116 करोड़ के एफडी घोटाले में विक्रम वाधवा की डिफॉल्ट बेल पर आज फैसला
116 करोड़ के चंडीगढ़ एफडी घोटाले में विक्रम वाधवा की डिफॉल्ट बेल पर आज फैसला होगा। CBI ने कोर्ट में 69 करोड़ रुपए की संपत्तियों का ब्योरा पेश किया।
116 करोड़ के एफडी घोटाले में विक्रम वाधवा की डिफॉल्ट बेल पर आज फैसला
CBI ने कोर्ट में 69 करोड़ रुपए की संपत्तियों का ब्योरा पेश किया
करीबी लोगों और शेल कंपनियों के जरिए संपत्तियां खरीदने का दावा
चंडीगढ़ के बहुचर्चित 116 करोड़ रुपए के एफडी घोटाले में कथित मास्टरमाइंड विक्रम वाधवा की डिफॉल्ट बेल याचिका पर आज जिला अदालत फैसला सुनाएगी। वाधवा ने अदालत में दलील दी है कि जांच एजेंसी तय समय सीमा के भीतर चालान पेश नहीं कर सकी, इसलिए उसे डिफॉल्ट बेल का लाभ दिया जाए।
यह मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों के करोड़ों रुपए से जुड़े एफडी घोटाले का है। मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है। इस केस में अब तक 10 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच एजेंसी चंडीगढ़ व पंचकूला की अदालतों में चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है।
सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत में विक्रम वाधवा से जुड़ी करोड़ों रुपए की संपत्तियों का विस्तृत ब्योरा पेश किया। जांच एजेंसी के अनुसार वाधवा ने कथित तौर पर सरकारी धन का इस्तेमाल कर चंडीगढ़, मोहाली और न्यू चंडीगढ़ में बड़ी मात्रा में चल और अचल संपत्तियां खरीदीं।
CBI के दस्तावेजों के मुताबिक वर्ष 2025 के दौरान करीब 69 करोड़ रुपए की आठ महंगी संपत्तियां खरीदी गईं। इनमें प्लॉट, फार्म हाउस, मकान और अन्य रियल एस्टेट निवेश शामिल हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि इन संपत्तियों की खरीद में घोटाले से जुड़े धन का उपयोग किया गया।
जांच में सामने आया है कि चंडीगढ़ के सेक्टर-33 में करीब 24.50 करोड़ रुपए का दो कनाल का प्लॉट खरीदा गया। इसके अलावा सेक्टर-21सी में लगभग 10 करोड़ रुपए का एक कनाल का डबल स्टोरी मकान भी खरीदा गया। वहीं न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्थित ओमैक्स कैसिया हिल्स में करीब 2.25 करोड़ रुपए का एक एकड़ का फार्म हाउस खरीदने की जानकारी भी सामने आई है।
CBI ने यह भी बताया कि ग्रेटर पंजाब सोसायटी में करीब 4 करोड़ रुपए का 18 मरला का प्लॉट खरीदा गया, जिसकी राशि अग्रिम रूप से अदा की गई थी। जांच एजेंसी का कहना है कि इन संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज उसके कब्जे में हैं।
जांच के दौरान कुछ ऐसे दस्तावेज भी मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि कई संपत्तियां वाधवा के करीबी लोगों के नाम पर खरीदी गई थीं। CBI का दावा है कि कुछ भुगतान सीधे खातों से किए गए, जबकि अधिकांश रकम विभिन्न शेल कंपनियों के जरिए ट्रांसफर की गई।
एजेंसी ने इन संपत्तियों से संबंधित रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं। इसके लिए चंडीगढ़ प्रशासन और GMADA से भी जरूरी दस्तावेज जुटाए गए हैं।
CBI के अनुसार आरोपियों ने चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड, नगर निगम और अन्य सरकारी संस्थाओं की एफडी में जमा धन को फर्जी कंपनियों के माध्यम से रियल एस्टेट कारोबार में लगाया। आरोप है कि धन के वास्तविक उपयोग को छिपाने के लिए फर्जी एफडी दस्तावेज तैयार किए गए।
जांच एजेंसी का दावा है कि पूरे नेटवर्क के जरिए सरकारी धन को अलग-अलग कंपनियों और खातों में घुमाया गया और उससे करोड़ों रुपए का लाभ अर्जित किया गया। फिलहाल अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
pooja