दिल्ली-हरियाणा से लेह जाना होगा आसान, मनाली-लेह मार्ग बनेगा ऑल-वेदर रोड
मनाली-लेह हाईवे पर बनने वाली तीन नई सुरंगों से दूरी 50 किलोमीटर कम होगी और 10 घंटे का सफर 6 घंटे में पूरा होगा। दिल्ली-हरियाणा के पर्यटकों को बड़ा लाभ मिलेगा।
- मनाली-लेह हाईवे पर बनेंगी तीन मेगा सुरंगें
- 50 किलोमीटर घटेगी दूरी, 10 घंटे का सफर सिमटकर 6 घंटे का होगा
- दिल्ली-हरियाणा से लेह जाने वाले लाखों पर्यटकों को मिलेगा बड़ा फायदा
दिल्ली, हरियाणा और एनसीआर से हर साल हजारों पर्यटक लेह-लद्दाख की रोमांचक यात्रा के लिए मनाली मार्ग का उपयोग करते हैं। अब इन यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को देश के सबसे आधुनिक और वर्षभर चालू रहने वाले पर्वतीय मार्गों में बदलने की तैयारी कर रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत बारालाचा ला, लाचुलुंग ला और तंगलंग ला के नीचे तीन नई सुरंगों का निर्माण प्रस्तावित है।
इन सुरंगों के निर्माण के बाद मनाली-लेह मार्ग देश के सबसे आधुनिक ऑल-वेदर हाईवे में शामिल हो जाएगा। सबसे बड़ी बात यह है कि मनाली और लेह के बीच की दूरी करीब 50 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। वर्तमान में लगभग 10 घंटे में पूरा होने वाला सफर घटकर करीब 6 घंटे का रह जाएगा।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में इस परियोजना की जानकारी साझा करते हुए बताया कि तीनों सुरंगों की डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने का कार्य जारी है। इन परियोजनाओं का जिम्मा नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHIDCL) को सौंपा गया है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार बारालाचा ला के नीचे लगभग 13.2 किलोमीटर, लाचुलुंग ला के नीचे करीब 14.7 किलोमीटर और तंगलंग ला के नीचे लगभग 7.3 किलोमीटर लंबी सुरंगों का निर्माण किया जाएगा। इन सुरंगों के बनने के बाद वाहन बर्फबारी और खराब मौसम से प्रभावित ऊंचे दर्रों को पार किए बिना सीधे सुरंगों के रास्ते यात्रा कर सकेंगे।
वर्तमान में सर्दियों और खराब मौसम के दौरान इस मार्ग पर यात्रा करना चुनौतीपूर्ण रहता है। कई बार बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती हैं। नई सुरंगों के बनने से यात्रा न केवल सुरक्षित होगी बल्कि सालभर निर्बाध रूप से जारी रह सकेगी।
इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, रोहतक, हिसार, करनाल, पानीपत और पूरे एनसीआर के उन पर्यटकों को मिलेगा जो हर साल बाइक, कार और टूर पैकेज के माध्यम से लेह-लद्दाख की यात्रा करते हैं। यात्रा समय कम होने से पर्यटन को नई गति मिलेगी और यात्रियों का खर्च भी घटेगा।
बेहतर कनेक्टिविटी का सीधा लाभ पर्यटन उद्योग को मिलेगा। मनाली, लाहौल-स्पीति और लेह में होटल उद्योग, होम-स्टे, टैक्सी कारोबार, रेस्टोरेंट और स्थानीय व्यापार को नया बल मिलेगा। इसके अलावा किसानों और बागवानों को भी अपने उत्पाद बाजार तक तेजी से पहुंचाने की सुविधा मिलेगी।
स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सड़क अवसंरचना मजबूत होने से क्षेत्र में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
सामरिक दृष्टि से भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मनाली-लेह मार्ग लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना की रसद, सैन्य उपकरणों और जवानों की आवाजाही का प्रमुख माध्यम है। नई सुरंगों के निर्माण के बाद सेना की आपूर्ति व्यवस्था अधिक तेज, सुरक्षित और मौसम पर कम निर्भर हो जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अटल टनल, जोजिला टनल और निर्माणाधीन शिंकू ला सुरंग की तर्ज पर यह परियोजना भी हिमालयी सड़क नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। परियोजना पूरी होने के बाद मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग देश के सबसे आधुनिक, सुरक्षित और ऑल-वेदर पर्वतीय मार्गों में शामिल हो जाएगा।
Akhil Mahajan