ईरान पर हमले से वैश्विक तेल संकट की आशंका, पंजाब में एयर ट्रैफिक ठप; अमृतसर-चंडीगढ़ से दुबई-शारजाह उड़ानें रद्

अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है। कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है और अमृतसर-चंडीगढ़ से दुबई व शारजाह की कई उड़ानें रद्द हो गई हैं।

ईरान पर हमले से वैश्विक तेल संकट की आशंका, पंजाब में एयर ट्रैफिक ठप; अमृतसर-चंडीगढ़ से दुबई-शारजाह उड़ानें रद्

ईरान पर हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने का खतरा
मिडिल ईस्ट तनाव का असर पंजाब में दिखा, अमृतसर और चंडीगढ़ से UAE की फ्लाइट्स रद्द
खार्ग आइलैंड के पास धमाके, लेकिन होर्मुज स्ट्रेट से तेल सप्लाई फिलहाल जारी


मिडिल ईस्ट में बढ़ते सैन्य तनाव ने एक बार फिर पूरी दुनिया को आर्थिक अनिश्चितता के मुहाने पर ला खड़ा किया है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई से वैश्विक तेल बाजार में भारी हलचल मच गई है। यह क्षेत्र दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई का केंद्र है, ऐसे में यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें और महंगाई बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है।

अंतरराष्ट्रीय एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक यदि तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो बाजार खुलते ही सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। हाल ही में कच्चा तेल करीब 70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जो पिछले कई महीनों का उच्चतम स्तर है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि हालात और बिगड़े तो यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है, जिसका सीधा असर पेट्रोल-डीजल के दामों और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।

खार्ग आइलैंड के पास धमाके, होर्मुज स्ट्रेट पर नजर

ईरान के खार्ग आइलैंड के पास धमाकों की खबर ने बाजार की चिंता और बढ़ा दी है। यही वह इलाका है, जहां से ईरान का अधिकांश तेल निर्यात होता है। हालांकि राहत की बात यह है कि अब तक होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के लिए बेहद अहम है, क्योंकि यहां से रोज लाखों बैरल तेल गुजरता है। यदि इस रास्ते पर संकट गहराया तो वैश्विक ऊर्जा संकट और गहरा सकता है।

पंजाब में दिखा सीधा असर, एयरपोर्ट्स पर सैकड़ों यात्री फंसे

मिडिल ईस्ट में तनाव का असर अब भारत, खासकर पंजाब में साफ दिखाई दे रहा है। अमृतसर और चंडीगढ़ से दुबई और संयुक्त अरब अमीरात जाने वाली कई उड़ानों को अचानक रद्द कर दिया गया।

अमृतसर एयरपोर्ट पर 4 फ्लाइट्स कैंसिल

श्री गुरु रामदास जी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कुल 4 फ्लाइट्स प्रभावित हुईं।

  • रात 9 बजे शारजाह से अमृतसर आने वाली इंडिगो फ्लाइट रद्द।

  • रात 1:15 बजे अमृतसर से दुबई जाने वाली एयर इंडिया एक्सप्रेस फ्लाइट कैंसिल।

  • रविवार सुबह 7:50 बजे दुबई जाने वाली स्पाइसजेट फ्लाइट भी रद्द।

एयरपोर्ट के बाहर यात्रियों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। कई परिवार अपने रिश्तेदारों को लेने पहुंचे थे, लेकिन उड़ानें रद्द होने की सूचना के बाद मायूस लौटना पड़ा।

हवा में उड़ानें डायवर्ट, यात्रियों में दहशत

सबसे नाटकीय स्थिति तब बनी जब दो फ्लाइट्स उड़ान भरने के बाद वापस लौटा दी गईं। स्पाइसजेट की अमृतसर-दुबई फ्लाइट को मिडिल ईस्ट एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद होने के कारण अहमदाबाद डायवर्ट किया गया। वहां रिफ्यूलिंग के बाद उसे वापस अमृतसर बुला लिया गया। इसी तरह इंडिगो की अमृतसर-शारजाह फ्लाइट को सूरत डायवर्ट कर लौटाया गया।

चंडीगढ़ से भी दुबई फ्लाइट रद्द

चंडीगढ़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शाम 4:50 बजे दुबई जाने वाली फ्लाइट भी रद्द कर दी गई। सुबह तक एयर ट्रैफिक सामान्य था, लेकिन मिडिल ईस्ट में हमलों की खबर के बाद कई देशों ने एहतियातन अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। लंबा रूट लेने और सुरक्षा कारणों से देरी और कैंसिलेशन बढ़ गए।

खाड़ी देशों से पंजाब का गहरा जुड़ाव

सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2021 में पंजाब के करीब 70,500 श्रमिकों को खाड़ी देशों के लिए इमिग्रेशन क्लीयरेंस दिया गया था। वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक मानी जाती है। रोजाना अमृतसर, चंडीगढ़ और दिल्ली से 4,000 से 6,000 यात्री मिडिल ईस्ट के लिए यात्रा करते हैं।

अमृतसर एयरपोर्ट से प्रतिदिन लगभग 10,000 यात्रियों की आवाजाही होती है, जिनमें बड़ा हिस्सा दुबई, शारजाह और दोहा जाने वालों का है। पंजाब से विदेश जाने वाले करीब 45 प्रतिशत यात्री दिल्ली IGI एयरपोर्ट का उपयोग करते हैं। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में ब्लू कॉलर वर्कर्स काम करते हैं, जिनकी रोजी-रोटी इस क्षेत्र की स्थिरता पर निर्भर करती है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम लोगों के जीवन पर भी साफ दिखाई देने लगा है। आने वाले कुछ दिन तय करेंगे कि हालात संभलते हैं या दुनिया को एक और आर्थिक झटका झेलना पड़ेगा।