शादीशुदा पुरुषों में आत्महत्या के मामले बढ़े, NCRB रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता?इसके पीछे क्या हैं असली कारण?
NCRB के अनुसार शादी से जुड़े विवादों के कारण आत्महत्या करने वाले पुरुषों की संख्या 2015 से 2024 के बीच 82% बढ़ी है। वैवाहिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य चिंता का विषय बने हैं।
NCRB के आंकड़ों में शादीशुदा पुरुषों की आत्महत्या के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज
2015 के मुकाबले 2024 में ऐसे मामलों की संख्या 82% तक बढ़ी
वैवाहिक विवाद, तलाक, दहेज और विवाहेतर संबंध प्रमुख कारणों में शामिल
शादीशुदा पुरुषों में बढ़े आत्महत्या के मामले, NCRB आंकड़ों ने बढ़ाई चिंता
देश में शादीशुदा पुरुषों के आत्महत्या मामलों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का विषय बनती जा रही है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, वैवाहिक समस्याओं से जुड़े कारणों के चलते आत्महत्या करने वाले पुरुषों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2015 में 2,497 पुरुषों ने शादी से जुड़े विवादों और परिस्थितियों के कारण आत्महत्या की थी। वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 4,536 तक पहुंच गई। यानी करीब 82 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती पारिवारिक संरचना, बढ़ता मानसिक तनाव और रिश्तों में बढ़ती जटिलताएं इस समस्या को गंभीर बना रही हैं। वैवाहिक जीवन में पैदा होने वाले तनाव का असर सीधे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
NCRB के अनुसार, इन मामलों के पीछे पति-पत्नी के बीच विवाद, दहेज संबंधी तनाव, विवाहेतर संबंध, तलाक और पारिवारिक कलह जैसे कारण प्रमुख रूप से सामने आए हैं। कई मामलों में लंबे समय तक चले मानसिक तनाव और रिश्तों में अस्थिरता भी बड़ी वजह बनती है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैवाहिक समस्याओं को समय रहते संवाद और काउंसलिंग के माध्यम से सुलझाने की जरूरत है। परिवार और समाज को भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील होने की आवश्यकता है ताकि तनावग्रस्त लोगों को समय पर सहायता मिल सके।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि पुरुषों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करने की प्रवृत्ति अभी भी कम है। कई लोग सामाजिक दबाव और झिझक के कारण अपनी परेशानियां साझा नहीं कर पाते, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
pooja