवानों से मुलाकात की और मारे गए सैनिकों के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। शरीफ ने दोहराया कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई समझौता नहीं करेगा।
पाकिस्तान की सेना और सरकार का दावा है कि इन हमलों में अफगानिस्तान से आए आतंकी शामिल हैं। सेना की मीडिया इकाई ISPR के मुताबिक खुफिया रिपोर्टों ने साफ कर दिया है कि अफगान नागरिक सीधे तौर पर आतंकी हमलों में शामिल रहे। यही कारण है कि शरीफ सरकार पाकिस्तान में रह रहे अवैध अफगान शरणार्थियों को वापस भेजने पर जोर दे रही है।
गौरतलब है कि पाकिस्तान लंबे समय तक आतंकवादी संगठनों को भारत विरोधी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल करता रहा, लेकिन अब वही संगठन उसकी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं। यह घटनाक्रम इस बात का सबूत है कि कट्टरपंथ की आग भड़काकर कोई भी देश खुद को सुरक्षित नहीं रख सकता।
Akhil Mahajan